• यह पटना से प्रकाशित दोआबा पत्रिका के प्रवेशांक की समीक्षा है। दोआबा के संपादक जाबिर हुसेन वरिष्ठ राजनेता और समाजकर्मी भी रहे हैं। वे लगभग एक दशक तक बिहार विधान परिषद के सभापति रहे। उन्होंने बिहार विधान परिषद् की पत्रिका ‘साक्ष्य’ नामक पत्रिका का भी संपादन किया था।

    दोआबा के समीक्षित अंक में 100 से अधिक रचानकारों की रचानाएं प्रकाशित हुईं थी…[Read more]

  • वर्ष 2022 में मेरे द्वारा संपादित ईवी रामसामी पेरियार के लेखों और भाषणों का संकलन हिंदी में पुस्तकाकार प्रकाशित होने पर एक लेखक ने कुछ ऐसे मुद्दों को लेकर विवाद खड़ा करने की कोशिश की थी, जिसका कोई आधार नहीं था। मैंने यह लेख उनके द्वारा इस संबंध में की गई टिप्पणी के उत्तर में लिखा गया था।

    इस लेख में मैंने बताने की कोशिश की है कि हिंदी के प्र…[Read more]

  • वर्ष 2022 में मेरे द्वारा संपादित ईवी रामसामी पेरियार के लेखों और भाषणों का संकलन हिंदी में पुस्तकाकार प्रकाशित होने पर एक लेखक ने कुछ ऐसे मुद्दों को लेकर विवाद खड़ा करने की कोशिश की थी, जिसका कोई आधार नहीं था। मैंने यह लेख उनके द्वारा इस संबंध में की गई टिप्पणी के उत्तर में लिखा गया था।

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  • वर्ष 2022 में मेरे द्वारा संपादित ईवी रामसामी पेरियार के लेखों और भाषणों का संकलन हिंदी में पुस्तकाकार प्रकाशित होने पर एक लेखक ने कुछ ऐसे मुद्दों को लेकर विवाद खड़ा करने की कोशिश की थी, जिसका कोई आधार नहीं था। मैंने यह लेख उनके द्वारा इस संबंध में की गई टिप्पणी के उत्तर में लिखा गया था।

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  • वर्ष 2022 में मेरे द्वारा संपादित ईवी रामसामी पेरियार के लेखों और भाषणों का संकलन हिंदी में पुस्तकाकार प्रकाशित होने पर एक लेखक ने कुछ ऐसे मुद्दों को लेकर विवाद खड़ा करने की कोशिश की थी, जिसका कोई आधार नहीं था। मैंने यह लेख उनके द्वारा इस संबंध में की गई टिप्पणी के उत्तर में लिखा गया था।

    इस लेख में मैंने बताने की कोशिश की है कि हिंदी के प्र…[Read more]

  • वर्ष 2022 में मेरे द्वारा संपादित ईवी रामसामी पेरियार के लेखों और भाषणों का संकलन हिंदी में पुस्तकाकार प्रकाशित होने पर एक लेखक ने कुछ ऐसे मुद्दों को लेकर विवाद खड़ा करने की कोशिश की थी, जिसका कोई आधार नहीं था। मैंने यह लेख उनके द्वारा इस संबंध में की गई टिप्पणी के उत्तर में लिखा गया था।

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  • For the Brockport College of the State University of New York, March 2022 was a period of frenetic activity. The College faced acerbic attacks from White politicians and a section of newspapers. Reason: The College had invited a convicted Black Panther intellectual for giving a lecture.

    It may be pertinent to mention here that Black Panther was…[Read more]

  • For the Brockport College of the State University of New York, March 2022 was a period of frenetic activity. The College faced acerbic attacks from White politicians and a section of newspapers. Reason: The College had invited a convicted Black Panther intellectual for giving a lecture.

    It may be pertinent to mention here that Black Panther was…[Read more]

  • मार्च, 2022 में एक अमेरिकी कॉलेज में 50 साल की सजा काट कर जेल से पेरोल पर छूटे ब्लैक पैंथर के सदस्य को भाषण देने के लिए बुलाया गया था। श्वेत-श्रेष्ठतावादियों ने कार्यक्रम का जोरदार विरोध किया, लेकिन कॉलेज ने कार्यक्रम रद्द करने से इंकार कर दिया। कालेज ने इस कार्यक्रम से कथित तौर अपनी भावनाएं आहत होने का आरोप लगाने वालों को मान…[Read more]

  • मार्च, 2022 में एक अमेरिकी कॉलेज में 50 साल की सजा काट कर जेल से पेरोल पर छूटे ब्लैक पैंथर के सदस्य को भाषण देने के लिए बुलाया गया था। श्वेत-श्रेष्ठतावादियों ने कार्यक्रम का जोरदार विरोध किया, लेकिन कॉलेज ने कार्यक्रम रद्द करने से इंकार कर दिया। कालेज ने इस कार्यक्रम से कथित तौर अपनी भावनाएं आहत होने का आरोप लगाने वालों को मान…[Read more]

  • मार्च, 2022 में एक अमेरिकी कॉलेज में 50 साल की सजा काट कर जेल से पेरोल पर छूटे ब्लैक पैंथर के सदस्य को भाषण देने के लिए बुलाया गया था। श्वेत-श्रेष्ठतावादियों ने कार्यक्रम का जोरदार विरोध किया, लेकिन कॉलेज ने कार्यक्रम रद्द करने से इंकार कर दिया। कालेज ने इस कार्यक्रम से कथित तौर अपनी भावनाएं आहत होने का आरोप लगाने वालों को मान…[Read more]

  • यह लेख उत्तर-मानववाद से संबंधित विमर्श से हिंदी पाठकों को परिचित करवाने के उद्देश्य से लिखा गया है।

    इस लेख में कहा गया है कि विकास केवल भौतिक-प्राकृतिक जगत में ही नहीं, विचारों के क्षेत्र में भी होता है। दुनिया लगातार बदल रही है, विकसित हो रही है। आज न हम कार्ल मार्क्स के ज़माने में हैं, न गांधी-आम्बेडकर-लोहिया के ज़माने में। आर्थिक-साम…[Read more]

  • यह लेख उत्तर-मानववाद से संबंधित विमर्श से हिंदी पाठकों को परिचित करवाने के उद्देश्य से लिखा गया है।

    इस लेख में कहा गया है कि विकास केवल भौतिक-प्राकृतिक जगत में ही नहीं, विचारों के क्षेत्र में भी होता है। दुनिया लगातार बदल रही है, विकसित हो रही है। आज न हम कार्ल मार्क्स के ज़माने में हैं, न गांधी-आम्बेडकर-लोहिया के ज़माने में। आर्थिक-साम…[Read more]

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    इस लेख में कहा गया है कि विकास केवल भौतिक-प्राकृतिक जगत में ही नहीं, विचारों के क्षेत्र में भी होता है। दुनिया लगातार बदल रही है, विकसित हो रही है। आज न हम कार्ल मार्क्स के ज़माने में हैं, न गांधी-आम्बेडकर-लोहिया के ज़माने में। आर्थिक-साम…[Read more]

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  • यह लेख उत्तर-मानववाद से संबंधित विमर्श से हिंदी पाठकों को परिचित करवाने के उद्देश्य से लिखा गया है।

    इस लेख में कहा गया है कि विकास केवल भौतिक-प्राकृतिक जगत में ही नहीं, विचारों के क्षेत्र में भी होता है। दुनिया लगातार बदल रही है, विकसित हो रही है। आज न हम कार्ल मार्क्स के ज़माने में हैं, न गांधी-आम्बेडकर-लोहिया के ज़माने में। आर्थिक-साम…[Read more]

  • Shrinkhal Khemraj is a child poet of an era of transition from post-modernism to post-humanism. And he is worried about all the things which are vanishing as a result. The vanishing things have made his dreams nightmarish.
    He was born into a Buddhist family. Converts to Buddhism from a Dalit background, his family believes in and upholds…[Read more]

  • Shrinkhal Khemraj is a child poet of an era of transition from post-modernism to post-humanism. And he is worried about all the things which are vanishing as a result. The vanishing things have made his dreams nightmarish.
    He was born into a Buddhist family. Converts to Buddhism from a Dalit background, his family believes in and upholds…[Read more]

  • Shrinkhal Khemraj is a child poet of an era of transition from post-modernism to post-humanism. And he is worried about all the things which are vanishing as a result. The vanishing things have made his dreams nightmarish.
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  • Shrinkhal Khemraj is a child poet of an era of transition from post-modernism to post-humanism. And he is worried about all the things which are vanishing as a result. The vanishing things have made his dreams nightmarish.
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Pramod Ranjan

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Active 2 years ago