• इस लेख में बहुजन साहित्य की अवधारणा की आवश्यकता को रेखांकित किया गया है। बहुजन साहित्य की अवधारणा का पैमाना लेखक का कुल लेखकीय-वैचारिक अवदान है। इसलिए द्विज समुदाय से आने वाले ऐसे लेखकों के लिए भी इसमें स्थान है, जिनकी दृढ पक्षधरता इन वंचित तबकों के प्रति हो। जैसा कि हम फारवर्ड प्रेस में कहते आए हैं कि यह अवधारण…[Read more]

  • इस लेख में बहुजन साहित्य की अवधारणा की आवश्यकता को रेखांकित किया गया है। बहुजन साहित्य की अवधारणा का पैमाना लेखक का कुल लेखकीय-वैचारिक अवदान है। इसलिए द्विज समुदाय से आने वाले ऐसे लेखकों के लिए भी इसमें स्थान है, जिनकी दृढ पक्षधरता इन वंचित तबकों के प्रति हो। जैसा कि हम फारवर्ड प्रेस में कहते आए हैं कि यह अवधारण…[Read more]

  • The concept of Bahujan literature is based on the sum total of the literary contribution of a writer. Hence, it also has place for Dwij writers with an unflinching commitment to the cause of the deprived communities. As we have been arguing in the columns of FORWARD Press, the concept of Bahujan literature is a huge umbrella, under which Dalit,…[Read more]

  • The concept of Bahujan literature is based on the sum total of the literary contribution of a writer. Hence, it also has place for Dwij writers with an unflinching commitment to the cause of the deprived communities. As we have been arguing in the columns of FORWARD Press, the concept of Bahujan literature is a huge umbrella, under which Dalit,…[Read more]

  • इस लेख में बहुजन साहित्य की अवधारणा की आवश्यकता को रेखांकित किया गया है। बहुजन साहित्य की अवधारणा का पैमाना लेखक का कुल लेखकीय-वैचारिक अवदान है। इसलिए द्विज समुदाय से आने वाले ऐसे लेखकों के लिए भी इसमें स्थान है, जिनकी दृढ पक्षधरता इन वंचित तबकों के प्रति हो। जैसा कि हम फारवर्ड प्रेस में कहते आए हैं कि यह अवधारण…[Read more]

  • The concept of Bahujan literature is based on the sum total of the literary contribution of a writer. Hence, it also has place for Dwij writers with an unflinching commitment to the cause of the deprived communities. As we have been arguing in the columns of FORWARD Press, the concept of Bahujan literature is a huge umbrella, under which Dalit,…[Read more]

  • कोविड महामारी से निपटने के लिए विज्ञान की भूमिका को सर्वोपरि बताया गया। लेकिन विज्ञान के नाम पर अनेक ऐसी चीजें भी हुईं, जिसने इस विभिषिका को निर्मित करने तथा इसे और भयावह बनाने में योगदान किया। इस दौरन सांख्यिकी के आंकड़ों को विज्ञान बनाकर प्रचारित किया गया तथा दुनिया के अधिकांश हिस्से को लॉकडाउन में धकेल दिया गया। ऐसे में सवाल यह…[Read more]

  • कोविड महामारी से निपटने के लिए विज्ञान की भूमिका को सर्वोपरि बताया गया। लेकिन विज्ञान के नाम पर अनेक ऐसी चीजें भी हुईं, जिसने इस विभिषिका को निर्मित करने तथा इसे और भयावह बनाने में योगदान किया। इस दौरन सांख्यिकी के आंकड़ों को विज्ञान बनाकर प्रचारित किया गया तथा दुनिया के अधिकांश हिस्से को लॉकडाउन में धकेल दिया गया। ऐसे में सवाल यह…[Read more]

  • कोविड महामारी से निपटने के लिए विज्ञान की भूमिका को सर्वोपरि बताया गया। लेकिन विज्ञान के नाम पर अनेक ऐसी चीजें भी हुईं, जिसने इस विभिषिका को निर्मित करने तथा इसे और भयावह बनाने में योगदान किया। इस दौरन सांख्यिकी के आंकड़ों को विज्ञान बनाकर प्रचारित किया गया तथा दुनिया के अधिकांश हिस्से को लॉकडाउन में धकेल दिया गया। ऐसे में सवाल यह…[Read more]

  • कोविड महामारी से निपटने के लिए विज्ञान की भूमिका को सर्वोपरि बताया गया। लेकिन विज्ञान के नाम पर अनेक ऐसी चीजें भी हुईं, जिसने इस विभिषिका को निर्मित करने तथा इसे और भयावह बनाने में योगदान किया। इस दौरन सांख्यिकी के आंकड़ों को विज्ञान बनाकर प्रचारित किया गया तथा दुनिया के अधिकांश हिस्से को लॉकडाउन में धकेल दिया गया। ऐसे में सवाल यह…[Read more]

  • कोविड महामारी से निपटने के लिए विज्ञान की भूमिका को सर्वोपरि बताया गया। लेकिन विज्ञान के नाम पर अनेक ऐसी चीजें भी हुईं, जिसने इस विभिषिका को निर्मित करने तथा इसे और भयावह बनाने में योगदान किया। इस दौरन सांख्यिकी के आंकड़ों को विज्ञान बनाकर प्रचारित किया गया तथा दुनिया के अधिकांश हिस्से को लॉकडाउन में धकेल दिया गया। ऐसे में सवाल यह…[Read more]

  • Pramod Ranjan wirft einen Blick aus Indien auf die Coronakrise und das wissenschaftliche Verständnis von der Welt, das oft erwähnt, aber meist ignoriert wird, sowie die Frage, wem das nutzt.

    Die übertriebene Angst vor Covid-19 hat die menschliche Zivilisation und Kultur in Gefahr gebracht. Die Richtung, in die sich die Menschheit bewegte, br…[Read more]

  • Pramod Ranjan wirft einen Blick aus Indien auf die Coronakrise und das wissenschaftliche Verständnis von der Welt, das oft erwähnt, aber meist ignoriert wird, sowie die Frage, wem das nutzt.

    Die übertriebene Angst vor Covid-19 hat die menschliche Zivilisation und Kultur in Gefahr gebracht. Die Richtung, in die sich die Menschheit bewegte, br…[Read more]

  • Pramod Ranjan wirft einen Blick aus Indien auf die Coronakrise und das wissenschaftliche Verständnis von der Welt, das oft erwähnt, aber meist ignoriert wird, sowie die Frage, wem das nutzt.

    Die übertriebene Angst vor Covid-19 hat die menschliche Zivilisation und Kultur in Gefahr gebracht. Die Richtung, in die sich die Menschheit bewegte, br…[Read more]

  • Pramod Ranjan wirft einen Blick aus Indien auf die Coronakrise und das wissenschaftliche Verständnis von der Welt, das oft erwähnt, aber meist ignoriert wird, sowie die Frage, wem das nutzt.

    Die übertriebene Angst vor Covid-19 hat die menschliche Zivilisation und Kultur in Gefahr gebracht. Die Richtung, in die sich die Menschheit bewegte, br…[Read more]

  • कोविड महामारी से निपटने के लिए विज्ञान की भूमिका को सर्वोपरि बताया गया। लेकिन विज्ञान के नाम पर अनेक ऐसी चीजें भी हुईं, जिसने इस विभिषिका को निर्मित करने तथा इसे और भयावह बनाने में योगदान किया। इस दौरन सांख्यिकी के आंकड़ों को विज्ञान बनाकर प्रचारित किया गया तथा दुनिया के अधिकांश हिस्से को लॉकडाउन में धकेल दिया गया। ऐसे में सवाल यह…[Read more]

  • Pramod Ranjan wirft einen Blick aus Indien auf die Coronakrise und das wissenschaftliche Verständnis von der Welt, das oft erwähnt, aber meist ignoriert wird, sowie die Frage, wem das nutzt.

    Die übertriebene Angst vor Covid-19 hat die menschliche Zivilisation und Kultur in Gefahr gebracht. Die Richtung, in die sich die Menschheit bewegte, br…[Read more]

  • कोविड-19 नामक संक्रामक रोग ने मनुष्य द्वारा रचित संसार के साथ ऐसा कुछ किया है जो पहले कभी न देखा गया, न सुना गया, और न ही कल्पित किया गया। वैसे तो प्रत्येक महामारी मनुष्य के मन में कुछ बेचैनियाँ पैदा करती ही हैं, लेकिन इस महामारी की अपूर्वता ज़्यादा बड़ी हद तक इसके प्रति सरकारी तंत्रों की अनुक्रिया, विश्व-संगठनों के रवैये, दैत्याकार मीडिया-कंपनि…[Read more]

  • कोविड-19 नामक संक्रामक रोग ने मनुष्य द्वारा रचित संसार के साथ ऐसा कुछ किया है जो पहले कभी न देखा गया, न सुना गया, और न ही कल्पित किया गया। वैसे तो प्रत्येक महामारी मनुष्य के मन में कुछ बेचैनियाँ पैदा करती ही हैं, लेकिन इस महामारी की अपूर्वता ज़्यादा बड़ी हद तक इसके प्रति सरकारी तंत्रों की अनुक्रिया, विश्व-संगठनों के रवैये, दैत्याकार मीडिया-कंपनि…[Read more]

  • कोविड-19 नामक संक्रामक रोग ने मनुष्य द्वारा रचित संसार के साथ ऐसा कुछ किया है जो पहले कभी न देखा गया, न सुना गया, और न ही कल्पित किया गया। वैसे तो प्रत्येक महामारी मनुष्य के मन में कुछ बेचैनियाँ पैदा करती ही हैं, लेकिन इस महामारी की अपूर्वता ज़्यादा बड़ी हद तक इसके प्रति सरकारी तंत्रों की अनुक्रिया, विश्व-संगठनों के रवैये, दैत्याकार मीडिया-कंपनि…[Read more]

  • Load More

Pramod Ranjan

Profile picture of Pramod Ranjan

@pramod

Active 2 years ago