• हिंदी कवि अरूण कमल से प्रमेाद रंजन की यह बातचीत पटना से प्रकाशित जन विकल्प के प्रवेशांक (जनवरी, 2007) में प्रकाशित हुई थी। साक्षात्कार के लिए अरुण कमल को प्रश्न साैंप दिए गए थे, जिसका उन्होंने लिखित उत्तर दिया था।

    इस साक्षात्कार में अरूण कमल ने जिन प्रश्नों के उत्तर दिए हैं, उनमें मुख्य निम्नांकित हैं :

    1. आपको २०वीं सदी के एक महत्वपूर्ण क…[Read more]

  • वर्ष 2007 में मधुर भंडारकर की फिल्म ‘ट्रैफिक सिग्नल’ आई थी। इस फिल्म में शहरों में हाशिए पर रहने वाली जिंदगियों का चित्रण था। फिल्म में छोटे-मोटे काम करने वाले, भीख मांग कर गुजारा करने वालों के साथ किन्नरों के त्रासद जीवन को भी दिखाया गया था। उस समय हिमाचल प्रदेश के कुछ लेखकों ने फिल्म में हिजड़ों को किन्नर कहने का का पुरजोर विरोध किया था। परिण…[Read more]

  • वर्ष 2007 में मधुर भंडारकर की फिल्म ‘ट्रैफिक सिग्नल’ आई थी। इस फिल्म में शहरों में हाशिए पर रहने वाली जिंदगियों का चित्रण था। फिल्म में छोटे-मोटे काम करने वाले, भीख मांग कर गुजारा करने वालों के साथ किन्नरों के त्रासद जीवन को भी दिखाया गया था। उस समय हिमाचल प्रदेश के कुछ लेखकों ने फिल्म में हिजड़ों को किन्नर कहने का का पुरजोर विरोध किया था। परिण…[Read more]

  • वर्ष 2007 में मधुर भंडारकर की फिल्म ‘ट्रैफिक सिग्नल’ आई थी। इस फिल्म में शहरों में हाशिए पर रहने वाली जिंदगियों का चित्रण था। फिल्म में छोटे-मोटे काम करने वाले, भीख मांग कर गुजारा करने वालों के साथ किन्नरों के त्रासद जीवन को भी दिखाया गया था। उस समय हिमाचल प्रदेश के कुछ लेखकों ने फिल्म में हिजड़ों को किन्नर कहने का का पुरजोर विरोध किया था। परिण…[Read more]

  • वर्ष 2007 में मधुर भंडारकर की फिल्म ‘ट्रैफिक सिग्नल’ आई थी। इस फिल्म में शहरों में हाशिए पर रहने वाली जिंदगियों का चित्रण था। फिल्म में छोटे-मोटे काम करने वाले, भीख मांग कर गुजारा करने वालों के साथ किन्नरों के त्रासद जीवन को भी दिखाया गया था। उस समय हिमाचल प्रदेश के कुछ लेखकों ने फिल्म में हिजड़ों को किन्नर कहने का का पुरजोर विरोध किया था। परिण…[Read more]

  • वर्ष 2007 में मधुर भंडारकर की फिल्म ‘ट्रैफिक सिग्नल’ आई थी। इस फिल्म में शहरों में हाशिए पर रहने वाली जिंदगियों का चित्रण था। फिल्म में छोटे-मोटे काम करने वाले, भीख मांग कर गुजारा करने वालों के साथ किन्नरों के त्रासद जीवन को भी दिखाया गया था। उस समय हिमाचल प्रदेश के कुछ लेखकों ने फिल्म में हिजड़ों को किन्नर कहने का का पुरजोर विरोध किया था। परिण…[Read more]

  • इस लेख में उपभोक्तावाद के सकारात्मक और नकारात्मक पहलुओं की चर्चा की गई है। लेख में बताया गया है कि उपभोक्तावाद परिवार की सामंती संरचना को तोड़ता है, तथा आधुनिक मूल्यों की स्थापना करता है। लेकिन इसके अनेक नकारात्मक पहलु भी हैं। इसके कारण कम आय वर्ग के परिवारों में पारंपरिक मूल्यों के ध्वस्त होने के कारण कई ऐसी दर्दनाक घटनाएं होती है…[Read more]

  • इस लेख में उपभोक्तावाद के सकारात्मक और नकारात्मक पहलुओं की चर्चा की गई है। लेख में बताया गया है कि उपभोक्तावाद परिवार की सामंती संरचना को तोड़ता है, तथा आधुनिक मूल्यों की स्थापना करता है। लेकिन इसके अनेक नकारात्मक पहलु भी हैं। इसके कारण कम आय वर्ग के परिवारों में पारंपरिक मूल्यों के ध्वस्त होने के कारण कई ऐसी दर्दनाक घटनाएं होती है…[Read more]

  • The scope of the traditions related to Mahishasur is vast. There is a memorial of him in Bundelkhand, preserved by the Archaelogical Survey of India. Khajuraho’s world-famous temples also have carvings of Mahishasur.

    On 9 October 2014, the police had raided the office of Forward Press. Some people associated with Hindu organizations had a c…[Read more]

  • The scope of the traditions related to Mahishasur is vast. There is a memorial of him in Bundelkhand, preserved by the Archaelogical Survey of India. Khajuraho’s world-famous temples also have carvings of Mahishasur.

    On 9 October 2014, the police had raided the office of Forward Press. Some people associated with Hindu organizations had a c…[Read more]

  • The scope of the traditions related to Mahishasur is vast. There is a memorial of him in Bundelkhand, preserved by the Archaelogical Survey of India. Khajuraho’s world-famous temples also have carvings of Mahishasur.

    On 9 October 2014, the police had raided the office of Forward Press. Some people associated with Hindu organizations had a c…[Read more]

  • The scope of the traditions related to Mahishasur is vast. There is a memorial of him in Bundelkhand, preserved by the Archaelogical Survey of India. Khajuraho’s world-famous temples also have carvings of Mahishasur.

    On 9 October 2014, the police had raided the office of Forward Press. Some people associated with Hindu organizations had a c…[Read more]

  • The scope of the traditions related to Mahishasur is vast. There is a memorial of him in Bundelkhand, preserved by the Archaelogical Survey of India. Khajuraho’s world-famous temples also have carvings of Mahishasur.

    On 9 October 2014, the police had raided the office of Forward Press. Some people associated with Hindu organizations had a c…[Read more]

  • यह पटना से प्रकाशित ‘दोआबा’ पत्रिका के प्रवेशांक की समीक्षा है। दोआबा के संपादक जाबिर हुसेन साहित्यकार के अतिरिक्त राजनेता और समाजकर्मी भी रहे हैं। वे लगभग एक दशक तक बिहार विधान परिषद के सभापति रहे।

    दोआबा के समीक्षित अंक में 100 से अधिक रचानकारों की रचानाएं प्रकाशित हुईं थीं, जिनमें कंवल भारती, मधुकर सिंह,मनमोहन सरल, हृदयेश, प्रे…[Read more]

  • यह पटना से प्रकाशित ‘दोआबा’ पत्रिका के प्रवेशांक की समीक्षा है। दोआबा के संपादक जाबिर हुसेन साहित्यकार के अतिरिक्त राजनेता और समाजकर्मी भी रहे हैं। वे लगभग एक दशक तक बिहार विधान परिषद के सभापति रहे।

    दोआबा के समीक्षित अंक में 100 से अधिक रचानकारों की रचानाएं प्रकाशित हुईं थीं, जिनमें कंवल भारती, मधुकर सिंह,मनमोहन सरल, हृदयेश, प्रे…[Read more]

  • यह बुंदेलखंड स्थित महोबा का यात्रा संस्मरण है।
    इसमें लेखक पौराणिक मिथक महिषासुर से संबंधित स्थलों की खोज में निकलता है।
    वर्ष 2011 में जवाहर लाल नेहरू यूनिवर्सिटी के शोधार्थियों द्वारा महिषासुर को दलित, पिछड़े और आदिवासियों का पौरणिक नायक के रूप से प्रचारित किए जाने के बाद हंगामा खड़ा हो गया था। लेखक उस समय एक पत्रिका में प्रबंध-संपादक के रूप म…[Read more]

  • यह बुंदेलखंड स्थित महोबा का यात्रा संस्मरण है।
    इसमें लेखक पौराणिक मिथक महिषासुर से संबंधित स्थलों की खोज में निकलता है।
    वर्ष 2011 में जवाहर लाल नेहरू यूनिवर्सिटी के शोधार्थियों द्वारा महिषासुर को दलित, पिछड़े और आदिवासियों का पौरणिक नायक के रूप से प्रचारित किए जाने के बाद हंगामा खड़ा हो गया था। लेखक उस समय एक पत्रिका में प्रबंध-संपादक के रूप म…[Read more]

  • यह बुंदेलखंड स्थित महोबा का यात्रा संस्मरण है।
    इसमें लेखक पौराणिक मिथक महिषासुर से संबंधित स्थलों की खोज में निकलता है।
    वर्ष 2011 में जवाहर लाल नेहरू यूनिवर्सिटी के शोधार्थियों द्वारा महिषासुर को दलित, पिछड़े और आदिवासियों का पौरणिक नायक के रूप से प्रचारित किए जाने के बाद हंगामा खड़ा हो गया था। लेखक उस समय एक पत्रिका में प्रबंध-संपादक के रूप म…[Read more]

  • यह बुंदेलखंड स्थित महोबा का यात्रा संस्मरण है।
    इसमें लेखक पौराणिक मिथक महिषासुर से संबंधित स्थलों की खोज में निकलता है।
    वर्ष 2011 में जवाहर लाल नेहरू यूनिवर्सिटी के शोधार्थियों द्वारा महिषासुर को दलित, पिछड़े और आदिवासियों का पौरणिक नायक के रूप से प्रचारित किए जाने के बाद हंगामा खड़ा हो गया था। लेखक उस समय एक पत्रिका में प्रबंध-संपादक के रूप म…[Read more]

  • यह बुंदेलखंड स्थित महोबा का यात्रा संस्मरण है।
    इस यात्रा संस्मरण में लेख पौराणिक मिथक महिषासुर से संबंधित स्थलों की खोज में निकलता है। वर्ष 2011 में जवाहर लाल नेहरू यूनिवर्सिटी के शोधार्थियों द्वारा महिषासुर को दलित, पिछड़े और आदिवासियों का पौरणिक नायक के रूप से प्रचारित किए जाने के बाद हंगामा खड़ा हो गया है। लेखक उस समय जिस पत्रिका में प्रबंध-…[Read more]

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Pramod Ranjan

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