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Pramod Ranjan deposited Forward Press: Let’s embark on a new journey in the group
Digital Humanists on Humanities Commons 3 years, 2 months agoThe last print issue of FORWARD Press was published in April, 2016. This editorial in the last issue of Forward Press has been written by Pramod Ranjan. Thereafter Forward Press continued to be published as a website and also ventured into the business of books. Pramod Ranjan parted ways with Forward Press in October 2019 in protest against the…[Read more]
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Pramod Ranjan deposited Forward Press: Let’s embark on a new journey in the group
Book Reviewing on Humanities Commons 3 years, 2 months agoThe last print issue of FORWARD Press was published in April, 2016. This editorial in the last issue of Forward Press has been written by Pramod Ranjan. Thereafter Forward Press continued to be published as a website and also ventured into the business of books. Pramod Ranjan parted ways with Forward Press in October 2019 in protest against the…[Read more]
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Pramod Ranjan deposited फारवर्ड प्रेस: आइए चलें नई यात्रा की ओर in the group
Scholarly Communication on Humanities Commons 3 years, 2 months agoफारवर्ड प्रेस काअंतिम प्रिट अंक अप्रैल, 2016 में प्रकाशित हुआ था। यह उस अंतिम अंक का प्रमोद रंजन द्वारा लिखा गया संपादकीय है। उसके बाद फारवर्ड प्रेस वेबसाइट के रूप में प्रकाशित होता रहा तथा किताबों के व्यवसाय में भी उतरा। फारवर्ड प्रेस के मालिकों द्वारा की जा रही वित्तीय अनियमितता के विरोध में प्रमोद रंजन ने अक्टूबर, 2019 में इस पत्रिका से अलग हो गए।
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Pramod Ranjan deposited फारवर्ड प्रेस: आइए चलें नई यात्रा की ओर in the group
History on Humanities Commons 3 years, 2 months agoफारवर्ड प्रेस काअंतिम प्रिट अंक अप्रैल, 2016 में प्रकाशित हुआ था। यह उस अंतिम अंक का प्रमोद रंजन द्वारा लिखा गया संपादकीय है। उसके बाद फारवर्ड प्रेस वेबसाइट के रूप में प्रकाशित होता रहा तथा किताबों के व्यवसाय में भी उतरा। फारवर्ड प्रेस के मालिकों द्वारा की जा रही वित्तीय अनियमितता के विरोध में प्रमोद रंजन ने अक्टूबर, 2019 में इस पत्रिका से अलग हो गए।
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Pramod Ranjan deposited फारवर्ड प्रेस: आइए चलें नई यात्रा की ओर in the group
Cultural Studies on Humanities Commons 3 years, 2 months agoफारवर्ड प्रेस काअंतिम प्रिट अंक अप्रैल, 2016 में प्रकाशित हुआ था। यह उस अंतिम अंक का प्रमोद रंजन द्वारा लिखा गया संपादकीय है। उसके बाद फारवर्ड प्रेस वेबसाइट के रूप में प्रकाशित होता रहा तथा किताबों के व्यवसाय में भी उतरा। फारवर्ड प्रेस के मालिकों द्वारा की जा रही वित्तीय अनियमितता के विरोध में प्रमोद रंजन ने अक्टूबर, 2019 में इस पत्रिका से अलग हो गए।
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Pramod Ranjan deposited फारवर्ड प्रेस: आइए चलें नई यात्रा की ओर in the group
Book Reviewing on Humanities Commons 3 years, 2 months agoफारवर्ड प्रेस काअंतिम प्रिट अंक अप्रैल, 2016 में प्रकाशित हुआ था। यह उस अंतिम अंक का प्रमोद रंजन द्वारा लिखा गया संपादकीय है। उसके बाद फारवर्ड प्रेस वेबसाइट के रूप में प्रकाशित होता रहा तथा किताबों के व्यवसाय में भी उतरा। फारवर्ड प्रेस के मालिकों द्वारा की जा रही वित्तीय अनियमितता के विरोध में प्रमोद रंजन ने अक्टूबर, 2019 में इस पत्रिका से अलग हो गए।
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Pramod Ranjan deposited फारवर्ड प्रेस: आइए चलें नई यात्रा की ओर in the group
Academic Politics on Humanities Commons 3 years, 2 months agoफारवर्ड प्रेस काअंतिम प्रिट अंक अप्रैल, 2016 में प्रकाशित हुआ था। यह उस अंतिम अंक का प्रमोद रंजन द्वारा लिखा गया संपादकीय है। उसके बाद फारवर्ड प्रेस वेबसाइट के रूप में प्रकाशित होता रहा तथा किताबों के व्यवसाय में भी उतरा। फारवर्ड प्रेस के मालिकों द्वारा की जा रही वित्तीय अनियमितता के विरोध में प्रमोद रंजन ने अक्टूबर, 2019 में इस पत्रिका से अलग हो गए।
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Pramod Ranjan deposited Forward Press: Let’s embark on a new journey on Humanities Commons 3 years, 2 months ago
The last print issue of FORWARD Press was published in April, 2016. This editorial in the last issue of Forward Press has been written by Pramod Ranjan. Thereafter Forward Press continued to be published as a website and also ventured into the business of books. Pramod Ranjan parted ways with Forward Press in October 2019 in protest against the…[Read more]
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Pramod Ranjan deposited फारवर्ड प्रेस: आइए चलें नई यात्रा की ओर on Humanities Commons 3 years, 2 months ago
फारवर्ड प्रेस काअंतिम प्रिट अंक अप्रैल, 2016 में प्रकाशित हुआ था। यह उस अंतिम अंक का प्रमोद रंजन द्वारा लिखा गया संपादकीय है। उसके बाद फारवर्ड प्रेस वेबसाइट के रूप में प्रकाशित होता रहा तथा किताबों के व्यवसाय में भी उतरा। फारवर्ड प्रेस के मालिकों द्वारा की जा रही वित्तीय अनियमितता के विरोध में प्रमोद रंजन ने अक्टूबर, 2019 में इस पत्रिका से अलग हो गए।
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Pramod Ranjan deposited बहुजन विमर्श के कारण निशाने पर जेएनयू in the group
Scholarly Communication on Humanities Commons 3 years, 2 months agoसामान्य तौर पर यह समझा है कि चूंकि दिल्ली स्थित जेएनयू के वामपंथ का गढ़ था, इसलिए दक्षिणपंथी ताकतें उससे नाराज थीं। अतएव, सत्ता में आने के बाद उन्होंने इस गढ़ को नष्ट कर देना चाहा। सन् 2016 में इस विश्वविद्यालय में घटी घटनाओं को इसी संदर्भ में देखा-समझा जाता रहा है।
लेकिन प्रमोद रंजन का यह बहुचर्चित लेख बताता है कि जेएनयू पर दक्षिणपंथ क…[Read more]
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Pramod Ranjan deposited बहुजन विमर्श के कारण निशाने पर जेएनयू in the group
Political Philosophy & Theory on Humanities Commons 3 years, 2 months agoसामान्य तौर पर यह समझा है कि चूंकि दिल्ली स्थित जेएनयू के वामपंथ का गढ़ था, इसलिए दक्षिणपंथी ताकतें उससे नाराज थीं। अतएव, सत्ता में आने के बाद उन्होंने इस गढ़ को नष्ट कर देना चाहा। सन् 2016 में इस विश्वविद्यालय में घटी घटनाओं को इसी संदर्भ में देखा-समझा जाता रहा है।
लेकिन प्रमोद रंजन का यह बहुचर्चित लेख बताता है कि जेएनयू पर दक्षिणपंथ क…[Read more]
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Pramod Ranjan deposited बहुजन विमर्श के कारण निशाने पर जेएनयू in the group
General Education on Humanities Commons 3 years, 2 months agoसामान्य तौर पर यह समझा है कि चूंकि दिल्ली स्थित जेएनयू के वामपंथ का गढ़ था, इसलिए दक्षिणपंथी ताकतें उससे नाराज थीं। अतएव, सत्ता में आने के बाद उन्होंने इस गढ़ को नष्ट कर देना चाहा। सन् 2016 में इस विश्वविद्यालय में घटी घटनाओं को इसी संदर्भ में देखा-समझा जाता रहा है।
लेकिन प्रमोद रंजन का यह बहुचर्चित लेख बताता है कि जेएनयू पर दक्षिणपंथ क…[Read more]
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Pramod Ranjan deposited बहुजन विमर्श के कारण निशाने पर जेएनयू in the group
Cultural Studies on Humanities Commons 3 years, 2 months agoसामान्य तौर पर यह समझा है कि चूंकि दिल्ली स्थित जेएनयू के वामपंथ का गढ़ था, इसलिए दक्षिणपंथी ताकतें उससे नाराज थीं। अतएव, सत्ता में आने के बाद उन्होंने इस गढ़ को नष्ट कर देना चाहा। सन् 2016 में इस विश्वविद्यालय में घटी घटनाओं को इसी संदर्भ में देखा-समझा जाता रहा है।
लेकिन प्रमोद रंजन का यह बहुचर्चित लेख बताता है कि जेएनयू पर दक्षिणपंथ क…[Read more]
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Pramod Ranjan deposited बहुजन विमर्श के कारण निशाने पर जेएनयू in the group
Academic Politics on Humanities Commons 3 years, 2 months agoसामान्य तौर पर यह समझा है कि चूंकि दिल्ली स्थित जेएनयू के वामपंथ का गढ़ था, इसलिए दक्षिणपंथी ताकतें उससे नाराज थीं। अतएव, सत्ता में आने के बाद उन्होंने इस गढ़ को नष्ट कर देना चाहा। सन् 2016 में इस विश्वविद्यालय में घटी घटनाओं को इसी संदर्भ में देखा-समझा जाता रहा है।
लेकिन प्रमोद रंजन का यह बहुचर्चित लेख बताता है कि जेएनयू पर दक्षिणपंथ क…[Read more]
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Pramod Ranjan deposited बहुजन विमर्श के कारण निशाने पर जेएनयू on Humanities Commons 3 years, 2 months ago
सामान्य तौर पर यह समझा है कि चूंकि दिल्ली स्थित जेएनयू के वामपंथ का गढ़ था, इसलिए दक्षिणपंथी ताकतें उससे नाराज थीं। अतएव, सत्ता में आने के बाद उन्होंने इस गढ़ को नष्ट कर देना चाहा। सन् 2016 में इस विश्वविद्यालय में घटी घटनाओं को इसी संदर्भ में देखा-समझा जाता रहा है।
लेकिन प्रमोद रंजन का यह बहुचर्चित लेख बताता है कि जेएनयू पर दक्षिणपंथ क…[Read more]
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Pramod Ranjan deposited तकनीकी बर्बरता के नए युग की शुरुआत है ऑनलाइन शिक्षा in the group
Philosophy on Humanities Commons 3 years, 2 months agoनावेल कोरोना वायरस के अनुपातहीन भय के खिलाफ आवाज़ उठाने वालों में इतालवी दार्शनिक जार्जो आगम्बेन सबसे प्रतिष्ठित आवाज हैं। उनकी बातों का विश्व के प्रमुख अकादमिशयनों ने संज्ञान लिया है, जिसके परिणामस्वरूप कथित ऑनलाइन-डिजिटल शिक्षा के के विरोध की सुगबुगाहट वैश्विक स्तर पर आरंभ हुई है।
यहां प्रस्तुत है, उनकी एक टिप्पणी…
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Pramod Ranjan deposited तकनीकी बर्बरता के नए युग की शुरुआत है ऑनलाइन शिक्षा in the group
Education and Pedagogy on Humanities Commons 3 years, 2 months agoनावेल कोरोना वायरस के अनुपातहीन भय के खिलाफ आवाज़ उठाने वालों में इतालवी दार्शनिक जार्जो आगम्बेन सबसे प्रतिष्ठित आवाज हैं। उनकी बातों का विश्व के प्रमुख अकादमिशयनों ने संज्ञान लिया है, जिसके परिणामस्वरूप कथित ऑनलाइन-डिजिटल शिक्षा के के विरोध की सुगबुगाहट वैश्विक स्तर पर आरंभ हुई है।
यहां प्रस्तुत है, उनकी एक टिप्पणी…
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Pramod Ranjan deposited तकनीकी बर्बरता के नए युग की शुरुआत है ऑनलाइन शिक्षा in the group
Digital Humanists on Humanities Commons 3 years, 2 months agoनावेल कोरोना वायरस के अनुपातहीन भय के खिलाफ आवाज़ उठाने वालों में इतालवी दार्शनिक जार्जो आगम्बेन सबसे प्रतिष्ठित आवाज हैं। उनकी बातों का विश्व के प्रमुख अकादमिशयनों ने संज्ञान लिया है, जिसके परिणामस्वरूप कथित ऑनलाइन-डिजिटल शिक्षा के के विरोध की सुगबुगाहट वैश्विक स्तर पर आरंभ हुई है।
यहां प्रस्तुत है, उनकी एक टिप्पणी…
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Pramod Ranjan deposited हिंदी की साहित्यिक-वैचारिक पत्रिकाएं: आंधी-तूफान में बजती डुगडुगी in the group
Literary Journalism on Humanities Commons 3 years, 2 months agoइंडिया टुडे के 24 जून 2015 अंक में प्रकाशित इस रिपोर्ट में हिंदी की प्रमुख साहित्यिक वैचारिक पत्रिकाओं के संघर्ष को बताया गया है।
रिपोर्ट में प्रकाशित पत्रिकाओं के संपादकों के वक्तव्य:
“हंस वंचितों की पत्रिका है और धार्मिक विचारों का समर्थन नहीं करती है। हम राजेंद्र जी के विचारों को आगे बढ़ा रहे हैं”- संजय सहाय,…[Read more]
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Pramod Ranjan deposited तकनीकी बर्बरता के नए युग की शुरुआत है ऑनलाइन शिक्षा on Humanities Commons 3 years, 2 months ago
नावेल कोरोना वायरस के अनुपातहीन भय के खिलाफ आवाज़ उठाने वालों में इतालवी दार्शनिक जार्जो आगम्बेन सबसे प्रतिष्ठित आवाज हैं। उनकी बातों का विश्व के प्रमुख अकादमिशयनों ने संज्ञान लिया है, जिसके परिणामस्वरूप कथित ऑनलाइन-डिजिटल शिक्षा के के विरोध की सुगबुगाहट वैश्विक स्तर पर आरंभ हुई है।
यहां प्रस्तुत है, उनकी एक टिप्पणी…
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