-
Pramod Ranjan deposited हिंदी की साहित्यिक-वैचारिक पत्रिकाएं: आंधी-तूफान में बजती डुगडुगी on Humanities Commons 3 years, 2 months ago
इंडिया टुडे के 24 जून 2015 अंक में प्रकाशित इस रिपोर्ट में हिंदी की प्रमुख साहित्यिक वैचारिक पत्रिकाओं के संघर्ष को बताया गया है।
रिपोर्ट में प्रकाशित पत्रिकाओं के संपादकों के वक्तव्य:
“हंस वंचितों की पत्रिका है और धार्मिक विचारों का समर्थन नहीं करती है। हम राजेंद्र जी के विचारों को आगे बढ़ा रहे हैं”- संजय सहाय, स…[Read more] -
Pramod Ranjan deposited लेखकीय संघर्ष में कोई बाइपास नहीं होता in the group
Literary Journalism on Humanities Commons 3 years, 2 months agoशिमला और हिमाचल से प्रमोद रंजन का गहरा नाता रहा है। वे अपनी युवावस्था के दिनों में यहाँ जीविका की तलाश में आए थे। पुस्तक का एक बड़ा हिस्सा वर्ष 2003 से 2006 के बीच हिमाचल-प्रवास के दौरान लिखी गई उनकी निजी डायरी है। जैसा कि रंजन स्वयं मानते हैं कि यह उनकी मनःस्थितियों का ‘विरेचन’ भी है और साथ ही साथ ‘तात्कालिक मनोभावों, घटनाओं व परिवेशगत…[Read more]
-
Pramod Ranjan deposited लेखकीय संघर्ष में कोई बाइपास नहीं होता in the group
Communication Studies on Humanities Commons 3 years, 2 months agoशिमला और हिमाचल से प्रमोद रंजन का गहरा नाता रहा है। वे अपनी युवावस्था के दिनों में यहाँ जीविका की तलाश में आए थे। पुस्तक का एक बड़ा हिस्सा वर्ष 2003 से 2006 के बीच हिमाचल-प्रवास के दौरान लिखी गई उनकी निजी डायरी है। जैसा कि रंजन स्वयं मानते हैं कि यह उनकी मनःस्थितियों का ‘विरेचन’ भी है और साथ ही साथ ‘तात्कालिक मनोभावों, घटनाओं व परिवेशगत…[Read more]
-
Pramod Ranjan deposited लेखकीय संघर्ष में कोई बाइपास नहीं होता in the group
Book Reviewing on Humanities Commons 3 years, 2 months agoशिमला और हिमाचल से प्रमोद रंजन का गहरा नाता रहा है। वे अपनी युवावस्था के दिनों में यहाँ जीविका की तलाश में आए थे। पुस्तक का एक बड़ा हिस्सा वर्ष 2003 से 2006 के बीच हिमाचल-प्रवास के दौरान लिखी गई उनकी निजी डायरी है। जैसा कि रंजन स्वयं मानते हैं कि यह उनकी मनःस्थितियों का ‘विरेचन’ भी है और साथ ही साथ ‘तात्कालिक मनोभावों, घटनाओं व परिवेशगत…[Read more]
-
Pramod Ranjan deposited शिमला डायरी: पीछे छूट गई धूल को समेट लाया कौन खानाबदोश in the group
Literary Journalism on Humanities Commons 3 years, 2 months agoशिमला डायरी’ अपने समय और समाज की एक ऐसी साहित्यिक-सांस्कृतिक डायरी और दस्तावेज है, जिसका एक अहम हिस्सा हिंदी पत्रकारिता की दुनिया है। इसका विहंगम अवलोकन किया है चर्चित कवि और पत्रकार प्रमोद कौंसवाल ने, जिन्होंने काफी समय तक चंडीगढ़ में रहते हुए खुद शिमला, चंडीगढ़ और पंजाब की पत्रकारिता की दुनिया को बहुत करीब से देखा है। यह किताब की सिर्फ ए…[Read more]
-
Pramod Ranjan deposited शिमला डायरी: पीछे छूट गई धूल को समेट लाया कौन खानाबदोश in the group
Book Reviewing on Humanities Commons 3 years, 2 months agoशिमला डायरी’ अपने समय और समाज की एक ऐसी साहित्यिक-सांस्कृतिक डायरी और दस्तावेज है, जिसका एक अहम हिस्सा हिंदी पत्रकारिता की दुनिया है। इसका विहंगम अवलोकन किया है चर्चित कवि और पत्रकार प्रमोद कौंसवाल ने, जिन्होंने काफी समय तक चंडीगढ़ में रहते हुए खुद शिमला, चंडीगढ़ और पंजाब की पत्रकारिता की दुनिया को बहुत करीब से देखा है। यह किताब की सिर्फ ए…[Read more]
-
Pramod Ranjan deposited कदम सोच के रखें: दूरास्त् पर्वतानि रम्यते in the group
Literary Journalism on Humanities Commons 3 years, 2 months agoप्रमोद रंजन की चर्चित पुस्तक “शिमला डायरी” एक सुन्दर साज-सज्जा वाली पुस्तक है। सौम्य परिवेश की पृष्टभूमि, हरियाली, फूलों और किन्हीं ऐतिहासिक इमारतों, जन-जीवन के खुलते पन्नों की एक सुन्दर किताब के साथ तीन उपशीर्षकों ‘आलोचना, ‘कहानी-कविताएं’ व ‘मौखिक इतिहास’ के ऊपर “शिमला डायरी” पहली नज़र में ही पाठकों को आकर्षित करती है।
यह डायरी न केवल अ…[Read more]
-
Pramod Ranjan deposited कदम सोच के रखें: दूरास्त् पर्वतानि रम्यते in the group
Book Reviewing on Humanities Commons 3 years, 2 months agoप्रमोद रंजन की चर्चित पुस्तक “शिमला डायरी” एक सुन्दर साज-सज्जा वाली पुस्तक है। सौम्य परिवेश की पृष्टभूमि, हरियाली, फूलों और किन्हीं ऐतिहासिक इमारतों, जन-जीवन के खुलते पन्नों की एक सुन्दर किताब के साथ तीन उपशीर्षकों ‘आलोचना, ‘कहानी-कविताएं’ व ‘मौखिक इतिहास’ के ऊपर “शिमला डायरी” पहली नज़र में ही पाठकों को आकर्षित करती है।
यह डायरी न केवल अ…[Read more]
-
Pramod Ranjan deposited Shimla Diary: A gypsy’s account of the times gone by in the group
Literary Journalism on Humanities Commons 3 years, 2 months agoShimla Diary is a literary-cultural chronicle and a documentation of its times and society, with a keen focus on the world of Hindi journalism. Well-known poet and journalist Pramod Kaunswal, who has seen Hindi journalism in Shimla, Chandigarh and Punjab at close quarters, pens his impressions of the book. This is not just a book review but a…[Read more]
-
Pramod Ranjan deposited Shimla Diary: A gypsy’s account of the times gone by in the group
Book Reviewing on Humanities Commons 3 years, 2 months agoShimla Diary is a literary-cultural chronicle and a documentation of its times and society, with a keen focus on the world of Hindi journalism. Well-known poet and journalist Pramod Kaunswal, who has seen Hindi journalism in Shimla, Chandigarh and Punjab at close quarters, pens his impressions of the book. This is not just a book review but a…[Read more]
-
Pramod Ranjan deposited लेखकीय संघर्ष में कोई बाइपास नहीं होता on Humanities Commons 3 years, 2 months ago
शिमला और हिमाचल से प्रमोद रंजन का गहरा नाता रहा है। वे अपनी युवावस्था के दिनों में यहाँ जीविका की तलाश में आए थे। पुस्तक का एक बड़ा हिस्सा वर्ष 2003 से 2006 के बीच हिमाचल-प्रवास के दौरान लिखी गई उनकी निजी डायरी है। जैसा कि रंजन स्वयं मानते हैं कि यह उनकी मनःस्थितियों का ‘विरेचन’ भी है और साथ ही साथ ‘तात्कालिक मनोभावों, घटनाओं व परिवेशगत…[Read more]
-
Pramod Ranjan deposited शिमला डायरी: पीछे छूट गई धूल को समेट लाया कौन खानाबदोश on Humanities Commons 3 years, 2 months ago
शिमला डायरी’ अपने समय और समाज की एक ऐसी साहित्यिक-सांस्कृतिक डायरी और दस्तावेज है, जिसका एक अहम हिस्सा हिंदी पत्रकारिता की दुनिया है। इसका विहंगम अवलोकन किया है चर्चित कवि और पत्रकार प्रमोद कौंसवाल ने, जिन्होंने काफी समय तक चंडीगढ़ में रहते हुए खुद शिमला, चंडीगढ़ और पंजाब की पत्रकारिता की दुनिया को बहुत करीब से देखा है। यह किताब की सिर्फ ए…[Read more]
-
Pramod Ranjan deposited कदम सोच के रखें: दूरास्त् पर्वतानि रम्यते on Humanities Commons 3 years, 2 months ago
प्रमोद रंजन की चर्चित पुस्तक “शिमला डायरी” एक सुन्दर साज-सज्जा वाली पुस्तक है। सौम्य परिवेश की पृष्टभूमि, हरियाली, फूलों और किन्हीं ऐतिहासिक इमारतों, जन-जीवन के खुलते पन्नों की एक सुन्दर किताब के साथ तीन उपशीर्षकों ‘आलोचना, ‘कहानी-कविताएं’ व ‘मौखिक इतिहास’ के ऊपर “शिमला डायरी” पहली नज़र में ही पाठकों को आकर्षित करती है।
यह डायरी न केवल अ…[Read more]
-
Pramod Ranjan deposited Shimla Diary: A gypsy’s account of the times gone by on Humanities Commons 3 years, 2 months ago
Shimla Diary is a literary-cultural chronicle and a documentation of its times and society, with a keen focus on the world of Hindi journalism. Well-known poet and journalist Pramod Kaunswal, who has seen Hindi journalism in Shimla, Chandigarh and Punjab at close quarters, pens his impressions of the book. This is not just a book review but a…[Read more]
-
Pramod Ranjan deposited विज्ञान और तकनीक की ओर था पेरियार का झुकाव in the group
Sociology on Humanities Commons 3 years, 2 months agoपेरियार के बारे यह तो सभी जानते हैं कि वे जातिवाद के मुखर विरोधी थे और उन्होंने दक्षिण भारत में ब्राह्मणवाद विरोधी आंदोलन चलाया। लेकिन उनके लेखन में गहराई से रेखांकित करने लायक बात विज्ञान और तकनीक के प्रति उनका आकर्षण है। वे विज्ञान और तकनीक के बूते भविष्य को देखते हैं और उसके अनुरूप समाज को तैयार रहने का आह्वान करते हैं। इसी तरह, स्त्…[Read more]
-
Pramod Ranjan deposited विज्ञान और तकनीक की ओर था पेरियार का झुकाव in the group
Political Philosophy & Theory on Humanities Commons 3 years, 2 months agoपेरियार के बारे यह तो सभी जानते हैं कि वे जातिवाद के मुखर विरोधी थे और उन्होंने दक्षिण भारत में ब्राह्मणवाद विरोधी आंदोलन चलाया। लेकिन उनके लेखन में गहराई से रेखांकित करने लायक बात विज्ञान और तकनीक के प्रति उनका आकर्षण है। वे विज्ञान और तकनीक के बूते भविष्य को देखते हैं और उसके अनुरूप समाज को तैयार रहने का आह्वान करते हैं। इसी तरह, स्त्…[Read more]
-
Pramod Ranjan deposited विज्ञार और तकनीक ओर था पेरियार का झुकाव in the group
Philosophy of Religion on Humanities Commons 3 years, 2 months agoपेरियार के बारे यह तो सभी जानते हैं कि वे जातिवाद के मुखर विरोधी थे और उन्होंने दक्षिण भारत में ब्राह्मणवाद विरोधी आंदोलन चलाया। लेकिन उनके लेखन में गहराई से रेखांकित करने लायक बात विज्ञान और तकनीक के प्रति उनका आकर्षण है। वे विज्ञान और तकनीक के बूते भविष्य को देखते हैं और उसके अनुरूप समाज को तैयार रहने का आह्वान करते हैं। इसी तरह, स्त्…[Read more]
-
Pramod Ranjan deposited विज्ञान और तकनीक की ओर था पेरियार का झुकाव on Humanities Commons 3 years, 2 months ago
पेरियार के बारे यह तो सभी जानते हैं कि वे जातिवाद के मुखर विरोधी थे और उन्होंने दक्षिण भारत में ब्राह्मणवाद विरोधी आंदोलन चलाया। लेकिन उनके लेखन में गहराई से रेखांकित करने लायक बात विज्ञान और तकनीक के प्रति उनका आकर्षण है। वे विज्ञान और तकनीक के बूते भविष्य को देखते हैं और उसके अनुरूप समाज को तैयार रहने का आह्वान करते हैं। इसी तरह, स्त्…[Read more]
-
Pramod Ranjan deposited विज्ञार और तकनीक ओर था पेरियार का झुकाव on Humanities Commons 3 years, 2 months ago
पेरियार के बारे यह तो सभी जानते हैं कि वे जातिवाद के मुखर विरोधी थे और उन्होंने दक्षिण भारत में ब्राह्मणवाद विरोधी आंदोलन चलाया। लेकिन उनके लेखन में गहराई से रेखांकित करने लायक बात विज्ञान और तकनीक के प्रति उनका आकर्षण है। वे विज्ञान और तकनीक के बूते भविष्य को देखते हैं और उसके अनुरूप समाज को तैयार रहने का आह्वान करते हैं। इसी तरह, स्त्…[Read more]
-
Pramod Ranjan deposited बहुजन साहित्य प्रगतिशील और दलित साहित्य का विस्तार है: प्रमोद रंजन in the group
Literary theory on Humanities Commons 3 years, 2 months ago-आज समाचार सेवा, पटना-
*बहुजन साहित्य प्रगतिशील और दलित साहित्य का विस्तार है*
*प्रमोद रंजन से बातचीत*प्रश्न: आपने बहुजन साहित्य की अवधारणा पर भी काम किया है। इस अवधारणा के बारे में कुछ बताएं।
प्रमोद रंजन: बहुजन साहित्य का अर्थ है– अभिजन के विपरीत बहुजन का साहित्य और उनकी वैचारिकी। प्रगतिशील- मार्क्सवादी विचारधारा में जो ‘जन’ है, ‘ब…[Read more]
- Load More