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Pramod Ranjan deposited The Case For Bahujan Literature in the group
Literary theory on Humanities Commons 3 years agoThis book was originally published in Hindi with the title ‘Bahujan Sahitya ki Prastavan” [Introduction to Bahujan Literature] in the year 2016. Its English translation was also published in the same year. This book presents a discussion on the concept of Bahujan literature in Hindi and Indian languages. On the one hand, this book monitors the…[Read more]
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Pramod Ranjan deposited The Case For Bahujan Literature in the group
Cultural Studies on Humanities Commons 3 years agoThis book was originally published in Hindi with the title ‘Bahujan Sahitya ki Prastavan” [Introduction to Bahujan Literature] in the year 2016. Its English translation was also published in the same year. This book presents a discussion on the concept of Bahujan literature in Hindi and Indian languages. On the one hand, this book monitors the…[Read more]
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Pramod Ranjan deposited हिमाचल का साहित्यिक परिदृश्य: शिमला डायरी in the group
Sociology on Humanities Commons 3 years agoशिमला डायरी हिंदी पत्रकार और लेखक प्रमोद रंजन के संस्मरणों की पुस्तक है, जिसका केंद्रबिंदु साहित्यिक गतिविधियां हैं। यह पुस्तक 21वीं सदी की शुरुआत में पत्रकारिता के नैतिक पतन की कहानी भी कहती है। हिमाचल प्रदेश पर केंद्रित इस पुस्तक में तत्कालीन राजनीति की भी झलक है।
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Pramod Ranjan deposited हिमाचल का साहित्यिक परिदृश्य: शिमला डायरी in the group
Literary theory on Humanities Commons 3 years agoशिमला डायरी हिंदी पत्रकार और लेखक प्रमोद रंजन के संस्मरणों की पुस्तक है, जिसका केंद्रबिंदु साहित्यिक गतिविधियां हैं। यह पुस्तक 21वीं सदी की शुरुआत में पत्रकारिता के नैतिक पतन की कहानी भी कहती है। हिमाचल प्रदेश पर केंद्रित इस पुस्तक में तत्कालीन राजनीति की भी झलक है।
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Pramod Ranjan deposited हिमाचल का साहित्यिक परिदृश्य: शिमला डायरी in the group
Literary Journalism on Humanities Commons 3 years agoशिमला डायरी हिंदी पत्रकार और लेखक प्रमोद रंजन के संस्मरणों की पुस्तक है, जिसका केंद्रबिंदु साहित्यिक गतिविधियां हैं। यह पुस्तक 21वीं सदी की शुरुआत में पत्रकारिता के नैतिक पतन की कहानी भी कहती है। हिमाचल प्रदेश पर केंद्रित इस पुस्तक में तत्कालीन राजनीति की भी झलक है।
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Pramod Ranjan deposited हिमाचल का साहित्यिक परिदृश्य: शिमला डायरी in the group
Festivals, Rituals, Public Spectacles, and Popular Culture on Humanities Commons 3 years agoशिमला डायरी हिंदी पत्रकार और लेखक प्रमोद रंजन के संस्मरणों की पुस्तक है, जिसका केंद्रबिंदु साहित्यिक गतिविधियां हैं। यह पुस्तक 21वीं सदी की शुरुआत में पत्रकारिता के नैतिक पतन की कहानी भी कहती है। हिमाचल प्रदेश पर केंद्रित इस पुस्तक में तत्कालीन राजनीति की भी झलक है।
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Pramod Ranjan deposited हिमाचल का साहित्यिक परिदृश्य: शिमला डायरी in the group
Cultural Studies on Humanities Commons 3 years agoशिमला डायरी हिंदी पत्रकार और लेखक प्रमोद रंजन के संस्मरणों की पुस्तक है, जिसका केंद्रबिंदु साहित्यिक गतिविधियां हैं। यह पुस्तक 21वीं सदी की शुरुआत में पत्रकारिता के नैतिक पतन की कहानी भी कहती है। हिमाचल प्रदेश पर केंद्रित इस पुस्तक में तत्कालीन राजनीति की भी झलक है।
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यह लेख संथाली मूल की आदिवासी कवयित्री निर्मला पुतुल की कविताओं पर केंद्रित है।
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भारत के राजनेता शीर्षक शृंखला की यह किताब महाराष्ट्र के राजनेता, आरपीआई(अ) के राष्ट्रीय अध्यक्ष तथा राज्यसभा सांसद ‘रामदास आठवले’ की संसदीय सहभागिता और संसद में सामाजिक-राजनीतिक मुद्दों पर उनकी पहलों पर केंद्रित है। आठवले महाराष्ट्र में सामाजिक न्याय मंत्री के रूप में अपनी राजनीतिक पारी शुरू कर पिछले तीन दशक से राज्य और केंद्र की राजनीति में अप…[Read more]
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बहुजन डाइवर्सिटी द्वारा 2007 से शुरू की गई भारत की ज्वलंत समस्याएं शृंखला की यह नवीनतम किताब है। पुस्तक में समय समय पर उद्भव होने वाली कुछ ख़ास समस्याओं, जिनसे राष्ट्र का जीवन बुरी तरह प्रभावित होता है एवं जिन्हें मीडिया के अल्पकालिक प्रभाव के चलते लोग एक अंतराल के बाद विस्मृत कर समस्याओं के अम्बार में घिरे देश की दूसरी समस्याओं में खो जाते है…[Read more]
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इस पुस्तक में बहुजन साहित्य की अवधारणा की आवश्यकता को रेखांकित किया गया है। बहुजन साहित्य की अवधारणा का पैमाना लेखक का कुल लेखकीय-वैचारिक अवदान है। इसलिए द्विज समुदाय से आने वाले ऐसे लेखकों के लिए भी इसमें स्थान है, जिनकी दृढ पक्षधरता इन वंचित तबकों के प्रति हो। जैसा कि हम फारवर्ड प्रेस में कहते आए हैं कि यह अवधारणा उस व…[Read more]
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Pramod Ranjan deposited व्हाट्सएप विवाद: सूचना तकनीक और सूचना की पड़ताल on Humanities Commons 3 years ago
व्हाट्सएप ने 4 जनवरी, 2021 को अपनी नई सेवा शर्तें जारी की थी, जिसमें कहा गया था कि व्हाट्सएप का इस्तेमाल करने वालों का डेटा उसकी पैरेंट कंपनी फ़ेसबुक से संबद्ध पाँच कंपनियों को भी उपलब्ध कराया जाएगा और जो उपभोक्ता इन सेवा शर्तों के लिए 8 फरवरी तक सहमति नहीं देंगे, उनकी सेवाएँ बंद कर दी जाएँगी। इस सूचना के आते ही दुनिया भर में खलबली मच गय…[Read more]
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Pramod Ranjan deposited जाति व्यवस्था और पितृसत्ता: पेरियार ई. वी. रामासामी on Humanities Commons 3 years ago
जाति और पितृसत्ता ई. वी. रामासामी नायकर के चिंतन, लेखन और संघर्षों की केंद्रीय धुरी रही है। उनकी दृढ़ मान्यता थी कि इन दोनों के विनाश के बिना किसी आधुनिक समाज का निर्माण नहीं किया जा सकता है।
जाति और पितृसत्ता के संबंध में पेरियार क्या सोचते थे और क्यों वे इसके विनाश को आधुनिक भारत के निर्माण के लिए अपरिहार्य एवं अनिवार्य मानते थे? इन प्रश्नों…[Read more] -
सच्ची रामायण, पेरियार ई. वी. रामासामी की बहुचर्चित और सबसे विवादास्पद कृति रही है। पेरियार रामायण को एक राजनीतिक ग्रंथ मानते थे। उनका कहना था कि इसे दक्षिणवासी अनार्यों पर उत्तर के आर्यों की विजय और प्रभुत्व को जायज ठहराने के लिए लिखा गया और यह गैर-ब्राह्मणों पर ब्राह्मणों और महिलाओं पर पुरुषों के वर्चस्व का उपकरण है। यह किताब हिंदी में 1968में ‘स…[Read more]
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Résumé : यह पुस्तक मूल रूप से हिंदी में वर्ष 2016 में ‘बहुजन साहित्य की प्रस्तावना’ शीर्षक से प्रकाशित हुई थी। उसका यह अंग्रेजी अनुवाद भी उसी वर्ष प्रकाशित हुआ था। यह किताब हिन्दी और भारतीय भाषाओं में बहुजन साहित्य की अवधारणा पर विमर्श प्रस्तुत करती है। एक ओर यह किताब हिंदी साहित्य में हो रहे बदलावों पर नजर रखती है दूसरी ओर मंडल कमीशन के लागू हो…[Read more]
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This book was originally published in Hindi with the title ‘Bahujan Sahitya ki Prastavan” [Introduction to Bahujan Literature] in the year 2016. Its English translation was also published in the same year. This book presents a discussion on the concept of Bahujan literature in Hindi and Indian languages. On the one hand, this book monitors the…[Read more]
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शिमला डायरी हिंदी पत्रकार और लेखक प्रमोद रंजन के संस्मरणों की पुस्तक है, जिसका केंद्रबिंदु साहित्यिक गतिविधियां हैं। यह पुस्तक 21वीं सदी की शुरुआत में पत्रकारिता के नैतिक पतन की कहानी भी कहती है। हिमाचल प्रदेश पर केंद्रित इस पुस्तक में तत्कालीन राजनीति की भी झलक है।
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Pramod Ranjan's profile was updated on Humanities Commons 3 years ago
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Pramod Ranjan deposited मीडिया: विश्ववास का धंधा in the group
Sociology on Humanities Commons 3 years, 1 month agoप्रमोद रंजन का ‘विश्वास का धंधा’ शीर्षक यह लेख हिंदी दैनिक जनसत्ता के 30 अगस्त, 2009 के अंक में प्रकाशित हुआ था। इस लेख के प्रकाशन के बाद हिंदी पत्रकारिता में जातिवाद के सवाल पर बड़ा विवाद हुआ था।
इससे संबंधित घटनाक्रम इस प्रकार था: प्रमोद रंजन का उपरोक्त लेख उनकी पुस्तिका ‘मीडिया में हिस्सेदारी’ में संकलित भी था। उस पुस्तिका की भी ब…[Read more]
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Pramod Ranjan deposited मीडिया: विश्ववास का धंधा in the group
Communication Studies on Humanities Commons 3 years, 1 month agoप्रमोद रंजन का ‘विश्वास का धंधा’ शीर्षक यह लेख हिंदी दैनिक जनसत्ता के 30 अगस्त, 2009 के अंक में प्रकाशित हुआ था। इस लेख के प्रकाशन के बाद हिंदी पत्रकारिता में जातिवाद के सवाल पर बड़ा विवाद हुआ था।
इससे संबंधित घटनाक्रम इस प्रकार था: प्रमोद रंजन का उपरोक्त लेख उनकी पुस्तिका ‘मीडिया में हिस्सेदारी’ में संकलित भी था। उस पुस्तिका की भी ब…[Read more]
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