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Pramod Ranjan deposited यह भारतीय हिंदी प्राध्यापक परिषद क्या बला है? in the group
Academic Politics on Humanities Commons 2 years, 7 months agoभारत में फासीवादी नीतियों का नौकरीपेशा मध्यम वर्ग प्रतिरोध नहीं कर रहा। हालांकि, प्रतिरोध की अधिक जिम्मेवारी उन प्राध्यापकों पर है, जो स्वयं को बुद्धिजीवी कहते हैं और जिन्हें लिखने और बोलने के लिए किंचित अधिक नैतिक और कानूनी सुविधा प्राप्त है।
सच यह है कि इनमें से अधिकांश भय से अधिक लोभ के कारण चुप हैं और चुपचाप निजाम बदलने का इंतजार कर रहे हैं…[Read more]
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Pramod Ranjan deposited यह भारतीय हिंदी प्राध्यापक परिषद क्या बला है? on Humanities Commons 2 years, 7 months ago
भारत में फासीवादी नीतियों का नौकरीपेशा मध्यम वर्ग प्रतिरोध नहीं कर रहा। हालांकि, प्रतिरोध की अधिक जिम्मेवारी उन प्राध्यापकों पर है, जो स्वयं को बुद्धिजीवी कहते हैं और जिन्हें लिखने और बोलने के लिए किंचित अधिक नैतिक और कानूनी सुविधा प्राप्त है।
सच यह है कि इनमें से अधिकांश भय से अधिक लोभ के कारण चुप हैं और चुपचाप निजाम बदलने का इंतजार कर रहे हैं…[Read more]
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Pramod Ranjan deposited एक जोमो का जीवन in the group
Buddhist Studies on Humanities Commons 2 years, 7 months agoपत्रकार और शिक्षाविद् प्रमोद रंजन ने जून, 2017 में हिमाचल प्रदेश के दुर्गम इलाकों की यात्रा की थी। इस यात्रा में उन्हें किन्नौर जिले के सुदूर गांव कानम के एक गोम्पा में सुमार नाम की जोमो मिलीं। जोमो यानी बौद्ध भिक्षुणी। मध्य हिमालय की अपूर्व शांति से भरी उस घाटी में सहज वात्सल्य से भरीं 56 वर्षीय सुमार के साथ कुछ घंटे बिताना उनके लिए एक अनूठा अ…[Read more]
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पत्रकार और शिक्षाविद् प्रमोद रंजन ने जून, 2017 में हिमाचल प्रदेश के दुर्गम इलाकों की यात्रा की थी। इस यात्रा में उन्हें किन्नौर जिले के सुदूर गांव कानम के एक गोम्पा में सुमार नाम की जोमो मिलीं। जोमो यानी बौद्ध भिक्षुणी। मध्य हिमालय की अपूर्व शांति से भरी उस घाटी में सहज वात्सल्य से भरीं 56 वर्षीय सुमार के साथ कुछ घंटे बिताना उनके लिए एक अनूठा अ…[Read more]
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Pramod Ranjan deposited A chat with Gail Omvedt in the group
Sociology on Humanities Commons 2 years, 8 months agoThese are excerpts from the Forward Press team’s India tour travelogue. Forward Press Consulting Editor Pramod Ranjan, sociologist Anil Kumar and Forward Press Editor (English) Anil Varghese were part of the team that went on the tour from Delhi to Kanyakumari between 5 January and 15 February 2017. The team covered nine states and one union t…[Read more]
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Pramod Ranjan deposited A chat with Gail Omvedt in the group
Public Humanities on Humanities Commons 2 years, 8 months agoThese are excerpts from the Forward Press team’s India tour travelogue. Forward Press Consulting Editor Pramod Ranjan, sociologist Anil Kumar and Forward Press Editor (English) Anil Varghese were part of the team that went on the tour from Delhi to Kanyakumari between 5 January and 15 February 2017. The team covered nine states and one union t…[Read more]
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Pramod Ranjan deposited A chat with Gail Omvedt in the group
Political Philosophy & Theory on Humanities Commons 2 years, 8 months agoThese are excerpts from the Forward Press team’s India tour travelogue. Forward Press Consulting Editor Pramod Ranjan, sociologist Anil Kumar and Forward Press Editor (English) Anil Varghese were part of the team that went on the tour from Delhi to Kanyakumari between 5 January and 15 February 2017. The team covered nine states and one union t…[Read more]
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Pramod Ranjan deposited A chat with Gail Omvedt in the group
Cultural Studies on Humanities Commons 2 years, 8 months agoThese are excerpts from the Forward Press team’s India tour travelogue. Forward Press Consulting Editor Pramod Ranjan, sociologist Anil Kumar and Forward Press Editor (English) Anil Varghese were part of the team that went on the tour from Delhi to Kanyakumari between 5 January and 15 February 2017. The team covered nine states and one union t…[Read more]
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Pramod Ranjan deposited मौत, अकाल की आहट और आर्थिक असमानता पर चुप्पी क्यों? in the group
Sociology on Humanities Commons 2 years, 8 months agoभारत में क्या हालत हो चुकी है, इसका अनुमान दिसंबर, 2020 में हुए एक सर्वेक्षण से लगता है। इस सर्वेक्षण के अनुसार भारत की आधी से अधिक आबादी को कोरोना-काल में पहले की तुलना में कम भोजन मिल रहा है। इनमें ज़्यादातर दलित और आदिवासी हैं। लेकिन इन सूचनाओं से भी अधिक भयावह यह है कि भारत का बौद्धिक वर्ग, ग़रीबों के सर पर मँडराते मौत के इस साये से प्राय:…[Read more]
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Pramod Ranjan deposited मौत, अकाल की आहट और आर्थिक असमानता पर चुप्पी क्यों? in the group
Public Humanities on Humanities Commons 2 years, 8 months agoभारत में क्या हालत हो चुकी है, इसका अनुमान दिसंबर, 2020 में हुए एक सर्वेक्षण से लगता है। इस सर्वेक्षण के अनुसार भारत की आधी से अधिक आबादी को कोरोना-काल में पहले की तुलना में कम भोजन मिल रहा है। इनमें ज़्यादातर दलित और आदिवासी हैं। लेकिन इन सूचनाओं से भी अधिक भयावह यह है कि भारत का बौद्धिक वर्ग, ग़रीबों के सर पर मँडराते मौत के इस साये से प्राय:…[Read more]
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Pramod Ranjan deposited मौत, अकाल की आहट और आर्थिक असमानता पर चुप्पी क्यों? in the group
Political Philosophy & Theory on Humanities Commons 2 years, 8 months agoभारत में क्या हालत हो चुकी है, इसका अनुमान दिसंबर, 2020 में हुए एक सर्वेक्षण से लगता है। इस सर्वेक्षण के अनुसार भारत की आधी से अधिक आबादी को कोरोना-काल में पहले की तुलना में कम भोजन मिल रहा है। इनमें ज़्यादातर दलित और आदिवासी हैं। लेकिन इन सूचनाओं से भी अधिक भयावह यह है कि भारत का बौद्धिक वर्ग, ग़रीबों के सर पर मँडराते मौत के इस साये से प्राय:…[Read more]
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Pramod Ranjan deposited मौत, अकाल की आहट और आर्थिक असमानता पर चुप्पी क्यों? in the group
Indian Economy on Humanities Commons 2 years, 8 months agoभारत में क्या हालत हो चुकी है, इसका अनुमान दिसंबर, 2020 में हुए एक सर्वेक्षण से लगता है। इस सर्वेक्षण के अनुसार भारत की आधी से अधिक आबादी को कोरोना-काल में पहले की तुलना में कम भोजन मिल रहा है। इनमें ज़्यादातर दलित और आदिवासी हैं। लेकिन इन सूचनाओं से भी अधिक भयावह यह है कि भारत का बौद्धिक वर्ग, ग़रीबों के सर पर मँडराते मौत के इस साये से प्राय:…[Read more]
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These are excerpts from the Forward Press team’s India tour travelogue. Forward Press Consulting Editor Pramod Ranjan, sociologist Anil Kumar and Forward Press Editor (English) Anil Varghese were part of the team that went on the tour from Delhi to Kanyakumari between 5 January and 15 February 2017. The team covered nine states and one union t…[Read more]
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Pramod Ranjan deposited मौत, अकाल की आहट और आर्थिक असमानता पर चुप्पी क्यों? on Humanities Commons 2 years, 8 months ago
भारत में क्या हालत हो चुकी है, इसका अनुमान दिसंबर, 2020 में हुए एक सर्वेक्षण से लगता है। इस सर्वेक्षण के अनुसार भारत की आधी से अधिक आबादी को कोरोना-काल में पहले की तुलना में कम भोजन मिल रहा है। इनमें ज़्यादातर दलित और आदिवासी हैं। लेकिन इन सूचनाओं से भी अधिक भयावह यह है कि भारत का बौद्धिक वर्ग, ग़रीबों के सर पर मँडराते मौत के इस साये से प्राय:…[Read more]
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Pramod Ranjan deposited कोविड पश्चात दुनिया और बहुजन कार्यकर्ताओं की ज़िम्मेदारी in the group
Sociology on Humanities Commons 2 years, 8 months agoइस आलेख में मैंने देखने की कोशिश कि कोविड की रोकथाम के लिए उठाए गए अतिरेकपूर्ण कदमों के कारण दुनिया में क्या स्थितियाँ उत्पन्न होने वाली हैं। विशेष तौर पर सामाजिक वंचना झेल रहे मानव-समुदायों पर इसका क्या प्रभाव पड़ने वाला है। आलेख में भारत के उन शोषित समुदायों को केंद्र में रखा गया है, जो भारतीय आबादी का बहुसंख्यक हिस्सा हैं। इस बहुसंख्या में…[Read more]
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Pramod Ranjan deposited कोविड पश्चात दुनिया और बहुजन कार्यकर्ताओं की ज़िम्मेदारी in the group
Medical Humanities on Humanities Commons 2 years, 8 months agoइस आलेख में मैंने देखने की कोशिश कि कोविड की रोकथाम के लिए उठाए गए अतिरेकपूर्ण कदमों के कारण दुनिया में क्या स्थितियाँ उत्पन्न होने वाली हैं। विशेष तौर पर सामाजिक वंचना झेल रहे मानव-समुदायों पर इसका क्या प्रभाव पड़ने वाला है। आलेख में भारत के उन शोषित समुदायों को केंद्र में रखा गया है, जो भारतीय आबादी का बहुसंख्यक हिस्सा हैं। इस बहुसंख्या में…[Read more]
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Pramod Ranjan deposited कोविड पश्चात दुनिया और बहुजन कार्यकर्ताओं की ज़िम्मेदारी in the group
Communication Studies on Humanities Commons 2 years, 8 months agoइस आलेख में मैंने देखने की कोशिश कि कोविड की रोकथाम के लिए उठाए गए अतिरेकपूर्ण कदमों के कारण दुनिया में क्या स्थितियाँ उत्पन्न होने वाली हैं। विशेष तौर पर सामाजिक वंचना झेल रहे मानव-समुदायों पर इसका क्या प्रभाव पड़ने वाला है। आलेख में भारत के उन शोषित समुदायों को केंद्र में रखा गया है, जो भारतीय आबादी का बहुसंख्यक हिस्सा हैं। इस बहुसंख्या में…[Read more]
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Pramod Ranjan deposited कोविड पश्चात दुनिया और बहुजन कार्यकर्ताओं की ज़िम्मेदारी on Humanities Commons 2 years, 8 months ago
इस आलेख में मैंने देखने की कोशिश कि कोविड की रोकथाम के लिए उठाए गए अतिरेकपूर्ण कदमों के कारण दुनिया में क्या स्थितियाँ उत्पन्न होने वाली हैं। विशेष तौर पर सामाजिक वंचना झेल रहे मानव-समुदायों पर इसका क्या प्रभाव पड़ने वाला है। आलेख में भारत के उन शोषित समुदायों को केंद्र में रखा गया है, जो भारतीय आबादी का बहुसंख्यक हिस्सा हैं। इस बहुसंख्या में…[Read more]
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Pramod Ranjan deposited परिवर्तन के चार साल in the group
Sociology on Humanities Commons 2 years, 9 months agoफरवरी, 2010 में प्रकाशित इस लेख में बिहार की तत्कालीन राजनीतिक परिस्थितियों को रेखांकित किया गया है, जिसके कारण वंचित तबकों से आने लोगों का उत्पीड़न हो रहा था। लेख में इसके लिए तत्कालीन नीतीश कुमार की सरकार को दोषी बाताया गया है।
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Pramod Ranjan deposited परिवर्तन के चार साल in the group
Public Humanities on Humanities Commons 2 years, 9 months agoफरवरी, 2010 में प्रकाशित इस लेख में बिहार की तत्कालीन राजनीतिक परिस्थितियों को रेखांकित किया गया है, जिसके कारण वंचित तबकों से आने लोगों का उत्पीड़न हो रहा था। लेख में इसके लिए तत्कालीन नीतीश कुमार की सरकार को दोषी बाताया गया है।
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