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Pramod Ranjan deposited ‘हलंत’ और समकालीन कविता का बौद्धिक दायरा in the group
Sociology on Humanities Commons 2 years agoअष्टभुजा शुक्ल की अनेक कविताओं का कथ्य भी बहुत समस्याग्रस्त है। उनमें प्रतिक्रियावादी मूल्य भरे पड़े हैं। इन कविताओं को पढ़ते हुए लगता है कि वे समाज को पीछे ले जाने वाले कवि हैं। इस लेख में उनकी कविता की प्रतिगामिता पर चर्चा की गई है।
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Pramod Ranjan deposited ‘हलंत’ और समकालीन कविता का बौद्धिक दायरा in the group
Literary theory on Humanities Commons 2 years agoअष्टभुजा शुक्ल की अनेक कविताओं का कथ्य भी बहुत समस्याग्रस्त है। उनमें प्रतिक्रियावादी मूल्य भरे पड़े हैं। इन कविताओं को पढ़ते हुए लगता है कि वे समाज को पीछे ले जाने वाले कवि हैं। इस लेख में उनकी कविता की प्रतिगामिता पर चर्चा की गई है।
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Pramod Ranjan deposited ‘हलंत’ और समकालीन कविता का बौद्धिक दायरा in the group
Communication Studies on Humanities Commons 2 years agoअष्टभुजा शुक्ल की अनेक कविताओं का कथ्य भी बहुत समस्याग्रस्त है। उनमें प्रतिक्रियावादी मूल्य भरे पड़े हैं। इन कविताओं को पढ़ते हुए लगता है कि वे समाज को पीछे ले जाने वाले कवि हैं। इस लेख में उनकी कविता की प्रतिगामिता पर चर्चा की गई है।
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अष्टभुजा शुक्ल की अनेक कविताओं का कथ्य भी बहुत समस्याग्रस्त है। उनमें प्रतिक्रियावादी मूल्य भरे पड़े हैं। इन कविताओं को पढ़ते हुए लगता है कि वे समाज को पीछे ले जाने वाले कवि हैं। इस लेख में उनकी कविता की प्रतिगामिता पर चर्चा की गई है।
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Pramod Ranjan deposited नई तकनीक और पिछड़ती भाषा in the group
Artificial Intelligence on Humanities Commons 2 years, 1 month agoआज तकनीक पर कामचलताऊ ढ़ंग से लिखने-बोलने से से काम नहीं चलेगा, जैसा कि हिंदी बुद्धिजीवी अभी कर रहे हैं। बल्कि इस बारे में हल्की-फुल्की भाषा में सामग्री पढ़ने की चाह रखने से भी बाज आना चाहिए। चलताऊ भाषा में आप नए उपकरणों की गुणवत्ता की, उनके उपयोग आदि की जानकारी ले-दे सकते हैं। किसी स्मार्ट उपकरण समीक्षाएं पढ़कर उसे खरीदने या न खरीदने का फैसला कर…[Read more]
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आज तकनीक पर कामचलताऊ ढ़ंग से लिखने-बोलने से से काम नहीं चलेगा, जैसा कि हिंदी बुद्धिजीवी अभी कर रहे हैं। बल्कि इस बारे में हल्की-फुल्की भाषा में सामग्री पढ़ने की चाह रखने से भी बाज आना चाहिए। चलताऊ भाषा में आप नए उपकरणों की गुणवत्ता की, उनके उपयोग आदि की जानकारी ले-दे सकते हैं। किसी स्मार्ट उपकरण समीक्षाएं पढ़कर उसे खरीदने या न खरीदने का फैसला कर…[Read more]
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Pramod Ranjan deposited विपाशा का कविता अंक: हिमाचल के साहित्यिक इतिहास की झलक in the group
Literary theory on Humanities Commons 2 years, 2 months agoहिमाचल प्रदेश के भाषा एवं संस्कृति विभाग की पत्रिका विपाशा का अप्रैल – अगस्त 2022 अंक हिमाचल की हिंदी कविता पर केंद्रित था। यह उस अंक की प्रमोद रंजन द्वारा लिखित समीक्षा है।
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Pramod Ranjan deposited विपाशा का कविता अंक: हिमाचल के साहित्यिक इतिहास की झलक in the group
Literary Journalism on Humanities Commons 2 years, 2 months agoहिमाचल प्रदेश के भाषा एवं संस्कृति विभाग की पत्रिका विपाशा का अप्रैल – अगस्त 2022 अंक हिमाचल की हिंदी कविता पर केंद्रित था। यह उस अंक की प्रमोद रंजन द्वारा लिखित समीक्षा है।
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Pramod Ranjan deposited विपाशा का कविता अंक: हिमाचल के साहित्यिक इतिहास की झलक on Humanities Commons 2 years, 3 months ago
हिमाचल प्रदेश के भाषा एवं संस्कृति विभाग की पत्रिका विपाशा का अप्रैल – अगस्त 2022 अंक हिमाचल की हिंदी कविता पर केंद्रित था। यह उस अंक की प्रमोद रंजन द्वारा लिखित समीक्षा है।
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Pramod Ranjan deposited समाचार के लिए भुगतान: मेटा, कानून और स्वतंत्र पत्रकारिता में रस्साकशी in the group
Scholarly Communication on Humanities Commons 2 years, 3 months agoआस्ट्रेलिया ने 2021 में मीडिया संस्थानों के हितों की रक्षा के लिए ‘समाचार मीडिया और डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म अनिवार्य सौदेबाजी कानून’ बनाया था। 2023 में ऐसा ही कानून कैनेडा में बनाया गया। भारत समेत कई अन्य देश भी ऐसे कानून बनाने पर विचार कर रहे हैं। टेक-कंपनियां ऐसे कानूनों का विरोध करती हैं तथा अपनी शर्तें न माने जाने की स्थिति में अपनी…[Read more]
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Pramod Ranjan deposited समाचार के लिए भुगतान: मेटा, कानून और स्वतंत्र पत्रकारिता में रस्साकशी in the group
Communication Studies on Humanities Commons 2 years, 3 months agoआस्ट्रेलिया ने 2021 में मीडिया संस्थानों के हितों की रक्षा के लिए ‘समाचार मीडिया और डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म अनिवार्य सौदेबाजी कानून’ बनाया था। 2023 में ऐसा ही कानून कैनेडा में बनाया गया। भारत समेत कई अन्य देश भी ऐसे कानून बनाने पर विचार कर रहे हैं। टेक-कंपनियां ऐसे कानूनों का विरोध करती हैं तथा अपनी शर्तें न माने जाने की स्थिति में अपनी…[Read more]
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Pramod Ranjan deposited समाचार के लिए भुगतान: मेटा, कानून और स्वतंत्र पत्रकारिता में रस्साकशी on Humanities Commons 2 years, 3 months ago
आस्ट्रेलिया ने 2021 में मीडिया संस्थानों के हितों की रक्षा के लिए ‘समाचार मीडिया और डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म अनिवार्य सौदेबाजी कानून’ बनाया था। 2023 में ऐसा ही कानून कैनेडा में बनाया गया। भारत समेत कई अन्य देश भी ऐसे कानून बनाने पर विचार कर रहे हैं। टेक-कंपनियां ऐसे कानूनों का विरोध करती हैं तथा अपनी शर्तें न माने जाने की स्थिति में अपनी…[Read more]
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Pramod Ranjan deposited मणिपुर हिंसा: परतों के भीतर कितनी परतें होती हैं? in the group
Religious Studies on Humanities Commons 2 years, 4 months agoयह मणिपुर में 2023 में हुई हिंसा पर केंद्रित प्रमोद रंजन के रिपोर्ताजों का पहला भाग है।
प्रमोद रंजन इसमें पूर्वोत्तर भारत के इतिहास, संस्कृति और समाज में आ रहे परिवर्तनों को चिन्हित किया है तथा उसका संवेदनशील, मर्मस्पर्शी और विचारोत्तेजक चित्र प्रस्तुत किया है।
उन्होंने इस रिपोर्ताज में यह भी बताया है कि हिंसा के दौरान मैतेई महिलाओं के…[Read more]
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Pramod Ranjan deposited मणिपुर हिंसा: परतों के भीतर कितनी परतें होती हैं? in the group
Literary Journalism on Humanities Commons 2 years, 4 months agoयह मणिपुर में 2023 में हुई हिंसा पर केंद्रित प्रमोद रंजन के रिपोर्ताजों का पहला भाग है।
प्रमोद रंजन इसमें पूर्वोत्तर भारत के इतिहास, संस्कृति और समाज में आ रहे परिवर्तनों को चिन्हित किया है तथा उसका संवेदनशील, मर्मस्पर्शी और विचारोत्तेजक चित्र प्रस्तुत किया है।
उन्होंने इस रिपोर्ताज में यह भी बताया है कि हिंसा के दौरान मैतेई महिलाओं के…[Read more]
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Pramod Ranjan deposited मणिपुर हिंसा: परतों के भीतर कितनी परतें होती हैं? in the group
Feminist Humanities on Humanities Commons 2 years, 4 months agoयह मणिपुर में 2023 में हुई हिंसा पर केंद्रित प्रमोद रंजन के रिपोर्ताजों का पहला भाग है।
प्रमोद रंजन इसमें पूर्वोत्तर भारत के इतिहास, संस्कृति और समाज में आ रहे परिवर्तनों को चिन्हित किया है तथा उसका संवेदनशील, मर्मस्पर्शी और विचारोत्तेजक चित्र प्रस्तुत किया है।
उन्होंने इस रिपोर्ताज में यह भी बताया है कि हिंसा के दौरान मैतेई महिलाओं के…[Read more]
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Pramod Ranjan deposited मणिपुर हिंसा: परतों के भीतर कितनी परतें होती हैं? in the group
Cultural Studies on Humanities Commons 2 years, 4 months agoयह मणिपुर में 2023 में हुई हिंसा पर केंद्रित प्रमोद रंजन के रिपोर्ताजों का पहला भाग है।
प्रमोद रंजन इसमें पूर्वोत्तर भारत के इतिहास, संस्कृति और समाज में आ रहे परिवर्तनों को चिन्हित किया है तथा उसका संवेदनशील, मर्मस्पर्शी और विचारोत्तेजक चित्र प्रस्तुत किया है।
उन्होंने इस रिपोर्ताज में यह भी बताया है कि हिंसा के दौरान मैतेई महिलाओं के…[Read more]
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Pramod Ranjan deposited मणिपुर हिंसा: परतों के भीतर कितनी परतें होती हैं? in the group
Communication Studies on Humanities Commons 2 years, 4 months agoयह मणिपुर में 2023 में हुई हिंसा पर केंद्रित प्रमोद रंजन के रिपोर्ताजों का पहला भाग है।
प्रमोद रंजन इसमें पूर्वोत्तर भारत के इतिहास, संस्कृति और समाज में आ रहे परिवर्तनों को चिन्हित किया है तथा उसका संवेदनशील, मर्मस्पर्शी और विचारोत्तेजक चित्र प्रस्तुत किया है।
उन्होंने इस रिपोर्ताज में यह भी बताया है कि हिंसा के दौरान मैतेई महिलाओं के…[Read more]
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Pramod Ranjan deposited मणिपुर हिंसा: परतों के भीतर कितनी परतें होती हैं? on Humanities Commons 2 years, 4 months ago
यह मणिपुर में 2023 में हुई हिंसा पर केंद्रित प्रमोद रंजन के रिपोर्ताजों का पहला भाग है।
प्रमोद रंजन इसमें पूर्वोत्तर भारत के इतिहास, संस्कृति और समाज में आ रहे परिवर्तनों को चिन्हित किया है तथा उसका संवेदनशील, मर्मस्पर्शी और विचारोत्तेजक चित्र प्रस्तुत किया है।
उन्होंने इस रिपोर्ताज में यह भी बताया है कि हिंसा के दौरान मैतेई महिलाओं के…[Read more]
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Pramod Ranjan deposited यह भारतीय हिंदी प्राध्यापक परिषद क्या बला है? in the group
Curriculum Development on Humanities Commons 2 years, 7 months agoभारत में फासीवादी नीतियों का नौकरीपेशा मध्यम वर्ग प्रतिरोध नहीं कर रहा। हालांकि, प्रतिरोध की अधिक जिम्मेवारी उन प्राध्यापकों पर है, जो स्वयं को बुद्धिजीवी कहते हैं और जिन्हें लिखने और बोलने के लिए किंचित अधिक नैतिक और कानूनी सुविधा प्राप्त है।
सच यह है कि इनमें से अधिकांश भय से अधिक लोभ के कारण चुप हैं और चुपचाप निजाम बदलने का इंतजार कर रहे हैं…[Read more]
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Pramod Ranjan deposited यह भारतीय हिंदी प्राध्यापक परिषद क्या बला है? in the group
Communication Studies on Humanities Commons 2 years, 7 months agoभारत में फासीवादी नीतियों का नौकरीपेशा मध्यम वर्ग प्रतिरोध नहीं कर रहा। हालांकि, प्रतिरोध की अधिक जिम्मेवारी उन प्राध्यापकों पर है, जो स्वयं को बुद्धिजीवी कहते हैं और जिन्हें लिखने और बोलने के लिए किंचित अधिक नैतिक और कानूनी सुविधा प्राप्त है।
सच यह है कि इनमें से अधिकांश भय से अधिक लोभ के कारण चुप हैं और चुपचाप निजाम बदलने का इंतजार कर रहे हैं…[Read more]
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