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Pramod Ranjan deposited बहुजन साहित्य: वर्तमान और भविष्य [Bahujan Literature: Present and Future] in the group
Literary theory on Humanities Commons 3 years, 3 months agoयह आलेख भारतीय साहित्य में उभर रही बहुजन अवधारणा को रेखांकित करता है।
इस लेख में बताया गया है कि “बहुजन साहित्य का अर्थ है– अभिजन के विपरीत बहुजन का साहित्य और उनकी वैचारिकी। प्रगतिशील- मार्क्सवादी विचारधारा में जो ‘जन’ है, ‘बहुजन’ उसकी अगली कड़ी भी है। मार्क्सवाद के ‘जन’ का अर्थ भारत के सामाजिक-यथार्थ के संदर्भ में न सिर्फ अस्पष्ट और अनिश्…[Read more] - Load More