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Pramod Ranjan deposited ‘कला और साहित्य के केंद्र में जीवन होना चाहिए’ (प्रेमकुमार मणि से प्रमेाद रंजन की बातचीत) in the group
Literary theory on Humanities Commons 3 years, 2 months agoहिंदी साहित्यकार व चिंतक प्रेमकुमार मणि अपनी उत्कृष्ट कहानियों और वैचारिक लेखों के लिए जाने जाते हैं। उनके पांच कहानी-संकलन, एक उपन्यास और लेखों के कई संकलन प्रकाशित हैं। ‘अकथ कहानी’ शीर्षक से उनकी आत्मकथा शीघ्र प्रकाश्य है। इस बातचीत में प्रेमकुमार मणि के जीवन के कई पहलु पहली बार पाठकों के सामने आए हैं।
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Pramod Ranjan deposited ‘हिंदी साहित्येतिहास का बहुजन पक्ष’, ‘बहुजन साहित्य की प्रस्तावन’ व ‘महिषासुर एक जननायक’: नई सांस्कृतिक-साहित्यिक दृष्टि की प्रस्तावना in the group
Literary theory on Humanities Commons 3 years, 2 months agoबहुजन साहित्य और संस्कृति की अवधारणा ने पिछले कुछ वर्षों में आकार लेना शुरू किया है। अभी हाल (2016) में आए प्रमोद रंजन द्वारा संपादित तीन संकलन- ‘बहुजन साहित्य की प्रस्तावना’, ‘हिन्दी साहित्येतिहास का बहुजन पक्ष’और ‘महिषासुर एक जननायक’- बहुजन साहित्यिक-सांस्कृतिक आंदोलन की प्रस्तावना और अवधारणा को सामने रखते हैं और इसे पल्लवित-पुष्पित तथा विकसित क…[Read more]
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Pramod Ranjan deposited ‘दोआबा’ का अहिल्या आख्यान और साहित्य की कसौटी in the group
Literary theory on Humanities Commons 3 years, 2 months agoपटना से प्रकाशित दोआबा के जनवरी-मार्च, 2022 अंक की समीक्षा है। दोआबा का यह अंक लगभग 600 पन्नों का है। इनमें से 533 पन्नों में नीलम नील की दो ‘कथा-डायरी’ प्रकाशित हैं, जिनके शीर्षक क्रमश: ‘आंगन में आग’ और ‘अहिल्या आख्यान’ हैं। शेष पृष्ठों पर उन्हीं पर केंद्रित संपादकीय, संस्मरण आदि हैं। साहित्य की पहचान यह नहीं है कि लेखक कितना संवेदनशील ह…[Read more]
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Pramod Ranjan deposited साहित्य का नया रास्ता in the group
Literary theory on Humanities Commons 3 years, 2 months agoदिनों-दिन उपन्यास और कहानियां “पढ़ना” कठिन होता जा रहा है। साहित्य संबंधी लेखन-अध्यापन में लगे हम लोगों को पढ़ने काम अक्सर एक पेशागत काम की तरह करना पड़ता है। ऐसा साहित्य हिंदी में बहुत कम आ भी रहा है जिसे पढ़ कर बहुत कुछ नया मिलने की उम्मीद जगे। वस्तुत: बात सिर्फ हिंदी की नहीं है, परंपरागत रूप से जिसे हम विशुद्ध साहित्य कहते हैं, वह अब अपने समय…[Read more]
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Pramod Ranjan deposited Forward Press: Let’s embark on a new journey in the group
History on Humanities Commons 3 years, 2 months agoThe last print issue of FORWARD Press was published in April, 2016. This editorial in the last issue of Forward Press has been written by Pramod Ranjan. Thereafter Forward Press continued to be published as a website and also ventured into the business of books. Pramod Ranjan parted ways with Forward Press in October 2019 in protest against the…[Read more]
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Pramod Ranjan deposited फारवर्ड प्रेस: आइए चलें नई यात्रा की ओर in the group
History on Humanities Commons 3 years, 2 months agoफारवर्ड प्रेस काअंतिम प्रिट अंक अप्रैल, 2016 में प्रकाशित हुआ था। यह उस अंतिम अंक का प्रमोद रंजन द्वारा लिखा गया संपादकीय है। उसके बाद फारवर्ड प्रेस वेबसाइट के रूप में प्रकाशित होता रहा तथा किताबों के व्यवसाय में भी उतरा। फारवर्ड प्रेस के मालिकों द्वारा की जा रही वित्तीय अनियमितता के विरोध में प्रमोद रंजन ने अक्टूबर, 2019 में इस पत्रिका से अलग हो गए।
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