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Pramod Ranjan deposited महिषासुर से संबंधित परंपराओं और आंदोलन के निहितार्थ in the group
Cultural Studies on Humanities Commons 2 years, 11 months agoमहिषासुर आंदोलन के इस कदर अचानक फैल जाने का एक बड़ा कारण था कि बहुजन समाज में इन परंपराओं की जड़ें बहुत गहरी रही हैं और इनका प्रसार उसके अवचेतन तक रहा है। इन समुदायों से आने वाले फुले, आंबेडकर, पेरियार समेत सभी चिंतकों ने असुर-संस्कृति की न सिर्फ विस्तृत गवेषणा की है, बल्कि अगर आप ध्यान से देखें तो पाएंगे कि यही उनकी वैचारिकी का प्रस्थान…[Read more]
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Pramod Ranjan deposited बिहारी अस्मिता: शहीद बनाने का खेल in the group
Cultural Studies on Humanities Commons 2 years, 11 months ago27 अक्टूबर, 2008 को एक बिहारी नवयुवक राहुल राज की मुंबई पुलिस ने हत्या कर दी थी। इसके बाद बिहार में युवाओं ने व्यापक आंदोलन किया था। कई जगहों पर तोड़फोड़ और आगजनी की घटनाएं हुईं थीं। कई दिनों तक राजधानी पटना ठप रही थी। इस संबंध में आरोप-प्रत्यारोप की लंबी राजनीति चली थी और राहुल राज को बिहारी अस्मिता के प्रतीक के रूप में देखा गया था। इ…[Read more]
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Pramod Ranjan deposited किन्नौर में बौद्ध धर्म, जाति प्रथा और राजनीति in the group
Cultural Studies on Humanities Commons 2 years, 11 months agoखूबसूरत प्राकृतिक दृश्यों से परिपूर्ण किन्नौर का समाज व संस्कृति शेष भारत से अलग है। यह बौद्ध धर्म का इलाका है, जिसे हिंदूवादी संस्कृति लीलती जा रही है। आर्थिक संपन्नता के आगमन से जाति-आधारित उत्पीड़न और भेदभाव कम हो रहा है। प्रमोद रंजन ने इस यात्रा संस्मरण में किन्नौर की विशिष्ट संस्कृति, बहु पत्नी प्रथा, वहां के समाज और राजनीति…[Read more]
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Pramod Ranjan deposited Footsteps of post-humanism in the group
Cultural Studies on Humanities Commons 2 years, 11 months agoDiscourse called post-humanism believes that humanism is a phony notion and an excuse for ruling over the other animals — and that it would eventually invite the destruction of the human race. They draw attention to the scientific fact that man is also an ordinary animal and just like other animals and birds is a small part of the huge e…[Read more]
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Pramod Ranjan deposited स्वर कोकिला लता मंगेशकर के सामाजिक और राजनैतिक सरोकार in the group
Cultural Studies on Humanities Commons 2 years, 11 months agoपार्श्व गायिका लता मंगेशकर ने लगभग सात दशकों तक भारतीय संगीत की दुनिया पर राज किया। उनके गाए गीत भारत में ही नहीं, पाकिस्तान, बांग्लादेश समेत कई देशों में पसंद किए जाते थे। इस लेख में उनके सामाजिक सरोकारों और राजनीतिक रुझानों की चर्चा की गई है। उनका वैचारिक जुड़ाव राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से था, जो कि अपनी नाजीवादी विचारधारा…[Read more]
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Derek Johnston deposited The Gothicisation of British TV Historical Drama in the group
Cultural Studies on Humanities Commons 3 years agoThis paper examines a strand in British television historical drama that presents what I term a “Gothicised” version of history. This actively engages with historical trauma as returning to confront its originating society, as the classic Gothic text represents the returning or ongoing effects of a traumatic past in the narrative present. In Peaky…[Read more]
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Derek Johnston deposited Gothicising Picnic at Hanging Rock in the group
Cultural Studies on Humanities Commons 3 years agoThis paper considers the 2018 television adaptation of Picnic at Hanging Rock as an example of Gothicised historical television drama, which uses the Gothic mode to present a past in a way that challenges our expectations of what prestige historical drama should be like, and to emphasise historical traumas and the way that they are still relevant…[Read more]
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Pramod Ranjan deposited हिंदी पट्टी में पेरियार in the group
Cultural Studies on Humanities Commons 3 years agoपेरियार के मूल तमिल लेखन का हिंदी अनुवाद उपलब्ध नहीं था, इस कारण उनकी वैचारिकी से हिंदी क्षेत्रों के दलित-बहुजन आंदोलन का उस तरह का सघन और सक्रिय रिश्ता विकसित नहीं हो था, जैसा कि डॉ. आम्बेडकर और बहुत हद तक जोतिराव फुले से हो सका है। इस कमी को प्रमोद रंजन द्वारा 2020 में संपादित पेरियार पर केंद्रित तीन पुस्तकों की ऋंखला ने पूरा किया। ये पु…[Read more]
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Pramod Ranjan deposited Mahishasur A people’s hero in the group
Cultural Studies on Humanities Commons 3 years agoThis is the English edition of the book ‘Mahishasur: Ek Jannayak’. The book searches for a hero who has been ever-present in the memories, traditions, festivals, and celebrations of a majority of the people of India but who the dominant culture of the country has given the image of a villain. Recently, the search for this people’s hero triggered a…[Read more]
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Pramod Ranjan deposited पेरियार के प्रतिनिधि विचार in the group
Cultural Studies on Humanities Commons 3 years agoहिंदी में पेरियार का मूल लेखन और जीवनी उपलब्ध नहीं थी। सामाजिक आंदोलनों व अकादमियों में जो नई हिंदी भाषी पीढ़ी आई है, वह ‘नास्तिक पेरियार’ से तो खूब परिचित है और उनके प्रति उसमें जबर्दस्त आकर्षण भी है, लेकिन यह पीढ़ी उनके विचारों के बारे में कुछ सुनी-सुनाई, आधी-अधूरी बातें ही जानती है। वस्तुतः उसने पेरियार को पढ़ा नहीं है।
उनकी ‘द…[Read more] -
Pramod Ranjan deposited धर्म और विश्वदृष्टि- पेरियार ई. वी. रामासामी in the group
Cultural Studies on Humanities Commons 3 years agoयह किताब ई.वी. रामासामी नायकर ‘पेरियार’ (17 सितम्बर, 1879—24 दिसम्बर, 1973) के दार्शनिक व्यक्तित्व से परिचित कराती है। धर्म, ईश्वर और मानव समाज का भविष्य उनके दार्शनिक चिन्तन का केन्द्रीय पहलू रहा है। उन्होंने मानव समाज के सन्दर्भ में धर्म और ईश्वर की भूमिका पर गहन चिन्तन-मनन किया है। इस चिन्तन-मनन के निष्कर्षों को इस किताब के विविध लेखों मे…[Read more]
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Pramod Ranjan deposited महिषासुर एक जननायक in the group
Cultural Studies on Humanities Commons 3 years agoप्रमोद रंजन द्वारा संपादित पुस्तक “महिषासुर एक जननायक” का उद्देश्य यह स्पष्ट करना है कि आखिर महिषासुर नाम से शुरू किया गया यह आन्दोलन है क्या? इसकी आवश्यकता क्यों पड़ी? इसके निहितार्थ क्या हैं? इस पुस्तक में प्रश्न उठाया गया है कि जब असुर एक प्रजाति है तो उसकी हार या उसके नायक की ह्त्या का उत्सव किस सांस्कृतिक मनोवृत्ति का परिचायक…[Read more]
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Pramod Ranjan deposited महिषासुर मिथक व परंपराएं in the group
Cultural Studies on Humanities Commons 3 years agoमहिषासुर से संबंधित बहुजन समाज के मिथकों व परंपराओं , पौराणिक मिथकों और आधुनिक युग में गढे़ गए मिथकों के अर्थों को खोलने वाली इस पुस्तक का संपादक प्रमोद रंजन ने किया है। इस पुस्तक में पहली बार महिषासुर शहादत/स्मरण दिवस की विस्तृत सैद्धांतिकी भी प्रस्तुत की गई है तथा इस संबंध में उठने वालो सभी सवालों के उत्तर प्रस्तुत किये गये हैं।…[Read more]
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Pramod Ranjan deposited समय से संवाद: जन विकल्प संचयिता in the group
Cultural Studies on Humanities Commons 3 years ago‘समय से संवाद: जनविकल्प संचयिता’ नाम यह पुस्तक हिंदी मासिक ‘जन विकल्प’ में प्रकाशित प्रतिनिधि सामग्री का संकलन है। प्रेमकुमार मणि और प्रमोद रंजन के संपादन में पटना से वर्ष 2007 में प्रकाशित इस पत्रिका की जनपक्षधरता, निष्पक्षता और मौलिक त्वरा ने समाजकर्मियों और बुद्धिजीवियों को गहराई से आलोड़ित किया था। इस पुस्तक में जिन लेखों और साक्षात्कारों…[Read more]
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Pramod Ranjan deposited भारत के राजनेता: अली अनवर in the group
Cultural Studies on Humanities Commons 3 years ago‘भारत के राजनेता’ शीर्षक शृंखला की यह किताब भारत में पसमांदा आन्दोलन के सूत्रधार तथा राज्यसभा सांसद ‘अली अनवर’ की संसदीय सहभागिता और संसद में सामाजिक-राजनीतिक मुद्दों पर उनकी पहलों पर केंद्रित है। संसद में विविध मसलों पर उनके वक्तव्यों, दर्ज भाषणों, हस्तक्षेपों, स्पेशल मेंशन तथा साक्षात्कार के माध्यम से उनके सरोकारों को समझने की गंभीर कोशिश य…[Read more]
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Pramod Ranjan deposited बहुजन साहित्य की प्रस्तावना in the group
Cultural Studies on Humanities Commons 3 years agoयह पुस्तक मूल रूप से हिंदी में वर्ष 2016 में ‘बहुजन साहित्य की प्रस्तावना’ शीर्षक से प्रकाशित हुई थी। उसका यह अंग्रेजी अनुवाद भी उसी वर्ष प्रकाशित हुआ था। यह किताब हिन्दी और भारतीय भाषाओं में बहुजन साहित्य की अवधारणा पर विमर्श प्रस्तुत करती है। एक ओर यह किताब हिंदी साहित्य में हो रहे बदलावों पर नजर रखती है दूसरी ओर मंडल कमीशन के लागू होने के बाद ब…[Read more]
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Pramod Ranjan deposited हिंदी साहित्येतिहास का बहुजन पक्ष in the group
Cultural Studies on Humanities Commons 3 years agoइस पुस्तक में बहुजन साहित्य की अवधारणा की आवश्यकता को रेखांकित किया गया है। बहुजन साहित्य की अवधारणा का पैमाना लेखक का कुल लेखकीय-वैचारिक अवदान है। इसलिए द्विज समुदाय से आने वाले ऐसे लेखकों के लिए भी इसमें स्थान है, जिनकी दृढ पक्षधरता इन वंचित तबकों के प्रति हो। जैसा कि हम फारवर्ड प्रेस में कहते आए हैं कि यह अवधारणा उस व…[Read more]
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Pramod Ranjan deposited भगाणा की निर्भयाएं in the group
Cultural Studies on Humanities Commons 3 years agoयह किताब बहुजन डाइवर्सिटी द्वारा 2007 से शुरू की गई भारत की ज्वलंत समस्याएं शृंखला की है। पुस्तक में समय समय पर उद्भव होने वाली कुछ ख़ास समस्याओं, जिनसे राष्ट्र का जीवन बुरी तरह प्रभावित होता है एवं जिन्हें मीडिया के अल्पकालिक प्रभाव के चलते लोग एक अंतराल के बाद विस्मृत कर समस्याओं के अम्बार में घिरे देश की दूसरी समस्याओं में खो जाते हैं, को यद…[Read more]
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Pramod Ranjan deposited भारत के राजनेता: रामदास आठवले in the group
Cultural Studies on Humanities Commons 3 years agoभारत के राजनेता शीर्षक शृंखला की यह किताब महाराष्ट्र के राजनेता, आरपीआई(अ) के राष्ट्रीय अध्यक्ष तथा राज्यसभा सांसद ‘रामदास आठवले’ की संसदीय सहभागिता और संसद में सामाजिक-राजनीतिक मुद्दों पर उनकी पहलों पर केंद्रित है। आठवले महाराष्ट्र में सामाजिक न्याय मंत्री के रूप में अपनी राजनीतिक पारी शुरू कर पिछले तीन दशक से राज्य और केंद्र की राजनीति में अप…[Read more]
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Pramod Ranjan deposited सच्ची रामायण: पेरियार ई. वी. रामासामी in the group
Cultural Studies on Humanities Commons 3 years agoसच्ची रामायण, पेरियार ई. वी. रामासामी की बहुचर्चित और सबसे विवादास्पद कृति रही है। पेरियार रामायण को एक राजनीतिक ग्रंथ मानते थे। उनका कहना था कि इसे दक्षिणवासी अनार्यों पर उत्तर के आर्यों की विजय और प्रभुत्व को जायज ठहराने के लिए लिखा गया और यह गैर-ब्राह्मणों पर ब्राह्मणों और महिलाओं पर पुरुषों के वर्चस्व का उपकरण है। यह किताब हिंदी में 1968में ‘स…[Read more]
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