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Pramod Ranjan deposited जीतनराम मांझी: बहुजन राजनीति की नई उम्मीद in the group
Sociology on Humanities Commons 3 years agoजीतन राम मांझी, एक भारतीय राजनेता और बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री हैं। वो राजनीतिक पार्टी जनता दल (यूनाइटेड) के नेता के तौर पर 23वें मुख्यमंत्री रहे। मांझी बिहार राज्य में दलित समुदाय के तीसरे मुख्यमंत्री रहे। उनकी सरकार ने अपने अल्प कार्यकाल में कमजोर तबकों को जल्दी इन्साफ दिलाने की तीव्र कोशिश, गरीबों को पाँच डिसमिल जमीन उपलब्ध करान…[Read more]
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Pramod Ranjan deposited हिंदी पट्टी में पेरियार in the group
Sociology on Humanities Commons 3 years agoपेरियार के मूल तमिल लेखन का हिंदी अनुवाद उपलब्ध नहीं था, इस कारण उनकी वैचारिकी से हिंदी क्षेत्रों के दलित-बहुजन आंदोलन का उस तरह का सघन और सक्रिय रिश्ता विकसित नहीं हो था, जैसा कि डॉ. आम्बेडकर और बहुत हद तक जोतिराव फुले से हो सका है। इस कमी को प्रमोद रंजन द्वारा 2020 में संपादित पेरियार पर केंद्रित तीन पुस्तकों की ऋंखला ने पूरा किया। ये पु…[Read more]
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Pramod Ranjan deposited भगाणा की निर्भयाएं: दलित उत्पीड़न के अनवरत सिलसिले का दृष्टांत in the group
Sociology on Humanities Commons 3 years ago21 मई 2012 को हरियाणा के भगाना (भगाणा) गांव में दबंग जाति के लोगों से विवाद के बाद दलित-पिछड़े परिवारों के 52 से ज्यादा परिवारों को अपना गांव छोड़ने पर मजबूर होना पड़ा था। विवाद की शुरूआत शामलात जमीन पर कब्जा हटवाने को लेकर हुई थी। दबंग समुदाय ने उनका हुक्का पानी बंद कर दिया था। इस घटना के 2 साल बाद 23 मार्च 2014 को भगाना गांव की धानुक समुदाय क…[Read more]
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Pramod Ranjan deposited भगाणा की निर्भयाएं: दलित उत्पीड़न के अनवरत सिलसिले का दृष्टांत in the group
Gender Studies on Humanities Commons 3 years ago21 मई 2012 को हरियाणा के भगाना (भगाणा) गांव में दबंग जाति के लोगों से विवाद के बाद दलित-पिछड़े परिवारों के 52 से ज्यादा परिवारों को अपना गांव छोड़ने पर मजबूर होना पड़ा था। विवाद की शुरूआत शामलात जमीन पर कब्जा हटवाने को लेकर हुई थी। दबंग समुदाय ने उनका हुक्का पानी बंद कर दिया था। इस घटना के 2 साल बाद 23 मार्च 2014 को भगाना गांव की धानुक समुदाय क…[Read more]
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Pramod Ranjan deposited हिंदी साहित्येतिहास का बहुजन पक्ष in the group
Sociology on Humanities Commons 3 years agoयह पुस्तक बहुजन साहित्य की अवधारणा पर केंद्रित है। यह अवधारणा सभी वंचित तबकों के साहित्य में उनकी सामाजिक पृष्ठभूमि के आधार पर साझेपन की तलाश करती है। किंतु, यह सामाजिक पृष्ठभूमि के साथ-साथ लेखक विचारों को भी संज्ञान में लेती है। इस प्रकार, बहुजन साहित्य भारतीय संदर्भ में दलित, आदिवासी, अन्य पिछड़ा वर्ग, पसमांदा मुसलमान, धुमंतू जाति…[Read more]
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Pramod Ranjan deposited मीडिया में दलित, पिछड़े और स्त्री की हिस्सेदारी का सवाल in the group
Sociology on Humanities Commons 3 years agoसितंबर, 2009 में इतिहास, समाजशास्त्र, दर्शन, साहित्य व पत्रकारिता के क्षेत्र में काम करने वाले अनेक प्रमुख विद्वान व युवा अध्येता शिमला में ‘हिंदी की आधुनिकता’ पर पुनर्विचार करने के लिए जुटे थे। समाजशास्त्री अभय कुमार दुबे के संयोजन में यह सात दिवसीय आयोजन भारतीय उच्च अध्ययन संस्थान, शिमला ने किया था।
आयोजन में इस विषय पर व्यापक विचार-विमर्श…[Read more]
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Christopher Griffin deposited On Relationalities: Politics, Narrative, Sociality (Call for Papers) in the group
Gender Studies on Humanities Commons 3 years agoA one-day hybrid symposium to be hosted by the Centre for Applied Philosophy, Politics and Ethics (CAPPE) at the University of Brighton (UK). Date: Wednesday 5 April 2023. Location: University of Brighton, City Campus, M2, and online. Keynote speaker: Dr Leticia Sabsay (LSE). Deadline for abstracts: Friday 24 February 2023. Please see poster for…[Read more]
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Pramod Ranjan deposited कोरोना काल में अभिव्यक्ति पर प्रौद्योगिकी का शिकंजा in the group
Sociology on Humanities Commons 3 years agoऐसी कोई भी बात को जो लॉकडाउन की आवश्यकता को कम करके बताए, वह या तो सोशल-मीडिया से गायब हो गई, या फिर उनकी रीच खत्म कर दी गई। इस लेख में बताया गया है कि ऐसा क्यों हुआ और सूचना प्रौद्योगिकी के दैत्यों ने किस तरह पूरे विश्व पर कब्जा जमाया।
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Pramod Ranjan deposited प्रभाष जोशी को याद करते हुए in the group
Sociology on Humanities Commons 3 years agoप्रभाष जोशी की बौद्धिकता आजीवन अंतत: किसके पक्ष में रही? एक आदमी जो अन्यत्र किंचित तार्किक था, क्यों सामाजिक समानता का आग्रही नहीं बन सका? वर्ण-व्यवस्था का समर्थन कर उन्होंने गांधीवाद का विकास किया उसकी अवैज्ञानिकता को ही प्रमाणित किया? भारतीय प्रभुवर्ग की गुलामी उन्होंने क्यों स्वीकार की? सिर्फ इसलिए कि वह इन्हीं के बीच पैदा हुए थे?
इस संस्म…[Read more]
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Pramod Ranjan deposited बाढ़: अनकही कहानी in the group
Sociology on Humanities Commons 3 years agoइस पुस्तिका में बिहार की कोसी नदी में वर्ष 2008 में आई प्रलयंकारी बाढ़ का आंखों देखा वर्णन है। बाढ़ में हजारों लोग मारे गए थे, लेकिन बिहार में सत्ता पर काबिज पार्टी ने इस त्रासदी काे एक जाति विशेष को सबक सिखाने के अवसर के रूप में लिया था। इसका तथ्यात्मक ब्यौरा इसमें है। साथ ही इसमें बेघर हुए लोगों की मर्मांतक पीड़ा का भी चित्रण है।…[Read more]
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Pramod Ranjan deposited बहुजन राजनीति की नई उम्मीद: जीतनराम मांझी in the group
Sociology on Humanities Commons 3 years agoजीतन राम मांझी, एक भारतीय राजनेता और बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री हैं। वो राजनीतिक पार्टी जनता दल (यूनाइटेड) के नेता के तौर पर 23वें मुख्यमंत्री रहे। मांझी बिहार राज्य में दलित समुदाय के तीसरे मुख्यमंत्री रहे। 20 फरवरी 2015 को उन्होनें मुख्यमंत्री पद से इस्तीफ़ा दे दिया। यह पुस्तक उनके व्यक्तित्व और उनके कार्यों पर आधारित है।
बहुजन…[Read more] -
Pramod Ranjan deposited Mahishasur A people’s hero in the group
Sociology on Humanities Commons 3 years agoThis is the English edition of the book ‘Mahishasur: Ek Jannayak’. The book searches for a hero who has been ever-present in the memories, traditions, festivals, and celebrations of a majority of the people of India but who the dominant culture of the country has given the image of a villain. Recently, the search for this people’s hero triggered a…[Read more]
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Pramod Ranjan deposited पेरियार के प्रतिनिधि विचार in the group
Sociology on Humanities Commons 3 years agoहिंदी में पेरियार का मूल लेखन और जीवनी उपलब्ध नहीं थी। सामाजिक आंदोलनों व अकादमियों में जो नई हिंदी भाषी पीढ़ी आई है, वह ‘नास्तिक पेरियार’ से तो खूब परिचित है और उनके प्रति उसमें जबर्दस्त आकर्षण भी है, लेकिन यह पीढ़ी उनके विचारों के बारे में कुछ सुनी-सुनाई, आधी-अधूरी बातें ही जानती है। वस्तुतः उसने पेरियार को पढ़ा नहीं है।
उनकी ‘द…[Read more] -
Pramod Ranjan deposited धर्म और विश्वदृष्टि- पेरियार ई. वी. रामासामी in the group
Sociology on Humanities Commons 3 years agoयह किताब ई.वी. रामासामी नायकर ‘पेरियार’ (17 सितम्बर, 1879—24 दिसम्बर, 1973) के दार्शनिक व्यक्तित्व से परिचित कराती है। धर्म, ईश्वर और मानव समाज का भविष्य उनके दार्शनिक चिन्तन का केन्द्रीय पहलू रहा है। उन्होंने मानव समाज के सन्दर्भ में धर्म और ईश्वर की भूमिका पर गहन चिन्तन-मनन किया है। इस चिन्तन-मनन के निष्कर्षों को इस किताब के विविध लेखों मे…[Read more]
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Pramod Ranjan deposited महिषासुर मिथक व परंपराएं in the group
Sociology on Humanities Commons 3 years agoमहिषासुर से संबंधित बहुजन समाज के मिथकों व परंपराओं , पौराणिक मिथकों और आधुनिक युग में गढे़ गए मिथकों के अर्थों को खोलने वाली इस पुस्तक का संपादक प्रमोद रंजन ने किया है। इस पुस्तक में पहली बार महिषासुर शहादत/स्मरण दिवस की विस्तृत सैद्धांतिकी भी प्रस्तुत की गई है तथा इस संबंध में उठने वालो सभी सवालों के उत्तर प्रस्तुत किये गये हैं।…[Read more]
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Pramod Ranjan deposited समय से संवाद: जन विकल्प संचयिता in the group
Sociology on Humanities Commons 3 years ago‘समय से संवाद: जनविकल्प संचयिता’ नाम यह पुस्तक हिंदी मासिक ‘जन विकल्प’ में प्रकाशित प्रतिनिधि सामग्री का संकलन है। प्रेमकुमार मणि और प्रमोद रंजन के संपादन में पटना से वर्ष 2007 में प्रकाशित इस पत्रिका की जनपक्षधरता, निष्पक्षता और मौलिक त्वरा ने समाजकर्मियों और बुद्धिजीवियों को गहराई से आलोड़ित किया था। इस पुस्तक में जिन लेखों और साक्षात्कारों…[Read more]
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Pramod Ranjan deposited भारत के राजनेता: अली अनवर in the group
Sociology on Humanities Commons 3 years ago‘भारत के राजनेता’ शीर्षक शृंखला की यह किताब भारत में पसमांदा आन्दोलन के सूत्रधार तथा राज्यसभा सांसद ‘अली अनवर’ की संसदीय सहभागिता और संसद में सामाजिक-राजनीतिक मुद्दों पर उनकी पहलों पर केंद्रित है। संसद में विविध मसलों पर उनके वक्तव्यों, दर्ज भाषणों, हस्तक्षेपों, स्पेशल मेंशन तथा साक्षात्कार के माध्यम से उनके सरोकारों को समझने की गंभीर कोशिश य…[Read more]
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Christopher Griffin started the topic CfP: On Relationalities: Politics, Narrative, Sociality in the discussion
Gender Studies on Humanities Commons 3 years agoOn Relationalities: Politics, Narrative, Sociality
A one-day hybrid symposium to be hosted by the Centre for Applied Philosophy, Politics and Ethics (CAPPE) at the University of Brighton (UK).
Date: Wednesday 5 April 2023
Location: University of Brighton, City Campus, M2, and online
Keynote speaker: Dr Leticia Sabsay (LSE)
Deadline…[Read more]
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Pramod Ranjan deposited हिंदी कविता में संताल परगना का चेहरा in the group
Gender Studies on Humanities Commons 3 years agoयह लेख संथाली मूल की आदिवासी कवयित्री निर्मला पुतुल की कविताओं पर केंद्रित है।
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Pramod Ranjan deposited बहुजन साहित्य की प्रस्तावना in the group
Sociology on Humanities Commons 3 years agoयह पुस्तक मूल रूप से हिंदी में वर्ष 2016 में ‘बहुजन साहित्य की प्रस्तावना’ शीर्षक से प्रकाशित हुई थी। उसका यह अंग्रेजी अनुवाद भी उसी वर्ष प्रकाशित हुआ था। यह किताब हिन्दी और भारतीय भाषाओं में बहुजन साहित्य की अवधारणा पर विमर्श प्रस्तुत करती है। एक ओर यह किताब हिंदी साहित्य में हो रहे बदलावों पर नजर रखती है दूसरी ओर मंडल कमीशन के लागू होने के बाद ब…[Read more]
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