• Using the transatlantic relación of Diego Portichuelo de Ribadeneyra (1657) as an example, this essay tracks some of the ways in which several religious passengers narrated their experience crossing the Atlantic Ocean in the Spanish Indies fleets during the sixteenth and the seventeenth centuries. Of particular importance here are the ways in…[Read more]

  • This chapter is the product of a Keynote Address that Dr. Davis offered at the VII Conference of the Asociación Internacional Siglo de Oro which took place at Robinson College, Cambridge, 18-22 July, 2005. Here the author examines a variety of kinds of early modern Spanish maritime writing (sixteenth and seventeenth centuries).

  • एक अखबार को दिए गए साक्षात्कार में साई बाबा ने बताया था कि हैदराबाद में “मेरा राजनीतिक जीवन मंडल आयोग और आरक्षण की लड़ाई से शुरू हुआ।” जिसमें वसंथा भी उनके साथ शामिल थीं। उसी दौरान मार्च, 1991 में उन्होंने विवाह भी किया। वह लड़ाई वे आजीवन लड़ते रहे।

    इसी प्रकार हैनी बाबू ने भी अन्य पिछड़ा वर्ग के हितों की अनेक बड़ी लड़ाईयां, जिस…[Read more]

  • इक्कसवीं सदी के दूसरे दशक में भारत में महिषासुर आंदोलन द्विज संस्कृति के लिए चुनौती बनकर उभरा। इसके माध्यम से आदिवासियों, पिछड़ों और दलितों के एक बड़े हिस्से ने अपनी सांस्कृतिक दावेदारी पेश की।

    लेकिन यह आंदोलन क्या है, इसकी जड़ें समाज में कहां तक फैली हैं, बहुजनों की सांस्कृतिक परंपरा में इसका क्या स्थान है, मौजूदा लोक-जीवन में महिषासुर क…[Read more]

  • इक्कसवीं सदी के दूसरे दशक में भारत में महिषासुर आंदोलन द्विज संस्कृति के लिए चुनौती बनकर उभरा। इसके माध्यम से आदिवासियों, पिछड़ों और दलितों के एक बड़े हिस्से ने अपनी सांस्कृतिक दावेदारी पेश की।

    लेकिन यह आंदोलन क्या है, इसकी जड़ें समाज में कहां तक फैली हैं, बहुजनों की सांस्कृतिक परंपरा में इसका क्या स्थान है, मौजूदा लोक-जीवन में महिषासुर क…[Read more]

  • महिषासुर आंदोलन के इस कदर अचानक फैल जाने का एक बड़ा कारण था कि बहुजन समाज में इन परंपराओं की जड़ें बहुत गहरी रही हैं और इनका प्रसार उसके अवचेतन तक रहा है। इन समुदायों से आने वाले फुले, आंबेडकर, पेरियार समेत सभी चिंतकों ने असुर-संस्कृति की न सिर्फ विस्तृत गवेषणा की है, बल्कि अगर आप ध्यान से देखें तो पाएंगे कि यही उनकी वैचारिकी का प्रस्थान…[Read more]

  • On the night of April 21, 2010, the powerful Jat community at Mirchpur in Haryana’s Hisar district attacked a Dalit colony. A 70-year-old man and his handicapped daughter were burnt alive in this fire. After that, the Dalits of Mirchpur had to leave the village and run away.

    Scholar and journalist Pramod Ranjan visited Mirchpur in July 2012. He…[Read more]

  • 21 अप्रैल 2010 की रात को हरियाणा के हिसार जिला के मिर्चपुर में दबंग जाट समुदाय ने दलितों की बस्ती में लगा दी थी। इस अग्निकांड में 70 साल के बुर्जुग और उनकी अपंग बेटी जिंदा जला दिया गया था। उसके बाद मिर्चपुर के दलितों को गांव छोड़कर भागना पड़ा था।

    अध्येता प्रमोद रंजन ने जुलाई, 2012 में मिर्चपुर का दौरा किया। वे जिला मुख्यालय हिसार में मिर…[Read more]

  • इस आलेख में बताया गया कि भारतीय सेना के सर्वोच्च पदों पहुंचने वाले लोग ऊंची जातियों से आते हैं। सेना में इनके भीतर जाति के आधार पर वचर्स्व की लड़ाई भी चलती रहती है। सन् 2012 में जनरल वीके सिंह से संबंधित विवाद इसी प्रकार के जाति-युद्ध का नतीजा था। सेना के सर्वोच्च स्तर पर मौजूद ये प्रवृत्तियां भारत की सुरक्षा के लिए खतरनाक हैं।

  • People who reach the highest positions in the Indian Army come from the upper castes. In the army, the fight for supremacy also goes on within them on the basis of caste. In 2012, the controversy regarding General VK Singh was the result of a similar caste war. These trends at the highest level of the military are dangerous for India’s security.

  • The pandemic has been the most vivid agent of change that many of us have known. But it has not changed everything: plenty of the institutions, norms, and practices that sustain racial capitalism, settler colonialism, and cisheteropatriarchy have either weathered the storm of the crisis or been nourished by its effects. And yet enough has changed…[Read more]

  • यह लेख जनवरी 2012 में द्विभाषी पत्रिका फारवर्ड प्रेस में प्रकाशित हुआ था। लेख में भारत में यूपीए की तत्कालीन सरकार की पिछड़ा वर्ग से संबंधित नीतियों की आलोचना की गई है। लेख में बताया गया है कि किस प्रकार कांग्रेस अन्य पिछड़ा वर्ग के निर्धारित आरक्षण को निर्मूल बनाने की कोशिश कर रहा है।

  • This article was published in January 2012. The article criticized the policies of the then UPA government in India related to backward classes. The article describes how the Congress is trying to eradicate the prescribed reservation for the Other Backward Classes.

  • प्रमोद रंजन और उनकी टीम द्वारा वर्ष 2009 में किए गए सर्वेक्षण में पाया गया था कि बिहार की पत्रकारिता में फैसला लेने वालों पदों पर एक भी दलित, पिछड़ा, आदिवासी नहीं है। फैसला लेने वाले पदों पर स्त्रियों की भागीदारी भी शून्य है। इस सर्वेक्षण में प्रिंट व इलेक्ट्रॉनिक दोनों माध्यमों को लिया गया था तथा इसमें हिंदी, अंग्रेजी और उर्दू के मीडिया संस…[Read more]

  • यह लेख अप्रैल, 2011 के अंत में लिखा गया था। उस समय अन्ना हजारे भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन चरम पर था। इस लेख में इस आंदोलन के दलित-बहुजन विरोधी चरित्र को उजागर किया गया है।

    लेख में बताया गया है कि किन कारणों से कॉरपोरेट घराने इस आंदोलन के समर्थक थे और किस प्रकार इसके मूल में लोकतंत्र की अवमानना निहित थी।

  • प्रमोद रंजन इस लेख के माध्यम से सामाजिक कार्यकर्ता राणा बैनर्जी के बहुमुखी प्रतिभा को सामने लाते हैं। पटना के संस्कृतिकर्मी राणा बैनर्जी ने वर्ष 2008 में गंगा में कूदकर आत्महत्या कर लिया था। जब कवि और लेखक आत्महत्या करने लगे तो यह समझ लेना चाहिए कि देश पर, समाज पर गहरा संकट आनेवाला है। आत्महत्या स्वजनित नहीं होती अपितु परिस्थितिजन्य होती है…[Read more]

  • One of the hidden parts of the history of Camden NSW are the Interwar years. Few know the stories of the buildings, characters and events of the town. This article is an overview of the community’s built heritage at a time when the town underwent a building boom driven by the wealth generated by the Burragorang coalfields.

  • 27 अक्टूबर, 2008 को एक बिहारी नवयुवक राहुल राज की मुंबई पुलिस ने हत्या कर दी थी। इसके बाद बिहार में युवाओं ने व्यापक आंदोलन किया था। कई जगहों पर तोड़फोड़ और आगजनी की घटनाएं हुईं थीं। कई दिनों तक राजधानी पटना ठप रही थी। इस संबंध में आरोप-प्रत्यारोप की लंबी राजनीति चली थी और राहुल राज को बिहारी अस्मिता के प्रतीक के रूप में देखा गया था। इ…[Read more]

  • 27 अक्टूबर, 2008 को एक बिहारी नवयुवक राहुल राज की मुंबई पुलिस ने हत्या कर दी थी। इसके बाद बिहार में युवाओं ने व्यापक आंदोलन किया था। कई जगहों पर तोड़फोड़ और आगजनी की घटनाएं हुईं थीं। कई दिनों तक राजधानी पटना ठप रही थी। इस संबंध में आरोप-प्रत्यारोप की लंबी राजनीति चली थी और राहुल राज को बिहारी अस्मिता के प्रतीक के रूप में देखा गया था। इ…[Read more]

  • खूबसूरत प्राकृतिक दृश्यों से परिपूर्ण किन्नौर का समाज व संस्कृति शेष भारत से अलग है। यह बौद्ध धर्म का इलाका है, जिसे हिंदूवादी संस्कृति लीलती जा रही है। आर्थिक संपन्नता के आगमन से जाति-आधारित उत्पीड़न और भेदभाव कम हो रहा है। प्रमोद रंजन ने इस यात्रा संस्मरण में किन्नौर की विशिष्ट संस्कृति, बहु पत्नी प्रथा, वहां के समाज और राजनीति…[Read more]

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Rita Henriques

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Active 4 years ago