• यह आलेख भारतीय साहित्य में उभर रही बहुजन अवधारणा को रेखांकित करता है।
    इस लेख में बताया गया है कि “बहुजन साहित्य का अर्थ है– अभिजन के विपरीत बहुजन का साहित्य और उनकी वैचारिकी। प्रगतिशील- मार्क्सवादी विचारधारा में जो ‘जन’ है, ‘बहुजन’ उसकी अगली कड़ी भी है। मार्क्सवाद के ‘जन’ का अर्थ भारत के सामाजिक-यथार्थ के संदर्भ में न सिर्फ अस्पष्ट और अनिश्…[Read more]

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Putri Novi Mariska

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