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Pramod Ranjan deposited कोरोना के संक्रामक आतंक को जरा ‘जूम’ करके देखें in the group
Science Studies and the History of Science on Humanities Commons 3 years agoकोरोना की आड़ में जो कुछ हुआ है, उस पर नजर रखना आवश्यक है। ऐसी अनेक छोटी-छोटी घटनाएं हैं, जिनकी ओर प्राय: हमारी नजर नहीं जाती। वैश्विक स्वास्थ्य बाजार के किंग पिन माने जाने बिल गेट्स इनमें से अधिकांश घटनाओं से आपको जुड़े हुए दिखाई देते हैं। ऐसा ही एक मामला वीडियो कॉलिंग की सर्विस देने वाले ‘जूम’ से संबंधित था।
वस्तुत: यह सब सिर्फ व्यापा…[Read more]
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Pramod Ranjan deposited समय से संवाद आवश्यक in the group
Literary theory on Humanities Commons 3 years agoप्रेमकुमार मणि की यह संपादकीय टिप्पणी पटना से प्रकाशित मासिक पत्रिका ‘जन विकल्प’ की साहित्य वार्षिकी, 2008 में प्रकाशित हुई थी। यह टिप्पणी ‘समय से संवाद’ पुस्तक में भी संकलित है।
जन विकल्प के संपादक प्रेमकुमार मणि और प्रमोद रंजन थे। -
Pramod Ranjan deposited हिंदी पट्टी में पेरियार in the group
Cultural Studies on Humanities Commons 3 years agoपेरियार के मूल तमिल लेखन का हिंदी अनुवाद उपलब्ध नहीं था, इस कारण उनकी वैचारिकी से हिंदी क्षेत्रों के दलित-बहुजन आंदोलन का उस तरह का सघन और सक्रिय रिश्ता विकसित नहीं हो था, जैसा कि डॉ. आम्बेडकर और बहुत हद तक जोतिराव फुले से हो सका है। इस कमी को प्रमोद रंजन द्वारा 2020 में संपादित पेरियार पर केंद्रित तीन पुस्तकों की ऋंखला ने पूरा किया। ये पु…[Read more]
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Pramod Ranjan deposited हिंदी साहित्येतिहास का बहुजन पक्ष in the group
Literary theory on Humanities Commons 3 years agoयह पुस्तक बहुजन साहित्य की अवधारणा पर केंद्रित है। यह अवधारणा सभी वंचित तबकों के साहित्य में उनकी सामाजिक पृष्ठभूमि के आधार पर साझेपन की तलाश करती है। किंतु, यह सामाजिक पृष्ठभूमि के साथ-साथ लेखक विचारों को भी संज्ञान में लेती है। इस प्रकार, बहुजन साहित्य भारतीय संदर्भ में दलित, आदिवासी, अन्य पिछड़ा वर्ग, पसमांदा मुसलमान, धुमंतू जाति…[Read more]
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