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Pramod Ranjan deposited बहुजन राजनीति की नई उम्मीद: जीतनराम मांझी in the group
History on Humanities Commons 3 years agoजीतन राम मांझी, एक भारतीय राजनेता और बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री हैं। वो राजनीतिक पार्टी जनता दल (यूनाइटेड) के नेता के तौर पर 23वें मुख्यमंत्री रहे। मांझी बिहार राज्य में दलित समुदाय के तीसरे मुख्यमंत्री रहे। 20 फरवरी 2015 को उन्होनें मुख्यमंत्री पद से इस्तीफ़ा दे दिया। यह पुस्तक उनके व्यक्तित्व और उनके कार्यों पर आधारित है।
बहुजन…[Read more] -
Pramod Ranjan deposited बहुजन राजनीति की नई उम्मीद: जीतनराम मांझी in the group
General Education on Humanities Commons 3 years agoजीतन राम मांझी, एक भारतीय राजनेता और बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री हैं। वो राजनीतिक पार्टी जनता दल (यूनाइटेड) के नेता के तौर पर 23वें मुख्यमंत्री रहे। मांझी बिहार राज्य में दलित समुदाय के तीसरे मुख्यमंत्री रहे। 20 फरवरी 2015 को उन्होनें मुख्यमंत्री पद से इस्तीफ़ा दे दिया। यह पुस्तक उनके व्यक्तित्व और उनके कार्यों पर आधारित है।
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Pramod Ranjan deposited Mahishasur A people’s hero in the group
Sociology on Humanities Commons 3 years agoThis is the English edition of the book ‘Mahishasur: Ek Jannayak’. The book searches for a hero who has been ever-present in the memories, traditions, festivals, and celebrations of a majority of the people of India but who the dominant culture of the country has given the image of a villain. Recently, the search for this people’s hero triggered a…[Read more]
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Pramod Ranjan deposited Mahishasur A people’s hero in the group
Philosophy of Religion on Humanities Commons 3 years agoThis is the English edition of the book ‘Mahishasur: Ek Jannayak’. The book searches for a hero who has been ever-present in the memories, traditions, festivals, and celebrations of a majority of the people of India but who the dominant culture of the country has given the image of a villain. Recently, the search for this people’s hero triggered a…[Read more]
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Pramod Ranjan deposited Mahishasur A people’s hero in the group
Festivals, Rituals, Public Spectacles, and Popular Culture on Humanities Commons 3 years agoThis is the English edition of the book ‘Mahishasur: Ek Jannayak’. The book searches for a hero who has been ever-present in the memories, traditions, festivals, and celebrations of a majority of the people of India but who the dominant culture of the country has given the image of a villain. Recently, the search for this people’s hero triggered a…[Read more]
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Pramod Ranjan deposited Mahishasur A people’s hero in the group
Cultural Studies on Humanities Commons 3 years agoThis is the English edition of the book ‘Mahishasur: Ek Jannayak’. The book searches for a hero who has been ever-present in the memories, traditions, festivals, and celebrations of a majority of the people of India but who the dominant culture of the country has given the image of a villain. Recently, the search for this people’s hero triggered a…[Read more]
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Pramod Ranjan deposited Mahishasur A people’s hero in the group
Arts and Culture for Global Development on Humanities Commons 3 years agoThis is the English edition of the book ‘Mahishasur: Ek Jannayak’. The book searches for a hero who has been ever-present in the memories, traditions, festivals, and celebrations of a majority of the people of India but who the dominant culture of the country has given the image of a villain. Recently, the search for this people’s hero triggered a…[Read more]
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Pramod Ranjan deposited पेरियार के प्रतिनिधि विचार in the group
Sociology on Humanities Commons 3 years agoहिंदी में पेरियार का मूल लेखन और जीवनी उपलब्ध नहीं थी। सामाजिक आंदोलनों व अकादमियों में जो नई हिंदी भाषी पीढ़ी आई है, वह ‘नास्तिक पेरियार’ से तो खूब परिचित है और उनके प्रति उसमें जबर्दस्त आकर्षण भी है, लेकिन यह पीढ़ी उनके विचारों के बारे में कुछ सुनी-सुनाई, आधी-अधूरी बातें ही जानती है। वस्तुतः उसने पेरियार को पढ़ा नहीं है।
उनकी ‘द…[Read more] -
Pramod Ranjan deposited पेरियार के प्रतिनिधि विचार in the group
Philosophy of Religion on Humanities Commons 3 years agoहिंदी में पेरियार का मूल लेखन और जीवनी उपलब्ध नहीं थी। सामाजिक आंदोलनों व अकादमियों में जो नई हिंदी भाषी पीढ़ी आई है, वह ‘नास्तिक पेरियार’ से तो खूब परिचित है और उनके प्रति उसमें जबर्दस्त आकर्षण भी है, लेकिन यह पीढ़ी उनके विचारों के बारे में कुछ सुनी-सुनाई, आधी-अधूरी बातें ही जानती है। वस्तुतः उसने पेरियार को पढ़ा नहीं है।
उनकी ‘द…[Read more] -
Pramod Ranjan deposited पेरियार के प्रतिनिधि विचार in the group
Festivals, Rituals, Public Spectacles, and Popular Culture on Humanities Commons 3 years agoहिंदी में पेरियार का मूल लेखन और जीवनी उपलब्ध नहीं थी। सामाजिक आंदोलनों व अकादमियों में जो नई हिंदी भाषी पीढ़ी आई है, वह ‘नास्तिक पेरियार’ से तो खूब परिचित है और उनके प्रति उसमें जबर्दस्त आकर्षण भी है, लेकिन यह पीढ़ी उनके विचारों के बारे में कुछ सुनी-सुनाई, आधी-अधूरी बातें ही जानती है। वस्तुतः उसने पेरियार को पढ़ा नहीं है।
उनकी ‘द…[Read more] -
Pramod Ranjan deposited पेरियार के प्रतिनिधि विचार in the group
Cultural Studies on Humanities Commons 3 years agoहिंदी में पेरियार का मूल लेखन और जीवनी उपलब्ध नहीं थी। सामाजिक आंदोलनों व अकादमियों में जो नई हिंदी भाषी पीढ़ी आई है, वह ‘नास्तिक पेरियार’ से तो खूब परिचित है और उनके प्रति उसमें जबर्दस्त आकर्षण भी है, लेकिन यह पीढ़ी उनके विचारों के बारे में कुछ सुनी-सुनाई, आधी-अधूरी बातें ही जानती है। वस्तुतः उसने पेरियार को पढ़ा नहीं है।
उनकी ‘द…[Read more] -
Pramod Ranjan deposited धर्म और विश्वदृष्टि- पेरियार ई. वी. रामासामी in the group
Sociology on Humanities Commons 3 years agoयह किताब ई.वी. रामासामी नायकर ‘पेरियार’ (17 सितम्बर, 1879—24 दिसम्बर, 1973) के दार्शनिक व्यक्तित्व से परिचित कराती है। धर्म, ईश्वर और मानव समाज का भविष्य उनके दार्शनिक चिन्तन का केन्द्रीय पहलू रहा है। उन्होंने मानव समाज के सन्दर्भ में धर्म और ईश्वर की भूमिका पर गहन चिन्तन-मनन किया है। इस चिन्तन-मनन के निष्कर्षों को इस किताब के विविध लेखों मे…[Read more]
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Pramod Ranjan deposited धर्म और विश्वदृष्टि- पेरियार ई. वी. रामासामी in the group
Philosophy of Religion on Humanities Commons 3 years agoयह किताब ई.वी. रामासामी नायकर ‘पेरियार’ (17 सितम्बर, 1879—24 दिसम्बर, 1973) के दार्शनिक व्यक्तित्व से परिचित कराती है। धर्म, ईश्वर और मानव समाज का भविष्य उनके दार्शनिक चिन्तन का केन्द्रीय पहलू रहा है। उन्होंने मानव समाज के सन्दर्भ में धर्म और ईश्वर की भूमिका पर गहन चिन्तन-मनन किया है। इस चिन्तन-मनन के निष्कर्षों को इस किताब के विविध लेखों मे…[Read more]
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Pramod Ranjan deposited धर्म और विश्वदृष्टि- पेरियार ई. वी. रामासामी in the group
History on Humanities Commons 3 years agoयह किताब ई.वी. रामासामी नायकर ‘पेरियार’ (17 सितम्बर, 1879—24 दिसम्बर, 1973) के दार्शनिक व्यक्तित्व से परिचित कराती है। धर्म, ईश्वर और मानव समाज का भविष्य उनके दार्शनिक चिन्तन का केन्द्रीय पहलू रहा है। उन्होंने मानव समाज के सन्दर्भ में धर्म और ईश्वर की भूमिका पर गहन चिन्तन-मनन किया है। इस चिन्तन-मनन के निष्कर्षों को इस किताब के विविध लेखों मे…[Read more]
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Pramod Ranjan deposited धर्म और विश्वदृष्टि- पेरियार ई. वी. रामासामी in the group
Festivals, Rituals, Public Spectacles, and Popular Culture on Humanities Commons 3 years agoयह किताब ई.वी. रामासामी नायकर ‘पेरियार’ (17 सितम्बर, 1879—24 दिसम्बर, 1973) के दार्शनिक व्यक्तित्व से परिचित कराती है। धर्म, ईश्वर और मानव समाज का भविष्य उनके दार्शनिक चिन्तन का केन्द्रीय पहलू रहा है। उन्होंने मानव समाज के सन्दर्भ में धर्म और ईश्वर की भूमिका पर गहन चिन्तन-मनन किया है। इस चिन्तन-मनन के निष्कर्षों को इस किताब के विविध लेखों मे…[Read more]
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Pramod Ranjan deposited धर्म और विश्वदृष्टि- पेरियार ई. वी. रामासामी in the group
Cultural Studies on Humanities Commons 3 years agoयह किताब ई.वी. रामासामी नायकर ‘पेरियार’ (17 सितम्बर, 1879—24 दिसम्बर, 1973) के दार्शनिक व्यक्तित्व से परिचित कराती है। धर्म, ईश्वर और मानव समाज का भविष्य उनके दार्शनिक चिन्तन का केन्द्रीय पहलू रहा है। उन्होंने मानव समाज के सन्दर्भ में धर्म और ईश्वर की भूमिका पर गहन चिन्तन-मनन किया है। इस चिन्तन-मनन के निष्कर्षों को इस किताब के विविध लेखों मे…[Read more]
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Pramod Ranjan deposited महिषासुर एक जननायक in the group
Religious Studies on Humanities Commons 3 years agoप्रमोद रंजन द्वारा संपादित पुस्तक “महिषासुर एक जननायक” का उद्देश्य यह स्पष्ट करना है कि आखिर महिषासुर नाम से शुरू किया गया यह आन्दोलन है क्या? इसकी आवश्यकता क्यों पड़ी? इसके निहितार्थ क्या हैं? इस पुस्तक में प्रश्न उठाया गया है कि जब असुर एक प्रजाति है तो उसकी हार या उसके नायक की ह्त्या का उत्सव किस सांस्कृतिक मनोवृत्ति का परिचायक…[Read more]
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Pramod Ranjan deposited महिषासुर एक जननायक in the group
History on Humanities Commons 3 years agoप्रमोद रंजन द्वारा संपादित पुस्तक “महिषासुर एक जननायक” का उद्देश्य यह स्पष्ट करना है कि आखिर महिषासुर नाम से शुरू किया गया यह आन्दोलन है क्या? इसकी आवश्यकता क्यों पड़ी? इसके निहितार्थ क्या हैं? इस पुस्तक में प्रश्न उठाया गया है कि जब असुर एक प्रजाति है तो उसकी हार या उसके नायक की ह्त्या का उत्सव किस सांस्कृतिक मनोवृत्ति का परिचायक…[Read more]
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Pramod Ranjan deposited महिषासुर एक जननायक in the group
General Education on Humanities Commons 3 years agoप्रमोद रंजन द्वारा संपादित पुस्तक “महिषासुर एक जननायक” का उद्देश्य यह स्पष्ट करना है कि आखिर महिषासुर नाम से शुरू किया गया यह आन्दोलन है क्या? इसकी आवश्यकता क्यों पड़ी? इसके निहितार्थ क्या हैं? इस पुस्तक में प्रश्न उठाया गया है कि जब असुर एक प्रजाति है तो उसकी हार या उसके नायक की ह्त्या का उत्सव किस सांस्कृतिक मनोवृत्ति का परिचायक…[Read more]
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Pramod Ranjan deposited महिषासुर एक जननायक in the group
Festivals, Rituals, Public Spectacles, and Popular Culture on Humanities Commons 3 years agoप्रमोद रंजन द्वारा संपादित पुस्तक “महिषासुर एक जननायक” का उद्देश्य यह स्पष्ट करना है कि आखिर महिषासुर नाम से शुरू किया गया यह आन्दोलन है क्या? इसकी आवश्यकता क्यों पड़ी? इसके निहितार्थ क्या हैं? इस पुस्तक में प्रश्न उठाया गया है कि जब असुर एक प्रजाति है तो उसकी हार या उसके नायक की ह्त्या का उत्सव किस सांस्कृतिक मनोवृत्ति का परिचायक…[Read more]
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