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Pramod Ranjan deposited टिप्पणियों के खिलाफ एक लंबी टिप्पणी in the group
Literary theory on Humanities Commons 2 years, 11 months agoयह एक संस्मरणात्मक ललित निबंध है। इसमें बिहार के कथाकार व राजनेता जाबिर हुसेन, रामधारी सिंह दिवाकर और प्रमोद रंजन के बीच साहित्यिक रचना की स्वायत्तता को लेकर हुए विमर्श का प्रसंग है। लेखक का तर्क है किसी साहित्यिक रचना में उसकी पृष्ठभूमि के उल्लेख से उसकी स्वायत्तता भंग होती है और वह रचना के पूर्ण आस्वाद में बाधक होती है।
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Pramod Ranjan deposited टिप्पणियों के खिलाफ एक लंबी टिप्पणी in the group
Literary Journalism on Humanities Commons 2 years, 11 months agoयह एक संस्मरणात्मक ललित निबंध है। इसमें बिहार के कथाकार व राजनेता जाबिर हुसेन, रामधारी सिंह दिवाकर और प्रमोद रंजन के बीच साहित्यिक रचना की स्वायत्तता को लेकर हुए विमर्श का प्रसंग है। लेखक का तर्क है किसी साहित्यिक रचना में उसकी पृष्ठभूमि के उल्लेख से उसकी स्वायत्तता भंग होती है और वह रचना के पूर्ण आस्वाद में बाधक होती है।
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Pramod Ranjan deposited राणा बैनर्जी: नया नहीं इस जीवन में मरना in the group
Sociology on Humanities Commons 2 years, 11 months agoप्रमोद रंजन इस लेख के माध्यम से सामाजिक कार्यकर्ता राणा बैनर्जी के बहुमुखी प्रतिभा को सामने लाते हैं। पटना के संस्कृतिकर्मी राणा बैनर्जी ने वर्ष 2008 में गंगा में कूदकर आत्महत्या कर लिया था। जब कवि और लेखक आत्महत्या करने लगे तो यह समझ लेना चाहिए कि देश पर, समाज पर गहरा संकट आनेवाला है। आत्महत्या स्वजनित नहीं होती अपितु परिस्थितिजन्य होती है…[Read more]
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Pramod Ranjan deposited राणा बैनर्जी: नया नहीं इस जीवन में मरना in the group
Philosophy of Religion on Humanities Commons 2 years, 11 months agoप्रमोद रंजन इस लेख के माध्यम से सामाजिक कार्यकर्ता राणा बैनर्जी के बहुमुखी प्रतिभा को सामने लाते हैं। पटना के संस्कृतिकर्मी राणा बैनर्जी ने वर्ष 2008 में गंगा में कूदकर आत्महत्या कर लिया था। जब कवि और लेखक आत्महत्या करने लगे तो यह समझ लेना चाहिए कि देश पर, समाज पर गहरा संकट आनेवाला है। आत्महत्या स्वजनित नहीं होती अपितु परिस्थितिजन्य होती है…[Read more]
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Pramod Ranjan deposited राणा बैनर्जी: नया नहीं इस जीवन में मरना in the group
General Education on Humanities Commons 2 years, 11 months agoप्रमोद रंजन इस लेख के माध्यम से सामाजिक कार्यकर्ता राणा बैनर्जी के बहुमुखी प्रतिभा को सामने लाते हैं। पटना के संस्कृतिकर्मी राणा बैनर्जी ने वर्ष 2008 में गंगा में कूदकर आत्महत्या कर लिया था। जब कवि और लेखक आत्महत्या करने लगे तो यह समझ लेना चाहिए कि देश पर, समाज पर गहरा संकट आनेवाला है। आत्महत्या स्वजनित नहीं होती अपितु परिस्थितिजन्य होती है…[Read more]
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Pramod Ranjan deposited Hindutva’s Latest Avatar Exit Ram, Enter Krishna on Humanities Commons 2 years, 11 months ago
After Ram, Krishna will come under attack from Hindutva forces in India. Hindutva organizations are active in this direction. This article, published in February 2012, explains how the background has been created through the court’s decision.
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Pramod Ranjan deposited हिंदुत्व का नया अवतार: गए राम, आए कृष्ण on Humanities Commons 2 years, 11 months ago
भारत की हिंदुत्ववादी ताकतों के निशाने पर राम के बाद कृष्ण आएंगे। अनेक संगठन इसके लिए सक्रिय हैं। फरवरी, 2012 में प्रकाशित इस लेख में बताया गया है कि किस प्रकार न्यायालय के फैसले के जरिए इसकी पृष्ठभूमि बनाई गई है।
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Pramod Ranjan deposited बिहार की पत्रकारिता में जाति की सडांध पर सर्वे on Humanities Commons 2 years, 11 months ago
प्रमोद रंजन और उनकी टीम द्वारा वर्ष 2009 में किए गए सर्वेक्षण में पाया गया था कि बिहार की पत्रकारिता में फैसला लेने वालों पदों पर एक भी दलित, पिछड़ा, आदिवासी नहीं है। फैसला लेने वाले पदों पर स्त्रियों की भागीदारी भी शून्य है। इस सर्वेक्षण में प्रिंट व इलेक्ट्रॉनिक दोनों माध्यमों को लिया गया था तथा इसमें हिंदी, अंग्रेजी और उर्दू के मीडिया संस…[Read more]
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यह लेख अप्रैल, 2011 के अंत में लिखा गया था। उस समय अन्ना हजारे भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन चरम पर था। इस लेख में इस आंदोलन के दलित-बहुजन विरोधी चरित्र को उजागर किया गया है।
लेख में बताया गया है कि किन कारणों से कॉरपोरेट घराने इस आंदोलन के समर्थक थे और किस प्रकार इसके मूल में लोकतंत्र की अवमानना निहित थी।
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Pramod Ranjan deposited सोशल मीडिया, बिहार की सत्ता और निलंबन on Humanities Commons 2 years, 11 months ago
16 सितबर, 2011 को बिहार विधान परिषद् ने अपने दो कर्मचारियों- अरुण नारायण और मुसाफिर बैठा निलंबित कर दिया था। उन पर आरोप था कि उन्होंने परिषद् सभापति के निर्णय पर अपने एक फेसबुक पोस्ट में सवाल उठाया था। इससे पहले परिषद् ने अपने एक और कर्मचारी सैयद जावेद हुसेन को भी नौकरी से बर्खास्त कर दिया था।
यह टिप्प्णी इसी संदर्भ में है। -
Pramod Ranjan deposited गीता हिंदू धर्मग्रंथ नहीं, भारतीय दर्शन है! on Humanities Commons 2 years, 11 months ago
मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने 27 जनवरी, 2012 के अपने फैसले में राज्य की भाजपा सरकार द्वारा स्कूलों में ‘गीता सार’ पढ़ाए जाने को उचित ठहराते हुए कहा था कि गीता हिंदू धर्म ग्रंथ नहीं, बल्कि भारतीय दर्शन है। यह टिप्पणी उसी संदर्भ में है।
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Pramod Ranjan deposited Gita: Indian Philosophy, Not a Scripture! on Humanities Commons 2 years, 11 months ago
On 27 January, 2012 Justices Ajit Singh and Sanjay Yadav of the Madhya Pradesh High Court in Jabalpur while approving the decision of the BJP government to teach “the essence of Gita” in the schools said that Gita is not merely a religious text. It is Indian philosophy. Therefore, it is not inappropriate to teach it in schools.
Forces that sup…[Read more]
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Pramod Ranjan deposited टिप्पणियों के खिलाफ एक लंबी टिप्पणी on Humanities Commons 2 years, 11 months ago
यह एक संस्मरणात्मक ललित निबंध है। इसमें बिहार के कथाकार व राजनेता जाबिर हुसेन, रामधारी सिंह दिवाकर और प्रमोद रंजन के बीच साहित्यिक रचना की स्वायत्तता को लेकर हुए विमर्श का प्रसंग है। लेखक का तर्क है किसी साहित्यिक रचना में उसकी पृष्ठभूमि के उल्लेख से उसकी स्वायत्तता भंग होती है और वह रचना के पूर्ण आस्वाद में बाधक होती है।
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Pramod Ranjan deposited राणा बैनर्जी: नया नहीं इस जीवन में मरना on Humanities Commons 2 years, 11 months ago
प्रमोद रंजन, सामाजिक कार्यकर्ता राणा बैनर्जी के बहुमुखी प्रतिभा को इस लेख के माध्यम से सामने लाते हैं। राणा बैनर्जी ने आत्महत्या कर लिया था। जब कवि और लेखक आत्महत्या करने लगे तो यह समझ लेना चाहिए कि देश पर, समाज पर गहरा संकट आनेवाला है। आत्महत्या स्वजनित नहीं होती अपितु परिस्थितिजन्य होती है। रंजन यह बताते है कि बेईमान आदमी कभी आत्महत्या नहीं कर सकता।
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Pramod Ranjan deposited बिहारी अस्मिता: शहीद बनाने का खेल in the group
Sociology on Humanities Commons 2 years, 11 months ago27 अक्टूबर, 2008 को एक बिहारी नवयुवक राहुल राज की मुंबई पुलिस ने हत्या कर दी थी। इसके बाद बिहार में युवाओं ने व्यापक आंदोलन किया था। कई जगहों पर तोड़फोड़ और आगजनी की घटनाएं हुईं थीं। कई दिनों तक राजधानी पटना ठप रही थी। इस संबंध में आरोप-प्रत्यारोप की लंबी राजनीति चली थी और राहुल राज को बिहारी अस्मिता के प्रतीक के रूप में देखा गया था। इ…[Read more]
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Pramod Ranjan deposited बिहारी अस्मिता: शहीद बनाने का खेल in the group
General Education on Humanities Commons 2 years, 11 months ago27 अक्टूबर, 2008 को एक बिहारी नवयुवक राहुल राज की मुंबई पुलिस ने हत्या कर दी थी। इसके बाद बिहार में युवाओं ने व्यापक आंदोलन किया था। कई जगहों पर तोड़फोड़ और आगजनी की घटनाएं हुईं थीं। कई दिनों तक राजधानी पटना ठप रही थी। इस संबंध में आरोप-प्रत्यारोप की लंबी राजनीति चली थी और राहुल राज को बिहारी अस्मिता के प्रतीक के रूप में देखा गया था। इ…[Read more]
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Pramod Ranjan deposited बिहारी अस्मिता: शहीद बनाने का खेल in the group
Cultural Studies on Humanities Commons 2 years, 11 months ago27 अक्टूबर, 2008 को एक बिहारी नवयुवक राहुल राज की मुंबई पुलिस ने हत्या कर दी थी। इसके बाद बिहार में युवाओं ने व्यापक आंदोलन किया था। कई जगहों पर तोड़फोड़ और आगजनी की घटनाएं हुईं थीं। कई दिनों तक राजधानी पटना ठप रही थी। इस संबंध में आरोप-प्रत्यारोप की लंबी राजनीति चली थी और राहुल राज को बिहारी अस्मिता के प्रतीक के रूप में देखा गया था। इ…[Read more]
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Pramod Ranjan deposited किन्नौर में बौद्ध धर्म, जाति प्रथा और राजनीति in the group
Religious Studies on Humanities Commons 2 years, 11 months agoखूबसूरत प्राकृतिक दृश्यों से परिपूर्ण किन्नौर का समाज व संस्कृति शेष भारत से अलग है। यह बौद्ध धर्म का इलाका है, जिसे हिंदूवादी संस्कृति लीलती जा रही है। आर्थिक संपन्नता के आगमन से जाति-आधारित उत्पीड़न और भेदभाव कम हो रहा है। प्रमोद रंजन ने इस यात्रा संस्मरण में किन्नौर की विशिष्ट संस्कृति, बहु पत्नी प्रथा, वहां के समाज और राजनीति…[Read more]
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Pramod Ranjan deposited किन्नौर में बौद्ध धर्म, जाति प्रथा और राजनीति in the group
Cultural Studies on Humanities Commons 2 years, 11 months agoखूबसूरत प्राकृतिक दृश्यों से परिपूर्ण किन्नौर का समाज व संस्कृति शेष भारत से अलग है। यह बौद्ध धर्म का इलाका है, जिसे हिंदूवादी संस्कृति लीलती जा रही है। आर्थिक संपन्नता के आगमन से जाति-आधारित उत्पीड़न और भेदभाव कम हो रहा है। प्रमोद रंजन ने इस यात्रा संस्मरण में किन्नौर की विशिष्ट संस्कृति, बहु पत्नी प्रथा, वहां के समाज और राजनीति…[Read more]
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Pramod Ranjan deposited किन्नौर में बौद्ध धर्म, जाति प्रथा और राजनीति in the group
Buddhist Studies on Humanities Commons 2 years, 11 months agoखूबसूरत प्राकृतिक दृश्यों से परिपूर्ण किन्नौर का समाज व संस्कृति शेष भारत से अलग है। यह बौद्ध धर्म का इलाका है, जिसे हिंदूवादी संस्कृति लीलती जा रही है। आर्थिक संपन्नता के आगमन से जाति-आधारित उत्पीड़न और भेदभाव कम हो रहा है। प्रमोद रंजन ने इस यात्रा संस्मरण में किन्नौर की विशिष्ट संस्कृति, बहु पत्नी प्रथा, वहां के समाज और राजनीति…[Read more]
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