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Pramod Ranjan deposited मौत, अकाल की आहट और आर्थिक असमानता पर चुप्पी क्यों? in the group
Public Humanities on Humanities Commons 2 years, 8 months ago भारत में क्या हालत हो चुकी है, इसका अनुमान दिसंबर, 2020 में हुए एक सर्वेक्षण से लगता है। इस सर्वेक्षण के अनुसार भारत की आधी से अधिक आबादी को कोरोना-काल में पहले की तुलना में कम भोजन मिल रहा है। इनमें ज़्यादातर दलित और आदिवासी हैं। लेकिन इन सूचनाओं से भी अधिक भयावह यह है कि भारत का बौद्धिक वर्ग, ग़रीबों के सर पर मँडराते मौत के इस साये से प्राय: निरपेक्ष है। भारतीय मीडिया, सोशल मीडिया व शहरी पब्लिक स्फीयर्स में ग़रीबों की सड़ती हुई लाशों की बदबू नहीं पहुँच रही है। संभवत: सदियों से मौजूद सामाजिक असमानता की हमारी विरासत ने भूमंडलीकरण के दौर में आर्थिक असमानता और सामाजिक-अलगाव की खाइयों को इतना चौड़ा कर दिया है कि हम एक-दूसरे से पूरी तरह अलग-थलग व बेज़ार बने रह सकते हैं।