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Pramod Ranjan deposited भिक्खु बोधानंद और बहुजन सांस्कृति आंदोलन on Humanities Commons 2 years, 11 months ago
यह “महिषासुर: एक जननायक” पुस्तक के दूसरे संस्करण में प्रकाशित भूमिका है। इस किताब का पहला संस्करण जून, 2016 में आया। यह अक्टूबर, 2016 में पुर्नमुद्रित हुई और नवंबर, 2017 में नए ISBN नंबर के साथ दूसरा संस्करण प्रकाशित हुआ। तब से अब तक यह पुस्तक कई बार पुनर्मुद्रित हो चुकी है। पहले संस्करण के कई लेख पहले पुनमुर्द्रण और दूसरे संस्करण में हटा दिए गए थे और कुछ नए लेख जोड़े गए थे।
इस भूमिका महिषासुर के नाम से शुरु हुए आंदोलन की सार्थकता और प्रासंगिकता पर विचार करते हुए कहा गया है कि इसकी कड़ियां सांस्कृतिक और सामाजिक वर्चस्व का प्रतिरोध करने वाली गौरवशाली बहुजन परंपरा से जुड़ती है।