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Pramod Ranjan deposited पेरियार के प्रतिनिधि विचार in the group
Cultural Studies on Humanities Commons 3 years agoहिंदी में पेरियार का मूल लेखन और जीवनी उपलब्ध नहीं थी। सामाजिक आंदोलनों व अकादमियों में जो नई हिंदी भाषी पीढ़ी आई है, वह ‘नास्तिक पेरियार’ से तो खूब परिचित है और उनके प्रति उसमें जबर्दस्त आकर्षण भी है, लेकिन यह पीढ़ी उनके विचारों के बारे में कुछ सुनी-सुनाई, आधी-अधूरी बातें ही जानती है। वस्तुतः उसने पेरियार को पढ़ा नहीं है।
उनकी ‘द…[Read more] -
Pramod Ranjan deposited धर्म और विश्वदृष्टि- पेरियार ई. वी. रामासामी in the group
Cultural Studies on Humanities Commons 3 years agoयह किताब ई.वी. रामासामी नायकर ‘पेरियार’ (17 सितम्बर, 1879—24 दिसम्बर, 1973) के दार्शनिक व्यक्तित्व से परिचित कराती है। धर्म, ईश्वर और मानव समाज का भविष्य उनके दार्शनिक चिन्तन का केन्द्रीय पहलू रहा है। उन्होंने मानव समाज के सन्दर्भ में धर्म और ईश्वर की भूमिका पर गहन चिन्तन-मनन किया है। इस चिन्तन-मनन के निष्कर्षों को इस किताब के विविध लेखों मे…[Read more]
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Pramod Ranjan deposited महिषासुर एक जननायक in the group
Cultural Studies on Humanities Commons 3 years agoप्रमोद रंजन द्वारा संपादित पुस्तक “महिषासुर एक जननायक” का उद्देश्य यह स्पष्ट करना है कि आखिर महिषासुर नाम से शुरू किया गया यह आन्दोलन है क्या? इसकी आवश्यकता क्यों पड़ी? इसके निहितार्थ क्या हैं? इस पुस्तक में प्रश्न उठाया गया है कि जब असुर एक प्रजाति है तो उसकी हार या उसके नायक की ह्त्या का उत्सव किस सांस्कृतिक मनोवृत्ति का परिचायक…[Read more]
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Pramod Ranjan deposited महिषासुर मिथक व परंपराएं in the group
Cultural Studies on Humanities Commons 3 years agoमहिषासुर से संबंधित बहुजन समाज के मिथकों व परंपराओं , पौराणिक मिथकों और आधुनिक युग में गढे़ गए मिथकों के अर्थों को खोलने वाली इस पुस्तक का संपादक प्रमोद रंजन ने किया है। इस पुस्तक में पहली बार महिषासुर शहादत/स्मरण दिवस की विस्तृत सैद्धांतिकी भी प्रस्तुत की गई है तथा इस संबंध में उठने वालो सभी सवालों के उत्तर प्रस्तुत किये गये हैं।…[Read more]
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Pramod Ranjan deposited समय से संवाद: जन विकल्प संचयिता in the group
Cultural Studies on Humanities Commons 3 years ago‘समय से संवाद: जनविकल्प संचयिता’ नाम यह पुस्तक हिंदी मासिक ‘जन विकल्प’ में प्रकाशित प्रतिनिधि सामग्री का संकलन है। प्रेमकुमार मणि और प्रमोद रंजन के संपादन में पटना से वर्ष 2007 में प्रकाशित इस पत्रिका की जनपक्षधरता, निष्पक्षता और मौलिक त्वरा ने समाजकर्मियों और बुद्धिजीवियों को गहराई से आलोड़ित किया था। इस पुस्तक में जिन लेखों और साक्षात्कारों…[Read more]
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Pramod Ranjan deposited भारत के राजनेता: अली अनवर in the group
Cultural Studies on Humanities Commons 3 years ago‘भारत के राजनेता’ शीर्षक शृंखला की यह किताब भारत में पसमांदा आन्दोलन के सूत्रधार तथा राज्यसभा सांसद ‘अली अनवर’ की संसदीय सहभागिता और संसद में सामाजिक-राजनीतिक मुद्दों पर उनकी पहलों पर केंद्रित है। संसद में विविध मसलों पर उनके वक्तव्यों, दर्ज भाषणों, हस्तक्षेपों, स्पेशल मेंशन तथा साक्षात्कार के माध्यम से उनके सरोकारों को समझने की गंभीर कोशिश य…[Read more]
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Christopher Griffin started the topic CfP: On Relationalities: Politics, Narrative, Sociality in the discussion
Gender Studies on Humanities Commons 3 years agoOn Relationalities: Politics, Narrative, Sociality
A one-day hybrid symposium to be hosted by the Centre for Applied Philosophy, Politics and Ethics (CAPPE) at the University of Brighton (UK).
Date: Wednesday 5 April 2023
Location: University of Brighton, City Campus, M2, and online
Keynote speaker: Dr Leticia Sabsay (LSE)
Deadline…[Read more]
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Pramod Ranjan deposited हिंदी कविता में संताल परगना का चेहरा in the group
Gender Studies on Humanities Commons 3 years, 1 month agoयह लेख संथाली मूल की आदिवासी कवयित्री निर्मला पुतुल की कविताओं पर केंद्रित है।
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Pramod Ranjan deposited बहुजन साहित्य की प्रस्तावना in the group
Cultural Studies on Humanities Commons 3 years, 1 month agoयह पुस्तक मूल रूप से हिंदी में वर्ष 2016 में ‘बहुजन साहित्य की प्रस्तावना’ शीर्षक से प्रकाशित हुई थी। उसका यह अंग्रेजी अनुवाद भी उसी वर्ष प्रकाशित हुआ था। यह किताब हिन्दी और भारतीय भाषाओं में बहुजन साहित्य की अवधारणा पर विमर्श प्रस्तुत करती है। एक ओर यह किताब हिंदी साहित्य में हो रहे बदलावों पर नजर रखती है दूसरी ओर मंडल कमीशन के लागू होने के बाद ब…[Read more]
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Pramod Ranjan deposited हिंदी साहित्येतिहास का बहुजन पक्ष in the group
Gender Studies on Humanities Commons 3 years, 1 month agoइस पुस्तक में बहुजन साहित्य की अवधारणा की आवश्यकता को रेखांकित किया गया है। बहुजन साहित्य की अवधारणा का पैमाना लेखक का कुल लेखकीय-वैचारिक अवदान है। इसलिए द्विज समुदाय से आने वाले ऐसे लेखकों के लिए भी इसमें स्थान है, जिनकी दृढ पक्षधरता इन वंचित तबकों के प्रति हो। जैसा कि हम फारवर्ड प्रेस में कहते आए हैं कि यह अवधारणा उस व…[Read more]
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Pramod Ranjan deposited हिंदी साहित्येतिहास का बहुजन पक्ष in the group
Cultural Studies on Humanities Commons 3 years, 1 month agoइस पुस्तक में बहुजन साहित्य की अवधारणा की आवश्यकता को रेखांकित किया गया है। बहुजन साहित्य की अवधारणा का पैमाना लेखक का कुल लेखकीय-वैचारिक अवदान है। इसलिए द्विज समुदाय से आने वाले ऐसे लेखकों के लिए भी इसमें स्थान है, जिनकी दृढ पक्षधरता इन वंचित तबकों के प्रति हो। जैसा कि हम फारवर्ड प्रेस में कहते आए हैं कि यह अवधारणा उस व…[Read more]
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Pramod Ranjan deposited भगाणा की निर्भयाएं in the group
Gender Studies on Humanities Commons 3 years, 1 month agoयह किताब बहुजन डाइवर्सिटी द्वारा 2007 से शुरू की गई भारत की ज्वलंत समस्याएं शृंखला की है। पुस्तक में समय समय पर उद्भव होने वाली कुछ ख़ास समस्याओं, जिनसे राष्ट्र का जीवन बुरी तरह प्रभावित होता है एवं जिन्हें मीडिया के अल्पकालिक प्रभाव के चलते लोग एक अंतराल के बाद विस्मृत कर समस्याओं के अम्बार में घिरे देश की दूसरी समस्याओं में खो जाते हैं, को यद…[Read more]
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Pramod Ranjan deposited भगाणा की निर्भयाएं in the group
Cultural Studies on Humanities Commons 3 years, 1 month agoयह किताब बहुजन डाइवर्सिटी द्वारा 2007 से शुरू की गई भारत की ज्वलंत समस्याएं शृंखला की है। पुस्तक में समय समय पर उद्भव होने वाली कुछ ख़ास समस्याओं, जिनसे राष्ट्र का जीवन बुरी तरह प्रभावित होता है एवं जिन्हें मीडिया के अल्पकालिक प्रभाव के चलते लोग एक अंतराल के बाद विस्मृत कर समस्याओं के अम्बार में घिरे देश की दूसरी समस्याओं में खो जाते हैं, को यद…[Read more]
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Pramod Ranjan deposited भारत के राजनेता: रामदास आठवले in the group
Cultural Studies on Humanities Commons 3 years, 1 month agoभारत के राजनेता शीर्षक शृंखला की यह किताब महाराष्ट्र के राजनेता, आरपीआई(अ) के राष्ट्रीय अध्यक्ष तथा राज्यसभा सांसद ‘रामदास आठवले’ की संसदीय सहभागिता और संसद में सामाजिक-राजनीतिक मुद्दों पर उनकी पहलों पर केंद्रित है। आठवले महाराष्ट्र में सामाजिक न्याय मंत्री के रूप में अपनी राजनीतिक पारी शुरू कर पिछले तीन दशक से राज्य और केंद्र की राजनीति में अप…[Read more]
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Pramod Ranjan deposited जाति व्यवस्था और पितृसत्ता: पेरियार ई. वी. रामासामी in the group
Gender Studies on Humanities Commons 3 years, 1 month agoजाति और पितृसत्ता ई. वी. रामासामी नायकर के चिंतन, लेखन और संघर्षों की केंद्रीय धुरी रही है। उनकी दृढ़ मान्यता थी कि इन दोनों के विनाश के बिना किसी आधुनिक समाज का निर्माण नहीं किया जा सकता है।
जाति और पितृसत्ता के संबंध में पेरियार क्या सोचते थे और क्यों वे इसके विनाश को आधुनिक भारत के निर्माण के लिए अपरिहार्य एवं अनिवार्य मानते थे? इन प्रश्नों…[Read more] -
Pramod Ranjan deposited सच्ची रामायण: पेरियार ई. वी. रामासामी in the group
Cultural Studies on Humanities Commons 3 years, 1 month agoसच्ची रामायण, पेरियार ई. वी. रामासामी की बहुचर्चित और सबसे विवादास्पद कृति रही है। पेरियार रामायण को एक राजनीतिक ग्रंथ मानते थे। उनका कहना था कि इसे दक्षिणवासी अनार्यों पर उत्तर के आर्यों की विजय और प्रभुत्व को जायज ठहराने के लिए लिखा गया और यह गैर-ब्राह्मणों पर ब्राह्मणों और महिलाओं पर पुरुषों के वर्चस्व का उपकरण है। यह किताब हिंदी में 1968में ‘स…[Read more]
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Pramod Ranjan deposited The Case For Bahujan Literature in the group
Cultural Studies on Humanities Commons 3 years, 1 month agoThis book was originally published in Hindi with the title ‘Bahujan Sahitya ki Prastavan” [Introduction to Bahujan Literature] in the year 2016. Its English translation was also published in the same year. This book presents a discussion on the concept of Bahujan literature in Hindi and Indian languages. On the one hand, this book monitors the…[Read more]
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Pramod Ranjan deposited हिमाचल का साहित्यिक परिदृश्य: शिमला डायरी in the group
Cultural Studies on Humanities Commons 3 years, 1 month agoशिमला डायरी हिंदी पत्रकार और लेखक प्रमोद रंजन के संस्मरणों की पुस्तक है, जिसका केंद्रबिंदु साहित्यिक गतिविधियां हैं। यह पुस्तक 21वीं सदी की शुरुआत में पत्रकारिता के नैतिक पतन की कहानी भी कहती है। हिमाचल प्रदेश पर केंद्रित इस पुस्तक में तत्कालीन राजनीति की भी झलक है।
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Muhammad Naeem deposited Discourse Analysis of Binary Thinking in Urdu Novel in the group
Cultural Studies on Humanities Commons 3 years, 1 month agoBinary thinking is a way of understanding the world around. It is used to oversimplify the complex situations and reality. Dichotomous way of thinking usually uses an innate hierarchy of the two objects or situations it makes binary of. Urdu Novel since its inception used binary opposites to foreground the characters it likes or dislikes. In this…[Read more]
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Joachim Berger deposited Regimes of territoriality. Overseas conflicts and inner-European relations, c. 1870–1930 in the group
Global & Transnational Studies on Humanities Commons 3 years, 1 month agoThis essay focuses on territorial conflicts between European masonic bodies outside Europe, and on the impact of these conflicts on inner-European masonic relations. The period between c. 1870 and c. 1930 marks the height of the European expansion respectively the age of ‘high imperialism’. It also marks the first wave of decolonization. The tid…[Read more]
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