• Spanish abstract: Comentario sobre algunas cuestiones éticas y metaficcionales en la película ‘Eva’ (dir. Kike Maíllo, 2011).

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    English abstract: A comment on some ethical and metafictional issues in the science-fiction film ‘Eva’ (dir. Kike Maíllo, 2011).

  • हिंदी कवि अरूण कमल से प्रमेाद रंजन की यह बातचीत पटना से प्रकाशित जन विकल्प के प्रवेशांक (जनवरी, 2007) में प्रकाशित हुई थी। साक्षात्कार के लिए अरुण कमल को प्रश्न साैंप दिए गए थे, जिसका उन्होंने लिखित उत्तर दिया था।

    इस साक्षात्कार में अरूण कमल ने जिन प्रश्नों के उत्तर दिए हैं, उनमें मुख्य निम्नांकित हैं :

    1. आपको २०वीं सदी के एक महत्वपूर्ण क…[Read more]

  • वर्ष 2007 में मधुर भंडारकर की फिल्म ‘ट्रैफिक सिग्नल’ आई थी। इस फिल्म में शहरों में हाशिए पर रहने वाली जिंदगियों का चित्रण था। फिल्म में छोटे-मोटे काम करने वाले, भीख मांग कर गुजारा करने वालों के साथ किन्नरों के त्रासद जीवन को भी दिखाया गया था। उस समय हिमाचल प्रदेश के कुछ लेखकों ने फिल्म में हिजड़ों को किन्नर कहने का का पुरजोर विरोध किया था। परिण…[Read more]

  • इस लेख में उपभोक्तावाद के सकारात्मक और नकारात्मक पहलुओं की चर्चा की गई है। लेख में बताया गया है कि उपभोक्तावाद परिवार की सामंती संरचना को तोड़ता है, तथा आधुनिक मूल्यों की स्थापना करता है। लेकिन इसके अनेक नकारात्मक पहलु भी हैं। इसके कारण कम आय वर्ग के परिवारों में पारंपरिक मूल्यों के ध्वस्त होने के कारण कई ऐसी दर्दनाक घटनाएं होती है…[Read more]

  • वर्ष 2022 में मेरे द्वारा संपादित ईवी रामसामी पेरियार के लेखों और भाषणों का संकलन हिंदी में पुस्तकाकार प्रकाशित होने पर एक लेखक ने कुछ ऐसे मुद्दों को लेकर विवाद खड़ा करने की कोशिश की थी, जिसका कोई आधार नहीं था। मैंने यह लेख उनके द्वारा इस संबंध में की गई टिप्पणी के उत्तर में लिखा गया था।

    इस लेख में मैंने बताने की कोशिश की है कि हिंदी के प्र…[Read more]

  • यह लेख उत्तर-मानववाद से संबंधित विमर्श से हिंदी पाठकों को परिचित करवाने के उद्देश्य से लिखा गया है।

    इस लेख में कहा गया है कि विकास केवल भौतिक-प्राकृतिक जगत में ही नहीं, विचारों के क्षेत्र में भी होता है। दुनिया लगातार बदल रही है, विकसित हो रही है। आज न हम कार्ल मार्क्स के ज़माने में हैं, न गांधी-आम्बेडकर-लोहिया के ज़माने में। आर्थिक-साम…[Read more]

  • En este artículo sobre teoría narrativa evolucionista releemos y comentamos algunos textos y nociones clave de la teoría de Charles Darwin, en el ‘Origen de las Especies’ y ‘El Origen del Hombre’, a la luz de la sociobiología cognitiva con…[Read more]

  • Pramod Ranjan wirft einen Blick aus Indien auf die Coronakrise und das wissenschaftliche Verständnis von der Welt, das oft erwähnt, aber meist ignoriert wird, sowie die Frage, wem das nutzt.

    Die übertriebene Angst vor Covid-19 hat die menschliche Zivilisation und Kultur in Gefahr gebracht. Die Richtung, in die sich die Menschheit bewegte, br…[Read more]

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Nuran Erol Işık

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