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Pramod Ranjan deposited हरियाणा का दलित आंदोलन और वेदपाल तंवर in the group
Sociology on Humanities Commons 2 years, 11 months ago21 अप्रैल 2010 की रात को हरियाणा के हिसार जिला के मिर्चपुर में दबंग जाट समुदाय ने दलितों की बस्ती में लगा दी थी। इस अग्निकांड में 70 साल के बुर्जुग और उनकी अपंग बेटी जिंदा जला दिया गया था। उसके बाद मिर्चपुर के दलितों को गांव छोड़कर भागना पड़ा था।
अध्येता प्रमोद रंजन ने जुलाई, 2012 में मिर्चपुर का दौरा किया। वे जिला मुख्यालय हिसार में मिर…[Read more]
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Pramod Ranjan deposited सच कहने का समय: सेना के भीतर युद्ध (भारतीय सेना में जातिवाद) in the group
Sociology on Humanities Commons 2 years, 11 months agoइस आलेख में बताया गया कि भारतीय सेना के सर्वोच्च पदों पहुंचने वाले लोग ऊंची जातियों से आते हैं। सेना में इनके भीतर जाति के आधार पर वचर्स्व की लड़ाई भी चलती रहती है। सन् 2012 में जनरल वीके सिंह से संबंधित विवाद इसी प्रकार के जाति-युद्ध का नतीजा था। सेना के सर्वोच्च स्तर पर मौजूद ये प्रवृत्तियां भारत की सुरक्षा के लिए खतरनाक हैं।
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Pramod Ranjan deposited Time for truth: War within the army (Casteism in Indian army) in the group
Sociology on Humanities Commons 2 years, 11 months agoPeople who reach the highest positions in the Indian Army come from the upper castes. In the army, the fight for supremacy also goes on within them on the basis of caste. In 2012, the controversy regarding General VK Singh was the result of a similar caste war. These trends at the highest level of the military are dangerous for India’s security.
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Pramod Ranjan deposited ओबीसी आरक्षण: क्या कांग्रेस पिछड़ों से छलावा कर रही है? in the group
Sociology on Humanities Commons 2 years, 11 months agoयह लेख जनवरी 2012 में द्विभाषी पत्रिका फारवर्ड प्रेस में प्रकाशित हुआ था। लेख में भारत में यूपीए की तत्कालीन सरकार की पिछड़ा वर्ग से संबंधित नीतियों की आलोचना की गई है। लेख में बताया गया है कि किस प्रकार कांग्रेस अन्य पिछड़ा वर्ग के निर्धारित आरक्षण को निर्मूल बनाने की कोशिश कर रहा है।
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Pramod Ranjan deposited OBC Reservation: Is Congress Conning OBCs in the group
Sociology on Humanities Commons 2 years, 11 months agoThis article was published in January 2012. The article criticized the policies of the then UPA government in India related to backward classes. The article describes how the Congress is trying to eradicate the prescribed reservation for the Other Backward Classes.
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Pramod Ranjan deposited बिहार की पत्रकारिता में जाति की सडांध पर सर्वे in the group
Sociology on Humanities Commons 2 years, 12 months agoप्रमोद रंजन और उनकी टीम द्वारा वर्ष 2009 में किए गए सर्वेक्षण में पाया गया था कि बिहार की पत्रकारिता में फैसला लेने वालों पदों पर एक भी दलित, पिछड़ा, आदिवासी नहीं है। फैसला लेने वाले पदों पर स्त्रियों की भागीदारी भी शून्य है। इस सर्वेक्षण में प्रिंट व इलेक्ट्रॉनिक दोनों माध्यमों को लिया गया था तथा इसमें हिंदी, अंग्रेजी और उर्दू के मीडिया संस…[Read more]
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Pramod Ranjan deposited मीडिया और अन्ना का आंदोलन in the group
Sociology on Humanities Commons 2 years, 12 months agoयह लेख अप्रैल, 2011 के अंत में लिखा गया था। उस समय अन्ना हजारे भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन चरम पर था। इस लेख में इस आंदोलन के दलित-बहुजन विरोधी चरित्र को उजागर किया गया है।
लेख में बताया गया है कि किन कारणों से कॉरपोरेट घराने इस आंदोलन के समर्थक थे और किस प्रकार इसके मूल में लोकतंत्र की अवमानना निहित थी।
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Pramod Ranjan deposited राणा बैनर्जी: नया नहीं इस जीवन में मरना in the group
Sociology on Humanities Commons 2 years, 12 months agoप्रमोद रंजन इस लेख के माध्यम से सामाजिक कार्यकर्ता राणा बैनर्जी के बहुमुखी प्रतिभा को सामने लाते हैं। पटना के संस्कृतिकर्मी राणा बैनर्जी ने वर्ष 2008 में गंगा में कूदकर आत्महत्या कर लिया था। जब कवि और लेखक आत्महत्या करने लगे तो यह समझ लेना चाहिए कि देश पर, समाज पर गहरा संकट आनेवाला है। आत्महत्या स्वजनित नहीं होती अपितु परिस्थितिजन्य होती है…[Read more]
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Pramod Ranjan deposited बिहारी अस्मिता: शहीद बनाने का खेल in the group
Sociology on Humanities Commons 2 years, 12 months ago27 अक्टूबर, 2008 को एक बिहारी नवयुवक राहुल राज की मुंबई पुलिस ने हत्या कर दी थी। इसके बाद बिहार में युवाओं ने व्यापक आंदोलन किया था। कई जगहों पर तोड़फोड़ और आगजनी की घटनाएं हुईं थीं। कई दिनों तक राजधानी पटना ठप रही थी। इस संबंध में आरोप-प्रत्यारोप की लंबी राजनीति चली थी और राहुल राज को बिहारी अस्मिता के प्रतीक के रूप में देखा गया था। इ…[Read more]
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Pramod Ranjan deposited स्वर कोकिला लता मंगेशकर के सामाजिक और राजनैतिक सरोकार in the group
Sociology on Humanities Commons 2 years, 12 months agoपार्श्व गायिका लता मंगेशकर ने लगभग सात दशकों तक भारतीय संगीत की दुनिया पर राज किया। उनके गाए गीत भारत में ही नहीं, पाकिस्तान, बांग्लादेश समेत कई देशों में पसंद किए जाते थे। इस लेख में उनके सामाजिक सरोकारों और राजनीतिक रुझानों की चर्चा की गई है। उनका वैचारिक जुड़ाव राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से था, जो कि अपनी नाजीवादी विचारधारा…[Read more]
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Pramod Ranjan deposited Afraid of Haryana’s Jat politics in the group
Sociology on Humanities Commons 2 years, 12 months agoOn May 21, 2012, more than 52 Dalit-backward families were forced to leave their village after a dispute with dominant caste people in Bhagana (Bhagana) village of Haryana. The dispute started with the removal of possession of Shamlat land. The dominant community had socially boycotted them. Two years after this incident, on March 23, 2014, 4…[Read more]
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Pramod Ranjan deposited हरियाणा की जाट राजनीति का डर in the group
Sociology on Humanities Commons 2 years, 12 months ago21 मई 2012 को हरियाणा के भगाना (भगाणा) गांव में दबंग जाति के लोगों से विवाद के बाद दलित-पिछड़े परिवारों के 52 से ज्यादा परिवारों को अपना गांव छोड़ने पर मजबूर होना पड़ा था। विवाद की शुरूआत शामलात जमीन पर कब्जा हटवाने को लेकर हुई थी। दबंग समुदाय ने उनका हुक्का पानी बंद कर दिया था। इस घटना के 2 साल बाद 23 मार्च 2014 को भगाना गांव की धानुक समुदाय की…[Read more]
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Pramod Ranjan deposited पत्रकार नवल किशोर को मिली धमकियों से संबंधित तथ्य in the group
Sociology on Humanities Commons 3 years agoजून, 2018 के पहले सप्ताह में फारवर्ड प्रेस के पत्रकार नवल किशोर कुमार फोन पर सैकडों लोगों ने जान से मारने की धमकियां दी थीं। उन्हें ये धमकियां रणवीर सेना के कुख्यात सुप्रीमो ब्रह्मेश्वर मुखिया के बारे में फेसबुक पोस्ट लिखने के कारण दी गईं थीं। फारवर्ड प्रेस के तत्कालीन प्रबंध संपादक प्रमोद रंजन का यह लेख उन धमकियों के संदर्भ में है।
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Pramod Ranjan deposited Threats issued to Naval Kishore Kumar: Setting the record straight in the group
Sociology on Humanities Commons 3 years agoForward Press is not a novice when it comes to getting threats. Our Hindi editor Naval Kishore Kumar, who is at the receiving end this time, is not only a journalist but also a sensitive poet. Brahmeshwar Mukhiya, on the other hand, is a synonym for terror and has shamed humanity.
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