• प्रेमकुमार मणि की यह संपादकीय टिप्पणी पटना से प्रकाशित मासिक पत्रिका ‘जन विकल्प’ की साहित्य वार्षिकी, 2008 में प्रकाशित हुई थी। यह टिप्पणी ‘समय से संवाद’ पुस्तक में भी संकलित है।
    जन विकल्प के संपादक प्रेमकुमार मणि और प्रमोद रंजन थे।

  • यह पुस्तक बहुजन साहित्य की अवधारणा पर केंद्रित है। यह अवधारणा सभी वंचित तबकों के साहित्य में उनकी सामाजिक पृष्ठभूमि के आधार पर साझेपन की तलाश करती है। किंतु, यह सामाजिक पृष्ठभूमि के साथ-साथ लेखक विचारों को भी संज्ञान में लेती है। इस प्रकार, बहुजन साहित्य भारतीय संदर्भ में दलित, आदिवासी, अन्य पिछड़ा वर्ग, पसमांदा मुसलमान, धुमंतू जाति…[Read more]

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Nadia Daniels-Moehle

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