• The article describes two accounts of Poland and the culture of its people. The first of these dates from 1784 and was written by the Marquis de Ségur, a French diplomat travelling to St Petersburg. The second, from 1840, was written by the Polish poet Adam Mickiewicz, at the time working as a professor at the Collège de France in Paris. I try t…[Read more]

  • इक्कसवीं सदी के दूसरे दशक में भारत में महिषासुर आंदोलन द्विज संस्कृति के लिए चुनौती बनकर उभरा। इसके माध्यम से आदिवासियों, पिछड़ों और दलितों के एक बड़े हिस्से ने अपनी सांस्कृतिक दावेदारी पेश की।

    लेकिन यह आंदोलन क्या है, इसकी जड़ें समाज में कहां तक फैली हैं, बहुजनों की सांस्कृतिक परंपरा में इसका क्या स्थान है, मौजूदा लोक-जीवन में महिषासुर क…[Read more]

  • महिषासुर आंदोलन के इस कदर अचानक फैल जाने का एक बड़ा कारण था कि बहुजन समाज में इन परंपराओं की जड़ें बहुत गहरी रही हैं और इनका प्रसार उसके अवचेतन तक रहा है। इन समुदायों से आने वाले फुले, आंबेडकर, पेरियार समेत सभी चिंतकों ने असुर-संस्कृति की न सिर्फ विस्तृत गवेषणा की है, बल्कि अगर आप ध्यान से देखें तो पाएंगे कि यही उनकी वैचारिकी का प्रस्थान…[Read more]

  • Bahujan criticism underlines the presence of not only literature of the Dalit, Adivasi, and OBC sections but also Brahmanical and other dwija (upper caste) literature; and it also brings out aspects of their fundamental (social) make-up and their consequences. It interprets entrenched values and aesthetics in various kinds of literature. Thus,…[Read more]

  • बहुजन आलोचना न सिर्फ़ दलित, आदिवासी व पिछड़ा वर्ग के साहित्य बल्कि ब्राह्मणवादी साहित्य और अन्य द्विज साहित्य की मौजूदगी को भी चिन्हित करती है और उनकी बुनावट के मूल (सामाजिक) पहलुओं और उसके परिणामों को सामने लाती है। विविध प्रकार के साहित्य में विन्यस्त मूल्यों और सौंदर्यबोध की मीमांसा करती है। इस प्रकार यह कई प्रकार के आवरणों, छद॒म…[Read more]

  • यह एक संस्मरणात्मक ललित निबंध है। इसमें बिहार के कथाकार व राजनेता जाबिर हुसेन, रामधारी सिंह दिवाकर और प्रमोद रंजन के बीच साहित्यिक रचना की स्वायत्तता को लेकर हुए विमर्श का प्रसंग है। लेखक का तर्क है किसी साहित्यिक रचना में उसकी पृष्ठभूमि के उल्लेख से उसकी स्वायत्तता भंग होती है और वह रचना के पूर्ण आस्वाद में बाधक होती है।

  • 27 अक्टूबर, 2008 को एक बिहारी नवयुवक राहुल राज की मुंबई पुलिस ने हत्या कर दी थी। इसके बाद बिहार में युवाओं ने व्यापक आंदोलन किया था। कई जगहों पर तोड़फोड़ और आगजनी की घटनाएं हुईं थीं। कई दिनों तक राजधानी पटना ठप रही थी। इस संबंध में आरोप-प्रत्यारोप की लंबी राजनीति चली थी और राहुल राज को बिहारी अस्मिता के प्रतीक के रूप में देखा गया था। इ…[Read more]

  • खूबसूरत प्राकृतिक दृश्यों से परिपूर्ण किन्नौर का समाज व संस्कृति शेष भारत से अलग है। यह बौद्ध धर्म का इलाका है, जिसे हिंदूवादी संस्कृति लीलती जा रही है। आर्थिक संपन्नता के आगमन से जाति-आधारित उत्पीड़न और भेदभाव कम हो रहा है। प्रमोद रंजन ने इस यात्रा संस्मरण में किन्नौर की विशिष्ट संस्कृति, बहु पत्नी प्रथा, वहां के समाज और राजनीति…[Read more]

  • Discourse called post-humanism believes that humanism is a phony notion and an excuse for ruling over the other animals — and that it would eventually invite the destruction of the human race. They draw attention to the scientific fact that man is also an ordinary animal and just like other animals and birds is a small part of the huge e…[Read more]

  • पार्श्व गायिका लता मंगेशकर ने लगभग सात दशकों तक भारतीय संगीत की दुनिया पर राज किया। उनके गाए गीत भारत में ही नहीं, पाकिस्तान, बांग्लादेश समेत कई देशों में पसंद किए जाते थे। इस लेख में उनके सामाजिक सरोकारों और राजनीतिक रुझानों की चर्चा की गई है। उनका वैचारिक जुड़ाव राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से था, जो कि अपनी नाजीवादी विचारधारा…[Read more]

  • Load More

Daisy Barman

Profile picture of Daisy Barman

@litscholar

Active 3 years, 9 months ago