• जून, 2018 के पहले सप्ताह में फारवर्ड प्रेस के पत्रकार नवल किशोर कुमार फोन पर सैकडों लोगों ने जान से मारने की धमकियां दी थीं। उन्हें ये धमकियां रणवीर सेना के कुख्यात सुप्रीमो ब्रह्मेश्वर मुखिया के बारे में फेसबुक पोस्ट लिखने के कारण दी गईं थीं। फारवर्ड प्रेस के तत्कालीन प्रबंध संपादक प्रमोद रंजन का यह लेख उन धमकियों के संदर्भ में है।

  • Forward Press is not a novice when it comes to getting threats. Our Hindi editor Naval Kishore Kumar, who is at the receiving end this time, is not only a journalist but also a sensitive poet. Brahmeshwar Mukhiya, on the other hand, is a synonym for terror and has shamed humanity.

  • भारत सरकार के 2014 के बजट के बाद अनेक प्रकार की प्रतिक्रियाएं उत्पन्न आईं थीं, लेकिन कम लोग जानते हैं कि दलित उद्योगपतियों ने इस बजट का स्वागत किया था।

    बजट पर प्रतिक्रिया देने वाले अधिकांश बुद्धिजीवियों का कहना था कि भाजपा सरकार ने पिछली यूपीए सरकार की आर्थिक नीतियों का ही अनुसरण किया है।

    लेकिन हम जानते हैं कि इन प्रतिक्रियाओं को व्यक…[Read more]

  • Indian government’s budget, 2014 has evoked diverse reactions, and the Dalit industrialists have welcomed it.

    Dalit industrialists have heard some people claiming that The new BJP government has only followed the economic policies of the previous UPA government. But they know the interests these people represent. If the new government is t…[Read more]

  • Hierarchically Minded: Levels of Intentionality and Mind Reading: https://www.academia.edu/7962810/

  • Since its origins in the Industrial Revolution, anarchism has observed and criticized a wide swath of inequalities. Likewise, some sociologists have independently developed theoretical understandings of inequality that reflect anarchist interests and sentiments. This paper develops an anarchist-sociological grand theory of domination, offering the…[Read more]

  • जीतन राम मांझी, एक भारतीय राजनेता और बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री हैं। वो राजनीतिक पार्टी जनता दल (यूनाइटेड) के नेता के तौर पर 23वें मुख्यमंत्री रहे। मांझी बिहार राज्य में दलित समुदाय के तीसरे मुख्यमंत्री रहे। उनकी सरकार ने अपने अल्प कार्यकाल में कमजोर तबकों को जल्दी इन्साफ दिलाने की तीव्र कोशिश, गरीबों को पाँच डिसमिल जमीन उपलब्ध करान…[Read more]

  • Louis Althusser was one of the foremost Marxist philosophers of the 20th century. His thinking laid the groundwork for critical educational theory, yet it is often misunderstood in critical pedagogy and sociology of education. In this open access book, David Backer reexamines Althusser’s philosophy of education, presents its flawed reception in…[Read more]

  • पेरियार के मूल तमिल लेखन का हिंदी अनुवाद उपलब्ध नहीं था, इस कारण उनकी वैचारिकी से हिंदी क्षेत्रों के दलित-बहुजन आंदोलन का उस तरह का सघन और सक्रिय रिश्ता विकसित नहीं हो था, जैसा कि डॉ. आम्बेडकर और बहुत हद तक जोतिराव फुले से हो सका है। इस कमी को प्रमोद रंजन द्वारा 2020 में संपादित पेरियार पर केंद्रित तीन पुस्तकों की ऋंखला ने पूरा किया। ये पु…[Read more]

  • पेरियार के मूल तमिल लेखन का हिंदी अनुवाद उपलब्ध नहीं था, इस कारण उनकी वैचारिकी से हिंदी क्षेत्रों के दलित-बहुजन आंदोलन का उस तरह का सघन और सक्रिय रिश्ता विकसित नहीं हो था, जैसा कि डॉ. आम्बेडकर और बहुत हद तक जोतिराव फुले से हो सका है। इस कमी को प्रमोद रंजन द्वारा 2020 में संपादित पेरियार पर केंद्रित तीन पुस्तकों की ऋंखला ने पूरा किया। ये पु…[Read more]

  • 21 मई 2012 को हरियाणा के भगाना (भगाणा) गांव में दबंग जाति के लोगों से विवाद के बाद दलित-पिछड़े परिवारों के 52 से ज्यादा परिवारों को अपना गांव छोड़ने पर मजबूर होना पड़ा था। विवाद की शुरूआत शामलात जमीन पर कब्जा हटवाने को लेकर हुई थी। दबंग समुदाय ने उनका हुक्का पानी बंद कर दिया था। इस घटना के 2 साल बाद 23 मार्च 2014 को भगाना गांव की धानुक समुदाय क…[Read more]

  • यह पुस्तक बहुजन साहित्य की अवधारणा पर केंद्रित है। यह अवधारणा सभी वंचित तबकों के साहित्य में उनकी सामाजिक पृष्ठभूमि के आधार पर साझेपन की तलाश करती है। किंतु, यह सामाजिक पृष्ठभूमि के साथ-साथ लेखक विचारों को भी संज्ञान में लेती है। इस प्रकार, बहुजन साहित्य भारतीय संदर्भ में दलित, आदिवासी, अन्य पिछड़ा वर्ग, पसमांदा मुसलमान, धुमंतू जाति…[Read more]

  • सितंबर, 2009 में इतिहास, समाजशास्त्र, दर्शन, साहित्य व पत्रकारिता के क्षेत्र में काम करने वाले अनेक प्रमुख विद्वान व युवा अध्येता शिमला में ‘हिंदी की आधुनिकता’ पर पुनर्विचार करने के लिए जुटे थे। समाजशास्त्री अभय कुमार दुबे के संयोजन में यह सात दिवसीय आयोजन भारतीय उच्च अध्ययन संस्थान, शिमला ने किया था।

    आयोजन में इस विषय पर व्यापक विचार-विमर्श…[Read more]

  • In the course, I give a basic introduction into some of the recent developments in the field of computational historical linguistics. While this field is predominantly represented by phylogenetic approaches with whom scholars try to infer phylogenetic trees from different kinds of language data, the approach taken here is much broader,…[Read more]

  • The weblog Computer-Assisted Language Comparison in Practice, published on the Hypotheses platform for scientific blogging (https://calc.hypotheses.org/), offers tutorials and discussion notes on computer-assisted approaches to the history and diversity of languages. A substantial part of its content is contributed as part of the ERC Starting…[Read more]

  • ऐसी कोई भी बात को जो लॉकडाउन की आवश्यकता को कम करके बताए, वह या तो सोशल-मीडिया से गायब हो गई, या फिर उनकी रीच खत्म कर दी गई। इस लेख में बताया गया है कि ऐसा क्यों हुआ और सूचना प्रौद्योगिकी के दैत्यों ने किस तरह पूरे विश्व पर कब्जा जमाया।

  • प्रभाष जोशी की बौद्धिकता आजीवन अंतत: किसके पक्ष में रही? एक आदमी जो अन्यत्र किंचित तार्किक था, क्यों सामाजिक समानता का आग्रही नहीं बन सका? वर्ण-व्यवस्था का समर्थन कर उन्होंने गांधीवाद का विकास किया उसकी अवैज्ञानिकता को ही प्रमाणित किया? भारतीय प्रभुवर्ग की गुलामी उन्होंने क्यों स्वीकार की? सिर्फ इसलिए कि वह इन्हीं के बीच पैदा हुए थे?

    इस संस्म…[Read more]

  • इस पुस्तिका में बिहार की कोसी नदी में वर्ष 2008 में आई प्रलयंकारी बाढ़ का आंखों देखा वर्णन है। बाढ़ में हजारों लोग मारे गए थे, लेकिन बिहार में सत्ता पर काबिज पार्टी ने इस त्रासदी काे एक जाति विशेष को सबक सिखाने के अवसर के रूप में लिया था। इसका तथ्यात्मक ब्यौरा इसमें है। साथ ही इसमें बेघर हुए लोगों की मर्मांतक पीड़ा का भी चित्रण है।…[Read more]

  • जीतन राम मांझी, एक भारतीय राजनेता और बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री हैं। वो राजनीतिक पार्टी जनता दल (यूनाइटेड) के नेता के तौर पर 23वें मुख्यमंत्री रहे। मांझी बिहार राज्य में दलित समुदाय के तीसरे मुख्यमंत्री रहे। 20 फरवरी 2015 को उन्होनें मुख्यमंत्री पद से इस्तीफ़ा दे दिया। यह पुस्तक उनके व्यक्तित्व और उनके कार्यों पर आधारित है।
    बहुजन…[Read more]

  • This is the English edition of the book ‘Mahishasur: Ek Jannayak’. The book searches for a hero who has been ever-present in the memories, traditions, festivals, and celebrations of a majority of the people of India but who the dominant culture of the country has given the image of a villain. Recently, the search for this people’s hero triggered a…[Read more]

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Sr. Advocate Khimlal Devkota

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@kdevkota

Active 2 years, 6 months ago