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Pramod Ranjan deposited समय से संवाद आवश्यक in the group
Literary theory on Humanities Commons 3 years agoप्रेमकुमार मणि की यह संपादकीय टिप्पणी पटना से प्रकाशित मासिक पत्रिका ‘जन विकल्प’ की साहित्य वार्षिकी, 2008 में प्रकाशित हुई थी। यह टिप्पणी ‘समय से संवाद’ पुस्तक में भी संकलित है।
जन विकल्प के संपादक प्रेमकुमार मणि और प्रमोद रंजन थे। -
Ali Shehzad Zaidi deposited Introduction: The Magic Mix in the group
Public Humanities on Humanities Commons 3 years agoIntroduction to the poetry of Mohammad Zaman.
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Pramod Ranjan deposited हिंदी पट्टी में पेरियार in the group
Cultural Studies on Humanities Commons 3 years agoपेरियार के मूल तमिल लेखन का हिंदी अनुवाद उपलब्ध नहीं था, इस कारण उनकी वैचारिकी से हिंदी क्षेत्रों के दलित-बहुजन आंदोलन का उस तरह का सघन और सक्रिय रिश्ता विकसित नहीं हो था, जैसा कि डॉ. आम्बेडकर और बहुत हद तक जोतिराव फुले से हो सका है। इस कमी को प्रमोद रंजन द्वारा 2020 में संपादित पेरियार पर केंद्रित तीन पुस्तकों की ऋंखला ने पूरा किया। ये पु…[Read more]
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Pramod Ranjan deposited हिंदी साहित्येतिहास का बहुजन पक्ष in the group
Literary theory on Humanities Commons 3 years agoयह पुस्तक बहुजन साहित्य की अवधारणा पर केंद्रित है। यह अवधारणा सभी वंचित तबकों के साहित्य में उनकी सामाजिक पृष्ठभूमि के आधार पर साझेपन की तलाश करती है। किंतु, यह सामाजिक पृष्ठभूमि के साथ-साथ लेखक विचारों को भी संज्ञान में लेती है। इस प्रकार, बहुजन साहित्य भारतीय संदर्भ में दलित, आदिवासी, अन्य पिछड़ा वर्ग, पसमांदा मुसलमान, धुमंतू जाति…[Read more]
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Pramod Ranjan deposited Mahishasur A people’s hero in the group
Cultural Studies on Humanities Commons 3 years, 1 month agoThis is the English edition of the book ‘Mahishasur: Ek Jannayak’. The book searches for a hero who has been ever-present in the memories, traditions, festivals, and celebrations of a majority of the people of India but who the dominant culture of the country has given the image of a villain. Recently, the search for this people’s hero triggered a…[Read more]
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Pramod Ranjan deposited पेरियार के प्रतिनिधि विचार in the group
Cultural Studies on Humanities Commons 3 years, 1 month agoहिंदी में पेरियार का मूल लेखन और जीवनी उपलब्ध नहीं थी। सामाजिक आंदोलनों व अकादमियों में जो नई हिंदी भाषी पीढ़ी आई है, वह ‘नास्तिक पेरियार’ से तो खूब परिचित है और उनके प्रति उसमें जबर्दस्त आकर्षण भी है, लेकिन यह पीढ़ी उनके विचारों के बारे में कुछ सुनी-सुनाई, आधी-अधूरी बातें ही जानती है। वस्तुतः उसने पेरियार को पढ़ा नहीं है।
उनकी ‘द…[Read more] -
Pramod Ranjan deposited धर्म और विश्वदृष्टि- पेरियार ई. वी. रामासामी in the group
Cultural Studies on Humanities Commons 3 years, 1 month agoयह किताब ई.वी. रामासामी नायकर ‘पेरियार’ (17 सितम्बर, 1879—24 दिसम्बर, 1973) के दार्शनिक व्यक्तित्व से परिचित कराती है। धर्म, ईश्वर और मानव समाज का भविष्य उनके दार्शनिक चिन्तन का केन्द्रीय पहलू रहा है। उन्होंने मानव समाज के सन्दर्भ में धर्म और ईश्वर की भूमिका पर गहन चिन्तन-मनन किया है। इस चिन्तन-मनन के निष्कर्षों को इस किताब के विविध लेखों मे…[Read more]
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Pramod Ranjan deposited महिषासुर एक जननायक in the group
Cultural Studies on Humanities Commons 3 years, 1 month agoप्रमोद रंजन द्वारा संपादित पुस्तक “महिषासुर एक जननायक” का उद्देश्य यह स्पष्ट करना है कि आखिर महिषासुर नाम से शुरू किया गया यह आन्दोलन है क्या? इसकी आवश्यकता क्यों पड़ी? इसके निहितार्थ क्या हैं? इस पुस्तक में प्रश्न उठाया गया है कि जब असुर एक प्रजाति है तो उसकी हार या उसके नायक की ह्त्या का उत्सव किस सांस्कृतिक मनोवृत्ति का परिचायक…[Read more]
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