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Pramod Ranjan deposited ‘हलंत’ और समकालीन कविता का बौद्धिक दायरा in the group
Literary theory on Humanities Commons 2 years ago अष्टभुजा शुक्ल की अनेक कविताओं का कथ्य भी बहुत समस्याग्रस्त है। उनमें प्रतिक्रियावादी मूल्य भरे पड़े हैं। इन कविताओं को पढ़ते हुए लगता है कि वे समाज को पीछे ले जाने वाले कवि हैं। इस लेख में उनकी कविता की प्रतिगामिता पर चर्चा की गई है।