• Pramod Ranjan deposited नई तकनीक और पिछड़ती भाषा in the group Group logo of Artificial IntelligenceArtificial Intelligence on Humanities Commons 2 years, 1 month ago

    आज तकनीक पर कामचलताऊ ढ़ंग से लिखने-बोलने से से काम नहीं चलेगा, जैसा कि हिंदी बुद्धिजीवी अभी कर रहे हैं। बल्कि इस बारे में हल्की-फुल्की भाषा में सामग्री पढ़ने की चाह रखने से भी बाज आना चाहिए। चलताऊ भाषा में आप नए उपकरणों की गुणवत्ता की, उनके उपयोग आदि की जानकारी ले-दे सकते हैं। किसी स्मार्ट उपकरण समीक्षाएं पढ़कर उसे खरीदने या न खरीदने का फैसला कर सकते हैं। लेकिन उन उपरकणों के व्यक्ति के शरीर, उसकी चेतना, उसके अवचेतन पर पड़ने वाले प्रभावों को उसी कामचलताऊ भाषा में चिन्हित नहीं कर सकते। उसे कैसे सार्वजनिक निगरानी में लाया जाए, किस दिशा में उसका विकास हो, किन दिशाओं में उन्हें न आगे बढ़ने दिया जाना चाहिए; इन मुद्दों पर विमर्श करने के लिए एक विशिष्ट, विभिन्न पारिभाषिक शब्दों से युक्त भाषा की आवश्यकता है।