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Pramod Ranjan deposited राणा बैनर्जी: नया नहीं इस जीवन में मरना on Humanities Commons 2 years, 11 months ago
प्रमोद रंजन, सामाजिक कार्यकर्ता राणा बैनर्जी के बहुमुखी प्रतिभा को इस लेख के माध्यम से सामने लाते हैं। राणा बैनर्जी ने आत्महत्या कर लिया था। जब कवि और लेखक आत्महत्या करने लगे तो यह समझ लेना चाहिए कि देश पर, समाज पर गहरा संकट आनेवाला है। आत्महत्या स्वजनित नहीं होती अपितु परिस्थितिजन्य होती है। रंजन यह बताते है कि बेईमान आदमी कभी आत्महत्या नहीं कर सकता।