• हर सनसनीखेज खबर की तरह इस खबर को याद रखे जाने की अवधि भी अंततः बहुत छोटी रही। अन्यथा तीन माह पहले महाराष्ट्र में बिहारियों की पिटाई की घटना और राहुल राज की हत्या के बाद जिस तरह राजनीति गरमाई थी, उससे कुछ लोगों को ऐसा लगा था कि मामला लंबा चलेगा। कुछ तो यहाँ तक कह रहे थे कि यह घटना देश की राजनीति की दिशा ही बदल देगी। लेकिन न कुछ ऐसा होना था, न हुआ। अलबत्ता इस बार भी मीडियाई हुड्दंग ने इस मुद्दे से जुड़े वास्तविक सवालों को सयास पीछे धकेल दिया। अब जब मामला शांत हो गया है, बिहार व देश की राजनीति के मौजूदा रुझानों को उन जरूरी सवालों की ओर लौट कर समझा जा सकता है।