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Pramod Ranjan deposited पिछली सीटों पर हिस्सेदारी : बिहार के मीडिया की जातीय संरचना on Humanities Commons 3 years ago
यह बिहार के मीडियाकर्मियों के जाति सर्वेक्षण का सारांश है। इससे संबंधित एक विस्तृत सर्वेक्षण मैंने वर्ष 2009 में किया गया था, जिसे अन्य लेखों के साथ एक पुस्तिका ‘मीडिया में फॉरवर्ड’ (मीडिया में भागीदारी) के रूप में संकलित किया गया है।
यह सारांश द्विभाषी (अंग्रेजी-हिंदी) पत्रिका फारवर्ड प्रेस में जून 2011 में प्रकाशित हुआ था।
इस सर्वेक्षण के लिए राज्य स्तर के मीडिया संस्थानों में आधिकारिक लोगों की एक सूची व्यवस्थित रूप से तैयार की गई थी। उनके नाम, गृहनगर, शिक्षा, धर्म और जाति से संबंधित कॉलम विभिन्न स्रोतों से एकत्रित जानकारी की मदद से भरे गए थे।
सर्वेक्षण के पहले दौर में हमने पाया कि बिहार के मीडिया में “फैसला लेने वाले पदों” पर वंचित तबके का कोई भी व्यक्ति नहीं है। हमें शक था कि भले ही वे कक्षा में दलपति न बन सके हों, लेकिन शायद उनको पिछले बैंचों पर तो देखा जा सकता है। इसलिए हमने इस सर्वेक्षण का दायरा बढ़ाने का फ़ैसला किया। इस बार हिंदी और अँग्रेजी के 42 संस्थानों के अलावा पटना से प्रकाशित उर्दू के पाँच अखबारों को भी इसमें शामिल किया गया। कुल 47 मीडिया के संस्थानों के 230 पत्रकारों को सर्वेक्षण में समेटते हुए हमने पाया कि 73 फीसदी पदों पर ऊँची जाति के हिंदुओं (ब्राह्मण, भूमिहार, राजपूत, कायस्थ) का कब्जा है। अन्य पिछड़ा वर्ग के हिंदू 10 फीसदी, अशराफ़ मुसलमान 12 फीसदी तथा पसमांदा मुसलमान 4 फीसदी है। महिलाओं की उपस्थिति लगभग 4 फीसदी रही। पटना के मीडिया संस्थानों में महज तीन दलित पत्रकार मिले। जैसा कि पहले कहा गया, वंचित तबकों इन लोगों में से कोई भी “फैसला लेने वाले” पर नहीं था।