-
Pramod Ranjan deposited महिषासुर एक जननायक on Humanities Commons 3 years ago
महिषासुर आदिवासियों-दलितों-बहुजनों के पुरखा और महानायक रहे हैं। आर्य-ब्राह्मणवादीयों ने हमारे पुरखों को क्यों और कैसे खलनायक बनाया, क्यों उन्हें दैत्य के रूप में प्रस्तुत किया, क्यों बहुजन के सभी महान नायकों का दैत्यीकरण किया गया, ऐसा करने के पीछे उद्देश्य क्या था? क्यों एक स्त्री को महिषासुर की हत्यारिनी के रूप में प्रस्तुत किया गया। वह कौन-सा सांस्कृतिक, राजनीतिक और आर्थिक स्वार्थ था, जिसे ब्राह्मणवादी इस माध्यम से पूरा करना चाहते थे? आदि ऐसे विभिन्न प्रश्नों का जवाब महिषासुर-एक जननायक किताब देती है। यह किताब द्विज संस्कृति के बरक्स बहुजन संस्कृति को स्थापित करने के संघर्ष का एक हिस्सा है।