• पुस्तक ‘महिषासुर : मिथक व परम्पराएँ’ में दुर्गा और महिषासुर के मिथकों पर एक जीवंत इतिहास की यात्रा मिलती है। इक्कीसवीं शताब्दी में महिषासुर आंदोलन द्विज संस्कृति के लिए चुनौती बनकर उभरा है। आदिवासियों, पिछड़ों, और दलितों का एक व्यापक हिस्सा इसके माध्यम से नये सिरे से अपनी सांस्कृतिक दावेदारी पेश कर रहा है। यद्यपि यह पुस्तक पाँच खंडों में विभाजित है, जो यात्रा वृतांत, मिथक व परम्पराएँ, आन्दोलन किसका, किसके लिए, असुर और साहित्य नाम से हैं, जबकि छठा खंड परिशिष्ट है, जिसमे महिषासुर दिवस से सम्बन्धित तथ्य दिए गए हैं। किन्तु इस पुस्तक में सबसे महत्वपूर्ण खंड यात्रा वृतांत है, जिसमें प्रमोद रंजन, नवल किशोर कुमार और अनिल वर्गीज की यात्राओं के वर्णन हैं।