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Pramod Ranjan deposited जन विकल्प का प्रकाशन: वह दुनिया और आज का दौर [Publication of Jan Vikalp: That world and today’s era] on Humanities Commons 3 years, 1 month ago
मासिक पत्रिका जन विकल्प 2007 में पटना से प्रकाशित हुई थी। इसके संपादक प्रेमकुमार मणि और प्रमोद रंजन थे। पत्रिका के केवल 11 अंक प्रकाशित हुए थे। उस समय इस पत्रिका की जनपक्षधरता, वस्तुनिष्ठता और मौलिक उत्साह ने समाजसेवियों और बुद्धिजीवियों को खूब आंदोलित किया था।
जन विकल्प में प्रकाशित प्रतिनिधि सामग्री को ‘समय से संवाद: जन विकल्प संचयिता’ नामक पुस्तक में संकलित किया गया है, जिसे अनन्य प्रकाशन, दिल्ली ने प्रकाशित किया है।
यह लेख उस पुस्तक की प्रस्तावना है।
यह लेख इक्कीसवीं सदी के पहले दशक में साहित्यिक-वैचारिक क्षेत्र में हुए विकास का वर्णन करता है और प्रौद्योगिकी के कारण विचारों की दुनिया में संभावित बदलावों की ओर इशारा करता है।
इस लेख का पहला ड्राफ्ट यहां भी उपलब्ध है : https://junputh.com/column/sankraman-kaal-publication-of-jan-vikalp-and-global-changes/