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Pramod Ranjan deposited ‘हिंदी साहित्येतिहास का बहुजन पक्ष’, ‘बहुजन साहित्य की प्रस्तावन’ व ‘महिषासुर एक जननायक’: नई सांस्कृतिक-साहित्यिक दृष्टि की प्रस्तावना in the group
Book Reviewing on Humanities Commons 3 years, 1 month ago बहुजन साहित्य और संस्कृति की अवधारणा ने पिछले कुछ वर्षों में आकार लेना शुरू किया है। अभी हाल (2016) में आए प्रमोद रंजन द्वारा संपादित तीन संकलन- ‘बहुजन साहित्य की प्रस्तावना’, ‘हिन्दी साहित्येतिहास का बहुजन पक्ष’और ‘महिषासुर एक जननायक’- बहुजन साहित्यिक-सांस्कृतिक आंदोलन की प्रस्तावना और अवधारणा को सामने रखते हैं और इसे पल्लवित-पुष्पित तथा विकसित करने का पुरजोर आग्रह करते हैं तथा इसे भारत के बहुसंख्यक समाज के बेहतर भविष्य हेतु अपरिहार्य और अनिवार्य मानते हैं।
क्या है बहुजन साहित्य, भारतीय समाज के किस तबके का यह प्रतिनिधित्व करता है? किस संस्कृति-साहित्य, मूल्य व्यवस्था, संस्कार, परंपरा और समाज व्यवस्था की यह मुखालफत करता है और इसके बरक्स किन चीजों की स्थापना करना चाहता है तथा इसकी वैचारिकी क्या है? और अतीत में किन परंपराओं से यह अपना नाता जोड़ना चाहता है और किसे खारिज करता है? इन प्रश्नों के उत्तर देने की कोशिश ये संकलन करते हैं।
सिद्धार्थ का विश्लेषण :