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Pramod Ranjan deposited महामारी के दौर में डॉक्टरों की भूमिका, सीमाएं और प्रोटोकॉल के कुछ सवाल in the group
Medical Humanities on Humanities Commons 3 years, 1 month ago अधिकांश लोग समझते हैं कि चिकित्सक ही जांच द्वारा तय करते हैं कि किसे कोविड है और किसे नहीं तथा अगर किसी की मौत होती है तो चिकित्सक ही यह तय करते हैं कि वह मृत्यु कोविड से हुई है या किसी अन्य कारण से। इसलिए जब कोई खुद को चिकित्सक बताता है या अपने परिवार में चिकित्सकों के होने का ज़िक्र करता है तो लोग उसकी बात पर अनिवार्य रूप से विश्वास करते हैं, लेकिन कोविड के मामले में वस्तुस्थिति कुछ और है। इस लेख में कोविड 19 के दौरान डॉक्टरों के लिए निर्धारित प्रोटोकॉल से होने वाली गड़बड़ियों की चर्चा की गई है।
कोविड से हुई मौत के निर्धारण में भी चिकित्सक की भूमिका एकदम शाब्दिक अर्थ में रबर स्टैंप की तरह है। कोविड से हुई मौतों के निर्धारण के लिए भारत समेत दुनिया के अधिकांश देशों में विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा विकसित एक विशेष कोड का इस्तेमाल किया जा रहा है, जिसमें सिर्फ़ मृतक का लक्षण, जांच रिपोर्ट आदि भरनी होती है और उस कोड के अनुसार ही निर्धारित करना होता है कि मौत का मुख्य कारण किस बीमारी को बताया जाना है। अगर किसी व्यक्ति की कोविड की टेस्ट-रिपोर्ट पॉज़िटिव आई है तो चाहे किसी भी कारण से[v] उसकी मौत हुई हो, उस कोड के अनुसार उसे कोविड से हुई मौत के रूप में ही गिना जाएगा। यहाँ तक कि भले ही कोविड की जांच भी न हुई हो, रिपोर्ट अस्पष्ट या निगेटिव आयी हो, लेकिन अगर उसमें ऐसे कोई भी लक्षण मौजूद हों, जो कोविड के लक्षणों से मिलते जुलते हों, जैसे- खांसी, सर्दी, ज़ुकाम, साँस लेने में तकलीफ़, तो उसे उस कोड के अनुसार उसकी मौत को कोविड से हुई मौत के रूप में दर्ज किया जाना है।