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Pramod Ranjan deposited शिमला डायरी: पीछे छूट गई धूल को समेट लाया कौन खानाबदोश in the group
Book Reviewing on Humanities Commons 3 years, 1 month ago शिमला डायरी’ अपने समय और समाज की एक ऐसी साहित्यिक-सांस्कृतिक डायरी और दस्तावेज है, जिसका एक अहम हिस्सा हिंदी पत्रकारिता की दुनिया है। इसका विहंगम अवलोकन किया है चर्चित कवि और पत्रकार प्रमोद कौंसवाल ने, जिन्होंने काफी समय तक चंडीगढ़ में रहते हुए खुद शिमला, चंडीगढ़ और पंजाब की पत्रकारिता की दुनिया को बहुत करीब से देखा है। यह किताब की सिर्फ एक समीक्षा नहीं है, बल्कि उस काल खंड की पत्रकारिता व चंडीगढ़-हिमाचल की साहित्यिक-सांस्कृतिक दुनिया का एक संक्षिप्त, रोचक संस्मरण भी है।