• महिषासुर आंदोलन से संबंधित यह पहली पुस्तिका है, जिसमें महिषासुर से संबंधित विभिन्न परंपराओं की जानकारी है। इस पुस्तिका के बाद 2014 में एक और पुस्तिका “महिषासुर” शीर्षक से प्रकाशित हुई। 2016 में इन दोनों पुस्तिकाओं के लेखों को कुछ अन्य लेखाें के साथ मिलाकर एक पुस्तक “महिषासुर: एक जननायक” प्रकाशित की गई। उसके बाद एक अन्य स्वतंत्र संपादित पुस्तक “महिषासुर: मिथक व परंपराएं” शीर्षक से आई। इनमें से, “महिषासुर एक जननायक” का अग्रेजी अनुवाद “Mahishasur: A people’s Hero” नाम से प्रकाशित हुआ।