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Pramod Ranjan deposited महिषासुर: एक जननायक on Humanities Commons 3 years, 3 months ago
यह किताब भारत के प्राचीन जननायक महिषासुर की खोज करती है , जिसकी नायक के रूप में उपस्थिति तो इस देश की बहुसंख्य जनता की स्मृतियों , परम्पराओं , त्योहारों , उत्सवों में हमेशा रही है , लेकिन देश की वर्चस्वशाली संस्कृति ने उसे खलनायक की छवि दे दी थी। हिंदी में बेस्ट सेलर रही यह किताब भारत में शुरू हुए बहुजन सांस्कृतिक विमर्श पर आधारित है, जिसे महिषासुर आंदोलन के नाम से जाना गया।
यह पुस्तक जून, 2016 में प्रकाशित हुई थी।
महिषासुर पर केंद्रित इस पुस्तक में पूर्व प्रकाशित दो पुस्तिकाओं ‘किसकी पूजा कर रहे हैं बहुजन?’ (2013) और महिषासुर (2014) से सामग्री संकलित की गई है तथा कई नए लेख भी जोड़े गए हैं।