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Pramod Ranjan deposited दोआबा : जारी है बहस in the group
Literary Journalism on Humanities Commons 3 years, 4 months ago यह पटना से प्रकाशित ‘दोआबा’ पत्रिका के प्रवेशांक की समीक्षा है। दोआबा के संपादक जाबिर हुसेन साहित्यकार के अतिरिक्त राजनेता और समाजकर्मी भी रहे हैं। वे लगभग एक दशक तक बिहार विधान परिषद के सभापति रहे।
दोआबा के समीक्षित अंक में 100 से अधिक रचानकारों की रचानाएं प्रकाशित हुईं थीं, जिनमें कंवल भारती, मधुकर सिंह,मनमोहन सरल, हृदयेश, प्रेमकुमार मणि, अनिल गांगल, हेमंत कुकरेती, विनय सौरभ, पवन करण, कुमार मुकुल, रमेश ऋतंभर, वसंत त्रिपाठी, विनय कुमार, निर्मला पुतुल, प्रेमरंजन अनिमेष, संध्या गुप्ता, ऋतुराज, सुनील गंगोपाध्याय, राजकमल चौधरी, बाबूराव बागुल, संतोष दीक्षित, मुशर्रफ आलम जौकी आदि शामिल हैं।
इस समीक्षा में अंक में प्रकाशित सामग्री का सामान्य परिचय देते हुए उम्मीद जताई गई है कि ‘दोआबा’ के आगमी अंक अधिक विचारोत्तेजक होंगे।