• Pramod Ranjan deposited दोआबा : जारी है बहस on Humanities Commons 3 years, 5 months ago

    यह पटना से प्रकाशित दोआबा पत्रिका के प्रवेशांक की समीक्षा है। दोआबा के संपादक जाबिर हुसेन वरिष्ठ राजनेता और समाजकर्मी भी रहे हैं। वे लगभग एक दशक तक बिहार विधान परिषद के सभापति रहे। उन्होंने बिहार विधान परिषद् की पत्रिका ‘साक्ष्य’ नामक पत्रिका का भी संपादन किया था।

    दोआबा के समीक्षित अंक में 100 से अधिक रचानकारों की रचानाएं प्रकाशित हुईं थीं, जिनमें कंवल भारती, मधुकर सिंह,मनमोहन सरल, हृदयेश, प्रेमकुमार मणि, अनिल गांगल, हेमंत कुकरेती, विनय सौरभ, पवन करण, कुमार मुकुल, रमेश ऋतंभर, वसंत त्रिपाठी, विनय कुमार, निर्मला पुतुल, प्रेमरंजन अनिमेष, संध्या गुप्ता, ऋतुराज, सुनील गंगोपाध्याय, राजकमल चौधरी, बाबूराव बागुल, संतोष दीक्षित, मुशर्रफ आलम जौकी आदि शामिल हैं।
    इस समीक्षा में अंक में प्रकाशित सामग्री का सामान्य परिचय देते हुए उम्मीद जताई गई है कि ‘दोआबा’ के आगमी अंक अधिक विचारोत्तेजक होंगे।