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Pramod Ranjan deposited मीडिया में हिस्सेदारी in the group
Literary Journalism on Humanities Commons 3 years, 6 months ago यह पुस्तक बिहार के मीडिया संस्थानों में कार्यरत पत्रकारों की सामाजिक पृष्ठभूमि पर केंद्रित है। इसमें वर्ष 2009 में किया गया वह चर्चित सर्वेक्षण भी शामिल है, जिसमें पाया गया था कि बिहार की पत्रकारिता में फैसला लेने वाले पदों पर एक भी दलित, पिछड़ा, आदिवासी या स्त्री नहीं है।
पुस्तक में कुल छह लेख शामिल हैं। जिनका विवरण निम्नांकित हैं :
1. पिछली सीटों की हिस्सेदारी (बिहार के मीडिया संस्थानों की सामाजिक पृष्ठभूमि का सर्वेक्षण)
2. विश्वास का धंधा (पेड न्यूज के समाजशास्त्र पर केंद्रित लेख)
3. अविश्वास का मतलब (पत्रकारिता क्यों कतई विश्वसनीय नहीं हो सकती)
4. सन् 47 से पहले, और सन् 90 के बाद (हिंदी पत्रकारिता के इतिहास का आलोचनात्मक अध्ययन)
5. चयन के विकल्प पर ताला (हिंदी अखबारों में रचनाशीलता की कमी क्यों है)
6. पत्रकारिता का चोली-दामन (बिहार की पत्रकारिता में व्याप्त चाटुकारिता पर केंद्रित)