• लक्ष्मी नगर के मेट्रो स्टेशन से उत्तर की ओर बढ़ते ही शकरपुर का ‘स्कूल ब्लॉक’ मोहल्ला आता है। कुछ समय पहले तक इसकी एक गली पर एक हैरतअंगेज साइन-बोर्ड लगा था, जिस पर बड़े अक्षरों में लिखा था – ‘जाति जरूरी है’। बोर्ड में जाति के फायदों का उल्लेख करते हुए इसे हर जगह के लिए आवश्यक बताया गया था। बोर्ड एकदम मुख्य सड़क पर था। आते-जाते हजारों लोग उसे रोजाना देखते रहे होंगे। साइन बोर्ड पर लिखा था कि इसे भूमिहार जाति द्वारा ‘अखिल भारतीय मानव कल्याण समिति’ नामक संस्था की ओर से जारी किया गया है।

    अब उस साइन बोर्ड को हटा लिया गया है।  (इन पंक्तियों के लेखक को उस साइन बोर्ड की तस्वीर न ले पाने का अफसोस है)।

    उसकी जगह एक नया साइन बोर्ड लग गया है, जिस पर लिखा गया है – ‘सत्य ही मानव धर्म है, जो सर्वजातीय है। सांप्रदायिक द्वेष को भुलाकर सद्भावना की ओर कदम बढ़ाएं’। यह बोर्ड उसी  ‘अखिल भारतीय मानव कल्याण समिति’ ने बनवाया है, और इसे पहले वाले बोर्ड की जगह ही लगाया गया है। जारी-कर्ता के रूप में भूमिहार जाति से आने वाले किन्हीं त्यागी का नाम लिखा है। साइन बोर्ड के अनुसार, वे उपरोक्त संस्था के अध्यक्ष हैं तथा लोकसभा के प्रत्याशी हैं।

    इस परिवर्तन के कारण क्या-क्या हो सकते हैं, यह सिर्फ अनुमान ही लगाया जा सकता है। मसलन, क्या हम मान लें कि ‘अखिल भारतीय मानव कल्याण समिति’ का हृदय परिवर्तन हो गया है? या फिर, वर्षों पहले दिल्ली आए कथित ऊंची जाति के इन ‘बिहारियों’ ने जाति से छुटकारा पा लिया है और अब ‘सर्वजातीय सत्य’ की खोज में जुट गए हैं? क्या त्यागी महोदय को इस सत्य का पता चुनाव लड़ने के दौरान हुआ होगा? या फिर, यह मानसिक रूप से पिछड़े हुए लोगों का एक नया पाखंड भर है?

    कारण जो भी हो। पूर्वी दिल्ली के इन इलाकों में घूमते हुए यह तो महसूस होता ही है कि अंतर-जातीय विवाहों के बावजूद जाति खत्म नहीं हो रही है।